Russia cold wave
Russia cold wave: वर्तमान में दुनिया के कई हिस्से कुदरत के कहर का सामना कर रहे हैं, लेकिन रूस में स्थिति सबसे अधिक भयावह हो गई है। रूस इस समय एक ऐसी भीषण शीतलहर की चपेट में है, जिसने पिछले 60 वर्षों के सभी पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। चारों तरफ बर्फ की सफेद चादर ने पूरे परिदृश्य को ढंक लिया है। आर्कटिक से आने वाली बर्फीली और नुकीली हवाओं ने मॉस्को सहित रूस के प्रमुख महानगरों को अपनी गिरफ्त में ले लिया है। इस कड़ाके की ठंड ने न केवल यातायात को ठप किया है, बल्कि लोगों को अपने ही घरों में कैद होने पर मजबूर कर दिया है।
रूस की राजधानी मॉस्को में इस समय हाड़ कंपाने वाली ठंड पड़ रही है। यहाँ का तापमान गिरकर -28 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच चुका है, जो सामान्य जनजीवन के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। इस जमा देने वाली ठंड का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मॉस्को की प्रसिद्ध 540 मीटर ऊंची ओस्तांकिनो टीवी टावर जैसी विशालकाय इमारतें भी पूरी तरह बर्फ में तब्दील हो गई हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरों में बड़ी-बड़ी गगनचुंबी इमारतें ऐसी दिख रही हैं जैसे उन्हें किसी विशाल फ्रीजर में जमा दिया गया हो। यह दृश्य देखने में जितने अद्भुत हैं, उतने ही डरावने भी हैं।
रूस के मौसम विज्ञानियों के अनुसार, देश ने पिछले छह दशकों में ऐसी आक्रामक बर्फबारी और ठंड का सामना कभी नहीं किया था। सड़कों पर खड़ी गाड़ियां अब बर्फ के टीलों जैसी नजर आती हैं और घरों के मुख्य द्वारों पर बर्फ की इतनी मोटी परत जम गई है कि उन्हें खोलना भी मुश्किल हो रहा है। यह मौसम केवल रूस के लिए ही नहीं, बल्कि अमेरिका, यूरोप और एशिया के कई हिस्सों के लिए भी एक बड़ी आपदा बनकर उभरा है, जिससे वैश्विक रसद और यात्रा व्यवस्था चरमरा गई है।
रूस के सुदूर पूर्वी क्षेत्र कामचटका में हालात और भी गंभीर हैं। आर्कटिक सर्कल के करीब होने के कारण यहाँ पोलर वॉर्टेक्स (ध्रुवीय भंवर) की अस्थिरता का सीधा असर दिख रहा है। वैज्ञानिकों का मानना है कि पोलर वॉर्टेक्स के कमजोर पड़ने से उत्तरी ध्रुव की अत्यधिक ठंडी हवाएं दक्षिण की ओर खिसक आई हैं। कामचटका की भौगोलिक स्थिति और खुला समुद्री क्षेत्र इन बर्फीली हवाओं के लिए एक गलियारे का काम कर रहा है, जिससे यहाँ का तापमान जानलेवा स्तर तक गिर गया है।
सोशल मीडिया पर इस समय रूस के कुछ ऐसे वीडियो चर्चा का विषय बने हुए हैं, जिन्हें देखकर यकीन करना मुश्किल है। प्रभावित क्षेत्रों में जब लोग उबलते हुए नूडल्स को कांटे से उठाकर हवा में छोड़ते हैं, तो वे पलक झपकते ही हवा में जम जाते हैं। -30 से -40 डिग्री सेल्सियस के बीच का यह तापमान इतना खतरनाक है कि नम हवाएं संपर्क में आते ही ठोस बर्फ बन रही हैं। ऐसी स्थितियों में किसी भी प्रकार की बाहरी गतिविधि करना मौत को दावत देने जैसा है।
यह शीतकालीन संकट केवल रूस तक सीमित नहीं है। अमेरिका के मिनियापोलिस जैसे शहरों में भी पारा -21 डिग्री फारेनहाइट तक लुढ़क गया है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि ध्रुवीय हवाओं का यह विस्थापन जलवायु परिवर्तन का एक गंभीर संकेत है। रूस का प्रशासन लगातार लोगों को चेतावनी जारी कर रहा है कि वे घरों से बाहर न निकलें, क्योंकि तापमान के अभी और भी नीचे गिरने की आशंका है। यह सर्दी निश्चित रूप से इस सदी की सबसे क्रूर प्राकृतिक घटनाओं में से एक के रूप में दर्ज की जाएगी।
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