Karnataka politics 2025: कर्नाटक की सियासत में एक बार फिर सत्ता परिवर्तन की अटकलें जोर पकड़ रही हैं। कुनिगल से कांग्रेस विधायक एच.डी. रंगनाथ के ताजा बयान ने राज्य की राजनीतिक फिजा में हलचल मचा दी है। रंगनाथ ने कहा है कि वे अपने राजनीतिक गुरु उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर देखना चाहते हैं।
रंगनाथ ने दी शिवकुमार की खुलेआम पैरवी
विधायक रंगनाथ ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “मेरे लिए डीके शिवकुमार सिर्फ उपमुख्यमंत्री नहीं, बल्कि मेरे राजनीतिक मार्गदर्शक हैं। उन्होंने कांग्रेस को कर्नाटक में 140 सीटें जितवाने में अहम भूमिका निभाई है। पार्टी आलाकमान को उनके योगदान को उचित सम्मान देना चाहिए।”
उन्होंने कहा, “शिवकुमार ने जनता की सेवा, प्रशासनिक कौशल और विकास कार्यों से सबका दिल जीता है। मुझे विश्वास है कि आने वाले समय में वे मुख्यमंत्री बनेंगे। यह मतदाताओं की इच्छा भी है।”
CM सिद्धारमैया पर भी जताया भरोसा
हालांकि, रंगनाथ ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की भी प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने गरीबों के लिए जो पांच गारंटी योजनाएं लागू की हैं, वे पूरे देश के लिए मिसाल हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री पद को लेकर अंतिम फैसला पार्टी आलाकमान को लेना है।
जब रंगनाथ से पूछा गया कि क्या नवंबर में मुख्यमंत्री बदलेंगे, तो उन्होंने कहा, “मैं भविष्यवक्ता नहीं हूं। मुझे इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। यह निर्णय कांग्रेस नेतृत्व पर छोड़ दिया गया है।”
पार्टी की चेतावनी के बावजूद बयान
दिलचस्प बात यह है कि कांग्रेस नेतृत्व ने अपने विधायकों और नेताओं को सार्वजनिक रूप से सत्ता परिवर्तन पर बयान देने से मना किया था। इसके बावजूद कई नेता, जैसे पूर्व सांसद एल.आर. शिवराम गौड़ा, डीके शिवकुमार के पक्ष में खुलकर बयान दे चुके हैं। कई नेताओं को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया है, जिससे स्पष्ट है कि पार्टी इस मुद्दे को लेकर संवेदनशील है।
सिद्धारमैया का स्पष्ट संदेश
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने जुलाई में ही साफ कर दिया था कि वह अपना पूरा पांच साल का कार्यकाल पूरा करेंगे। उन्होंने कहा था, “मैंने ढाई साल पूरे कर लिए हैं, और अगले ढाई साल भी मुख्यमंत्री बना रहूंगा। मैं हर साल मैसूर दशहरा में हिस्सा लेता आया हूं, और अगले साल भी लूंगा।”
कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन की अटकलें भले ही फिर से जोर पकड़ रही हों, लेकिन अभी तक कांग्रेस आलाकमान की ओर से कोई आधिकारिक संकेत नहीं मिला है। जहां एक ओर डीके शिवकुमार के समर्थक उनके लिए मुख्यमंत्री पद की मांग कर रहे हैं, वहीं सिद्धारमैया खुद को पांच साल के लिए प्रतिबद्ध बता चुके हैं। आने वाले महीनों में पार्टी नेतृत्व का रुख तय करेगा कि कर्नाटक में राजनीतिक समीकरण बदलेंगे या नहीं।
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