Sabarimala Gold Theft: केरल के प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर में सोने की चोरी के मामले में एक बड़ी सफलता मिली है। विशेष जांच दल (SIT) ने मुख्य आरोपी उन्नीकृष्णन पोट्टी को 10 घंटे से अधिक पूछताछ के बाद गुरुवार (16 अक्टूबर, 2025) सुबह गिरफ्तार कर लिया। पोट्टी की गिरफ्तारी से सबरीमाला के श्रीकोविल (गर्भगृह) की दहलीज (कट्टिलापड्डी) और द्वारपालक की मूर्तियों से सोने की चोरी के जटिल मामले में जांच एक महत्वपूर्ण चरण में पहुँच गई है।
एसआईटी ने पोट्टी के खिलाफ दो अलग-अलग एफआईआर (FIR) दर्ज की हैं। उन पर कथित तौर पर एक प्रायोजक की आड़ में मंदिर से सोने की तस्करी और गबन करने का आरोप है।
चोरी का अनुमान: अनुमान है कि इस चोरी में 475 ग्राम सोना शामिल था।
गबन का तरीका: जांचकर्ताओं ने पाया कि चढ़ावे के लिए केवल तीन ग्राम सोने का इस्तेमाल किया गया, जबकि पोट्टी ने बाकी सोने का गबन कर लिया।
अन्य आरोपी: दोनों एफआईआर में कुल 10 लोगों को आरोपी बनाया गया है, जिसमें पोट्टी मुख्य आरोपी है और उसका नाम दोनों मामलों में दर्ज है।
जांच में अब त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (Travancore Devaswom Board) के वरिष्ठ अधिकारियों की संलिप्तता का संदेह भी गहरा गया है। मामला 2019 का है, जब तत्कालीन सबरीमाला कार्यकारी अधिकारी ने गर्भगृह की स्वर्ण-चढ़ी हुई तांबे की चादरों को पुन: सोने की परत चढ़ाने के लिए पोट्टी को सौंपने की सिफारिश की थी।
जब यह प्रस्ताव आयुक्त के पास पहुंचा, तो प्रस्ताव के शब्दों को बदल दिया गया। इसमें से ‘सोने की परत’ (Gold Plating) वाले हिस्से को हटाकर केवल ‘तांबे की चादरें’ (Copper Sheets) लिखा गया। इस गंभीर चूक के लिए आयुक्त, कार्यकारी अधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी और सहायक अभियंता सहित कई अधिकारियों को नामित किया गया है।
एसपी शशिधरन के नेतृत्व में एसआईटी ने पोट्टी की गिरफ्तारी तिरुवनंतपुरम में लगभग 2.30 बजे दर्ज की। मेडिकल जांच के बाद उन्हें पथानामथिट्टा में रन्नी अदालत में पेश किया जाएगा।
एसआईटी ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत भ्रष्टाचार के आरोप लगने की उम्मीद जताई है। एक एफआईआर में तो देवस्वोम बोर्ड को भी आठवां आरोपी बनाया गया है। जांचकर्ता पोट्टी और स्मार्ट क्रिएशंस नामक एक निजी फर्म के बीच संबंधों की भी जाँच कर रहे हैं, जो कथित तौर पर सोने की परत चढ़ाने के काम में शामिल थी।
विजिलेंस (सतर्कता) रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि सोना भक्तों के चढ़ावे से नहीं, बल्कि बेंगलुरु और मुंबई से लाया गया था। एसआईटी अब इस बड़ी साजिश और मंदिर प्रशासन के अंदरूनी लोगों की संभावित संलिप्तता की गहन जांच कर रही है।
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