Russia Ukraine War:
Russia Ukraine War: जिनेवा में रविवार को यूक्रेन और उसके पश्चिमी सहयोगियों ने एक महत्वपूर्ण बैठक की, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा सुझाई गई रूस-यूक्रेन युद्ध विराम योजना पर चर्चा की गई। यह वार्ता ऐसे समय हो रही है जब अमेरिकी प्रस्ताव पर यूक्रेन की ओर से कड़ी आपत्तियाँ सामने आई हैं। कीव का कहना है कि यह योजना कई बिंदुओं पर रूस के हितों को प्राथमिकता देती है, जिससे उसकी संप्रभुता और सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।
यूक्रेन की ओर से प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे राष्ट्रपति कार्यालय प्रमुख एंड्रिज यर्माक ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी कि बैठक का पहला चरण ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के साथ पूरा हुआ। यर्माक का कहना था कि सभी सहयोगी रचनात्मक मनोभाव के साथ चर्चा में शामिल हुए और यूक्रेन के लिए ‘‘न्यायपूर्ण एवं टिकाऊ शांति’’ सुनिश्चित करने पर सहमत दिखे।
बैठक का अगला और महत्वपूर्ण चरण अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के साथ होना है, जिसमें विदेश मंत्री मार्को रुबियो, सेना सचिव डैन ड्रिस्कॉल और राष्ट्रपति ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ हिस्सा लेंगे। अमेरिका की 28-सूत्रीय शांति रूपरेखा ने यूरोप और यूक्रेन दोनों में चिंता पैदा की है, क्योंकि इसमें रूस के कई विवादास्पद प्रस्ताव शामिल हैं—जैसे यूक्रेन द्वारा कुछ इलाकों का त्याग, सेना का आकार सीमित करना और नाटो सदस्यता का परित्याग।
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने स्पष्ट कहा है कि उनका देश अपनी संप्रभुता और अमेरिकी समर्थन के बीच कठिन विकल्प की स्थिति में खड़ा है। उन्होंने दृढ़ता से दोहराया कि यूक्रेन अपनी भूमि और अधिकारों की रक्षा करेगा। इसी संदर्भ में फ्रांस की रक्षा मंत्री एलिस रूफो ने कहा कि योजना में यूक्रेनी सेना पर लगाए गए प्रतिबंध उसकी संप्रभुता पर ‘‘सीमाओं’’ की तरह हैं और यूक्रेन को अपनी सुरक्षा के लिए मजबूत रहना ही होगा।
शनिवार को व्हाइट हाउस के बाहर पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि उनकी शांति योजना अंतिम नहीं है और इसमें बदलाव संभव हैं। उनका कहना था कि रूस-यूक्रेन युद्ध बहुत पहले ही समाप्त किया जा सकता था और इसे ‘‘किसी न किसी तरह’’ अब रोकना ही होगा। हालांकि व्हाइट हाउस ने इस योजना पर विस्तृत टिप्पणी देने से इनकार कर दिया, जिससे अस्पष्टता और बढ़ी।
पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड तुस्क ने कहा कि उनका देश यूरोप, कनाडा और जापान के नेताओं के साथ मिलकर इस योजना पर काम करने को तैयार है, लेकिन पहले यह स्पष्ट होना चाहिए कि इसका वास्तविक लेखक कौन है और यह मसौदा कैसे तैयार हुआ। यूरोपीय संघ ने भी इस प्रस्ताव को ‘‘प्रारंभिक मसौदा’’ बताते हुए सुधार की आवश्यकता जताई है।
अमेरिका में भी इस प्रस्ताव को लेकर विवाद बढ़ गया है। कुछ सांसदों का कहना है कि विदेश मंत्री रुबियो ने इसे ‘‘रूस की इच्छा सूची’’ बताया था, न कि अमेरिका की आधिकारिक योजना। मेन के स्वतंत्र सीनेटर एंगस किंग ने दावा किया कि रुबियो ने स्पष्ट कहा था कि यह वाशिंगटन द्वारा तैयार नहीं की गई है। हालांकि विदेश मंत्रालय ने इस टिप्पणी को ‘‘पूरी तरह झूठ’’ कहा, और रुबियो ने भी ऑनलाइन सफाई देते हुए इसे गलतफहमी बताया। यह विवाद ट्रंप की ‘‘अमेरिका फर्स्ट’’ नीति से उपजे आंतरिक मतभेदों को उजागर करता है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह जिनेवा बैठक योजना में संशोधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकती है। इसके बावजूद, ट्रंप द्वारा गुरुवार तक प्रतिक्रिया देने की समयसीमा ने सभी पक्षों पर अतिरिक्त दबाव डाल दिया है। अब नजर इस बात पर है कि क्या अमेरिका, यूरोपीय साझेदार और यूक्रेन किसी साझा और स्वीकार्य शांति ढांचे पर पहुंच पाएंगे।
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