RSS warns BJP: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) को बंगाली भाषी नागरिकों के साथ हो रहे दुर्व्यवहार को लेकर कड़ी चेतावनी दी है। संघ का मानना है कि भाजपा का यह रुख ममता बनर्जी को राजनीतिक बढ़त दे रहा है और यह पार्टी के लिए “आत्मघाती कदम” साबित हो सकता है। भाजपा शासित राज्यों में बंगाली प्रवासी मजदूरों और कार्यकर्ताओं पर हो रहे अत्याचारों पर ममता बनर्जी लगातार मुखर हैं, और तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने इसे लेकर सड़कों पर प्रदर्शन तेज कर दिए हैं।

संघ की कड़ी चेतावनी: “ममता को मत दो हथियार”
सूत्रों के अनुसार, संघ के शीर्ष नेतृत्व ने भाजपा के केंद्रीय नेताओं से इस विषय पर सीधे बातचीत की है। आरएसएस का कहना है कि भाजपा “ममता बनर्जी को खुद ही राजनीतिक हथियार थमा रही है”, जिससे तृणमूल कांग्रेस को बंगाल में मजबूत होने का मौका मिल रहा है। संघ की चिंता का प्रमुख कारण यह है कि घुसपैठियों के खिलाफ कार्रवाई की आड़ में कई वैध नागरिकों को भी निशाना बनाया जा रहा है, सिर्फ इसलिए कि वे बंगाली बोलते हैं।

बंगाली भाषी प्रवासियों पर बढ़ते हमले
देश के कुछ भाजपा शासित राज्यों में बंगाली बोलने वाले प्रवासी मजदूरों के साथ भेदभाव और हिंसा की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। महाराष्ट्र, गुजरात और असम जैसे राज्यों में ऐसी घटनाओं की खबरें सामने आई हैं। इन मामलों को लेकर न सिर्फ सामाजिक संगठनों ने चिंता जताई है, बल्कि आरएसएस नेतृत्व ने भी महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और केंद्र सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री से इस पर चर्चा की है।
जोधपुर में अहम बैठक, मुद्दा उठने की संभावना
5 से 7 सितंबर तक राजस्थान के जोधपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय समन्वय बैठक होने जा रही है, जिसमें सरसंघचालक मोहन भागवत भी मौजूद रहेंगे। माना जा रहा है कि इस बैठक में बंगालियों पर हो रहे अत्याचार और इसका बंगाल की राजनीति पर प्रभाव अहम मुद्दा रहेगा। संघ का मानना है कि इससे उनकी पश्चिम बंगाल में शाखाओं के विस्तार पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है।
संघ की रणनीति: घुसपैठियों के खिलाफ, लेकिन वैध नागरिकों के साथ
संघ स्पष्ट कर चुका है कि वह अवैध घुसपैठियों के खिलाफ है, लेकिन वैध नागरिकों के साथ हो रहे अन्याय को किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने भाजपा को आगाह किया है कि इस मुद्दे पर संवेदनशील और संतुलित दृष्टिकोण अपनाना जरूरी है, नहीं तो बंगाल में पार्टी की संभावनाओं को गहरा नुकसान हो सकता है।
आरएसएस की इस चेतावनी को भाजपा के लिए गंभीर राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। यदि भाजपा नेतृत्व ने समय रहते अपनी रणनीति में बदलाव नहीं किया, तो ममता बनर्जी इस मुद्दे को आगामी चुनावों में भुनाने में पीछे नहीं रहेंगी।










