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West Asia Crisis: ईरान-इजरायल युद्ध पर संसद में बोले एस जयशंकर, बताया पश्चिम एशिया में फंसे भारतीयों को निकालने का क्या है प्लान

West Asia Crisis:  पश्चिम एशिया में गहराते युद्ध के बादलों के बीच भारत सरकार ने संसद में अपनी स्थिति स्पष्ट की है। राज्यसभा में संबोधन के दौरान विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष पर आधिकारिक बयान दिया। उन्होंने सदन को सूचित किया कि इस मौजूदा सैन्य टकराव की शुरुआत 28 फरवरी को हुई थी, जिसने पूरे क्षेत्र की स्थिरता को हिलाकर रख दिया है। जयशंकर ने जोर देकर कहा कि केंद्र सरकार वहां फंसे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है और पल-पल की स्थिति पर प्रधानमंत्री कार्यालय और विदेश मंत्रालय द्वारा पैनी नजर रखी जा रही है।

कूटनीति ही एकमात्र समाधान: प्रधानमंत्री मोदी स्वयं कर रहे हैं निगरानी

विदेश मंत्री ने अपने संबोधन में कूटनीति और संवाद के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि युद्ध किसी भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकता। डॉ. जयशंकर के अनुसार, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पश्चिम एशिया के नए घटनाक्रमों पर करीब से नज़र रख रहे हैं। सरकार के विभिन्न संबंधित मंत्रालय इस संकट से निपटने और प्रभावी प्रतिक्रिया देने के लिए आपस में निरंतर समन्वय (Coordination) कर रहे हैं।” भारत का मानना है कि केवल कूटनीतिक प्रयासों और बातचीत के जरिए ही इस तनावपूर्ण स्थिति को शांत किया जा सकता है।

शांति की अपील और विपक्षी शोर-शराबा: सदन में गरमाया माहौल

भारत ने इस संघर्ष के शुरुआती दौर में ही अपनी चिंता व्यक्त कर दी थी। विदेश मंत्री ने बताया कि सरकार ने 20 फरवरी को ही एक आधिकारिक बयान जारी कर सभी पक्षों से अत्यधिक संयम बरतने की पुरजोर अपील की थी। हालांकि, जब जयशंकर राज्यसभा में सरकार का पक्ष रख रहे थे, तब विपक्षी सांसदों ने विभिन्न मुद्दों को लेकर सदन में शोर-शराबा शुरू कर दिया। विपक्ष के हंगामे के बावजूद, विदेश मंत्री ने दृढ़ता से अपनी बात रखी और स्पष्ट किया कि तनाव कम करने के लिए ‘डायलॉग और डिप्लोमेसी’ को ही आगे बढ़ाया जाना चाहिए।

भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा: खाड़ी देशों में रह रहे 1 करोड़ भारतीयों की चिंता

यह संघर्ष भारत के लिए केवल एक विदेशी मुद्दा नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर हमारे नागरिकों से जुड़ा है। जयशंकर ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा, “पश्चिम एशिया में स्थिरता बनाए रखना भारत की बड़ी जिम्मेदारी है क्योंकि हम पड़ोसी क्षेत्र हैं। खाड़ी देशों में लगभग 1 करोड़ भारतीय रहते और काम करते हैं, जिनकी सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है।” उन्होंने विशेष रूप से ईरान का जिक्र करते हुए कहा कि वहां भी हजारों भारतीय छात्र और कामकाजी पेशेवर मौजूद हैं, जिनकी सलामती के लिए सरकार हर संभव कदम उठा रही है।

ऊर्जा सुरक्षा और सप्लाई चेन पर खतरा: भारत के लिए क्यों जरूरी है शांति?

पश्चिम एशिया का यह युद्ध वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ-साथ भारत की ‘एनर्जी सिक्योरिटी’ (ऊर्जा सुरक्षा) के लिए भी एक बड़ा खतरा है। विदेश मंत्री ने आगाह किया कि यह क्षेत्र भारत के लिए तेल और गैस का सबसे महत्वपूर्ण आपूर्तिकर्ता है। यदि युद्ध लंबा खिंचता है, तो वैश्विक सप्लाई चेन में गंभीर रुकावटें आ सकती हैं, जिससे ईंधन की कीमतों में अस्थिरता पैदा होगी। भारत जैसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था वाले देश के लिए ऊर्जा की निर्बाध आपूर्ति अनिवार्य है, इसलिए इस क्षेत्र में शांति बहाली भारत के राष्ट्रीय हितों के लिए अत्यंत आवश्यक है।

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