Vedanta Power Plant Blast
Vedanta Power Plant Blast : छत्तीसगढ़ के नवगठित सक्ती जिले से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहाँ डभरा थाना क्षेत्र के सिंघीतराई स्थित वेदांता पावर प्लांट में मंगलवार दोपहर एक भीषण धमाका हुआ। प्लांट के भीतर काम कर रहे मजदूरों के लिए यह एक सामान्य कार्यदिवस था, लेकिन दोपहर करीब 2 बजे अचानक हुए बॉयलर ब्लास्ट ने सब कुछ तहस-नहस कर दिया। धमाका इतना जबरदस्त था कि इसकी गूंज दूर तक सुनी गई और देखते ही देखते चारों ओर राख और धुएं का गुबार छा गया। इस दर्दनाक हादसे ने औद्योगिक सुरक्षा मानकों पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ब्लास्ट के तुरंत बाद ही चार मजदूरों ने दम तोड़ दिया। सक्ती जिले के पुलिस अधीक्षक (एसपी) प्रफुल्ल ठाकुर ने आधिकारिक तौर पर इस दुखद समाचार की पुष्टि की है। मृतकों के शरीर धमाके की तीव्रता और उच्च तापमान वाली भाप के कारण बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए थे। पुलिस प्रशासन ने शवों को कब्जे में लेकर उन्हें पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है। मृतकों की पहचान की जा रही है ताकि उनके परिजनों को इस त्रासदी की सूचना दी जा सके।
बॉयलर फटने के बाद गर्म गैस और मलबे की चपेट में आने से 30 से 40 मजदूर गंभीर रूप से झुलस गए हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, धमाके के समय कई श्रमिक बॉयलर के समीप ही ड्यूटी पर तैनात थे। झुलसे हुए मजदूरों को तत्काल स्थानीय अस्पतालों और रायगढ़ के उच्च स्वास्थ्य केंद्रों में रेफर किया गया है। डॉक्टरों का कहना है कि कई मजदूरों की स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है, क्योंकि वे 50 प्रतिशत से अधिक जल चुके हैं। घायलों के उपचार के लिए विशेषज्ञों की टीम तैनात की गई है और प्रशासन पल-पल की अपडेट ले रहा है।
घटना की सूचना मिलते ही सक्ती जिले के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, दमकल की गाड़ियां और एंबुलेंस मौके पर पहुँच गई थीं। डभरा पुलिस और राहत दलों ने मिलकर प्लांट के अंदर फंसे अन्य श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकाला। शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि बॉयलर के भीतर ‘ट्यूब फटने’ के कारण यह भयावह ब्लास्ट हुआ। फिलहाल प्लांट के उस हिस्से को सील कर दिया गया है और विशेषज्ञ दल तकनीकी खामियों की बारीकी से जांच कर रहे हैं। दमकल विभाग ने काफी मशक्कत के बाद स्थिति पर नियंत्रण पाया।
वेदांता पावर प्लांट जैसे बड़े संस्थान में इस तरह का हादसा होना सुरक्षा इंतजामों की पोल खोलता है। स्थानीय ग्रामीणों और श्रमिक संघों ने प्रबंधन पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि मशीनों के रखरखाव (Maintenance) में कोताही बरती गई, जिसका खामियाजा गरीब मजदूरों को अपनी जान देकर भुगतना पड़ा। राज्य सरकार और जिला प्रशासन ने इस मामले में उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। यह जांच की जाएगी कि क्या सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन किया जा रहा था और क्या बॉयलर की समय-समय पर फिटनेस जांच की गई थी।
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