Rupee vs Dollar:
Rupee vs Dollar: शुक्रवार, 21 नवंबर को शुरुआती कारोबार में भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मामूली सुधार के संकेत दिखा। इंटरबैंक फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में रुपया 88.67 पर खुला और शुरुआती सौदों में 5 पैसे की बढ़त के साथ 88.63 पर ट्रेड कर रहा था। यह सुधार मुख्य रूप से विदेशी बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और घरेलू शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की खरीदारी के कारण हुआ।
फॉरेक्स ट्रेडर्स का कहना है कि घरेलू इक्विटी मार्केट से मिले नकारात्मक संकेत और वैश्विक स्तर पर डॉलर की मजबूती रुपये पर दबाव बना रही है। डॉलर इंडेक्स, जो छह प्रमुख मुद्राओं के बास्केट के मुकाबले डॉलर की स्थिति को मापता है, में 0.01% की वृद्धि हुई और यह 100.09 के स्तर पर ट्रेड कर रहा था।
गुरुवार, 20 नवंबर को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले गिरावट के साथ 88.68 पर बंद हुआ था। वहीं, शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में यह 88.63 पर ट्रेड कर रहा था, जो कि पिछले बंद स्तर से 5 पैसे ऊपर है। निवेशकों की नजरें इस समय रुपये की स्थिरता और विदेशी निवेश प्रवाह पर हैं।
ग्लोबल ऑयल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स ट्रेड में 1.29% की गिरावट के साथ $62.56 प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। तेल की कीमतों में यह कमी रुपये के मामूली सुधार में योगदान देने वाली प्रमुख वजहों में से एक है।
शुक्रवार को घरेलू इक्विटी बाजार में शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 172.32 अंक की गिरावट के साथ 85,460.36 पर और निफ्टी 59.35 अंक की कमी के साथ 26,132.80 पर कारोबार कर रहा था। निवेशकों ने सावधानी बरती और बाजार में बिकवाली का दबाव देखने को मिला।
एक्सचेंज डेटा के मुताबिक, गुरुवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने नेट आधार पर 283.65 करोड़ रुपये की इक्विटी खरीद की। यह संकेत देता है कि विदेशी निवेशक भारतीय बाजार में रुचि बनाए हुए हैं, हालांकि रुपये पर दबाव बनाए रखने वाले वैश्विक कारक भी मौजूद हैं।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश के आठ मुख्य इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में अक्टूबर 2024 में ग्रोथ की रफ्तार साल-दर-साल लगभग समान रही। पेट्रोलियम रिफाइनरी प्रोडक्ट्स, फर्टिलाइज़र और स्टील के उत्पादन में वृद्धि कोयला और बिजली उत्पादन में कमी से संतुलित हुई।
कोयला, क्रूड ऑयल, नेचुरल गैस, पेट्रोलियम रिफाइनरी प्रोडक्ट्स, बिजली, फर्टिलाइज़र और स्टील की आठ कोर इंडस्ट्रीज़ ने सितंबर में 3.3% और अक्टूबर में 3.8% की बढ़ोतरी दर्ज की। यह आंकड़ा यह दर्शाता है कि इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में विकास अपेक्षाकृत स्थिर है, और इससे भारतीय अर्थव्यवस्था में दीर्घकालिक स्थिरता की उम्मीद की जा सकती है।
रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले शुरुआती कारोबार में मामूली सुधार दिखा, लेकिन मजबूत डॉलर और घरेलू शेयर बाजार से मिले नकारात्मक संकेत रुपये पर दबाव बनाए रख सकते हैं। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और विदेशी निवेशकों की खरीदारी ने थोड़ी राहत दी है, जबकि इंफ्रास्ट्रक्चर और कोर इंडस्ट्रीज़ के आंकड़े अर्थव्यवस्था में स्थिरता के संकेत देते हैं।
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