Russian woman India : कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले के कुम्ता तालुका की घनी जंगलों और खतरनाक ढलानों से घिरी रामतीर्थ पहाड़ियों में एक गुफा से एक रूसी महिला और उसकी दो छोटी बेटियों को सुरक्षित बचा लिया गया है. 40 वर्षीय महिला, जिसकी पहचान मोही के रूप में हुई है, बीते दो सप्ताह से अपनी बेटियों प्रेया (6) और अमा (4) के साथ उस प्राकृतिक गुफा में एकांतवास में रह रही थीं. मोही ने पुलिस को बताया कि वह आध्यात्मिक शांति की तलाश में गुफा में रह रही थीं. उन्होंने एक शिवलिंग के पास अस्थायी निवास बनाया था और दिन-रात प्रार्थना व ध्यान करती थीं.
पुलिस को उस समय महिला की मौजूदगी का पता चला जब गश्त के दौरान उन्हें गुफा के बाहर कपड़े सूखते दिखाई दिए और पूजा की गतिविधियां होती नजर आईं. शक के आधार पर जब पुलिस ने गुफा के भीतर प्रवेश किया, तो एक छोटा बच्चा बिना कपड़ों के बाहर भागा.
गुफा के अंदर दृश्य बेहद चिंताजनक था. गहरी अंधेरे गुफा में मोही अपनी बड़ी बेटी को एक लैंप की रोशनी में चित्र बनाना सिखा रही थीं. आसपास बड़े-बड़े जहरीले सांप भी मौजूद थे. अधिकारियों ने तुरंत तीनों को सुरक्षित बाहर निकाला. जुलाई 2024 में इसी पहाड़ी पर भीषण भूस्खलन हुआ था और यह क्षेत्र बेहद खतरनाक माना जाता है.
पूछताछ में महिला ने स्वीकार किया कि वह पहले भी कई बार इस गुफा में रह चुकी हैं. हालांकि पहाड़ी क्षेत्र में ट्रेकिंग और आमजन का प्रवेश प्रतिबंधित है और चारों ओर बाड़ भी लगाई गई है. बावजूद इसके, वह एक अन्य पहाड़ी मार्ग से गुफा में प्रवेश कर गई थीं.
मोही ने बताया कि वह 2016 में रूस से गोवा एक निजी कंपनी में नौकरी करने आई थीं, लेकिन 2017 में नौकरी छूटने के बाद वह नेपाल चली गईं. कुछ समय बाद वह फिर से गोवा लौटीं और आध्यात्मिक जीवन की ओर आकर्षित होकर गोकर्ण के इस गुफा क्षेत्र में साधना करने लगीं.
रेस्क्यू के बाद महिला के अनुरोध पर उन्हें और उनकी बेटियों को कुम्ता तालुका के बंकिकोडला गांव स्थित एक आश्रम में स्थानांतरित किया गया, जहां वे अब 80 वर्षीय साध्वी स्वामी योगरत्न सरस्वती की देखरेख में हैं.
महिला के दस्तावेजों की जांच के दौरान पता चला कि वह व्यावसायिक वीजा पर भारत आई थीं, जिसकी वैधता 2017 में ही समाप्त हो चुकी थी. पूछताछ में उन्होंने बताया कि उनका वीजा और पासपोर्ट जंगल में ही कहीं खो गया था. बाद में गोकर्ण पुलिस और वन विभाग द्वारा चलाए गए संयुक्त सर्च अभियान में दस्तावेज बरामद कर लिए गए.
अब पुलिस यह जांच कर रही है कि वह देश में इतने वर्षों तक अवैध रूप से कैसे रह रही थीं और जंगल में अपने बच्चों के साथ जीविका कैसे चला रही थीं. उत्तर कन्नड़ के पुलिस अधीक्षक नारायण के निर्देशन में महिला और बच्चों को बेंगलुरु भेजे जाने की प्रक्रिया जारी है.
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