Sambar Deer Facts
Sambar Deer Facts : भारत के घने और हरे-भरे जंगलों में प्रकृति ने कई विचित्र और शक्तिशाली जीवों को पनाह दी है। इन्हीं में से एक है ‘सांभर हिरण’, जिसे निर्विवाद रूप से भारत का सबसे बड़ा हिरण माना जाता है। अपनी ताकत, गजब की चालाकी और विशाल शरीर के कारण यह वन्यजीव प्रेमियों और शिकारियों, दोनों के बीच कौतूहल का विषय रहता है। बिहार सरकार के पर्यावरण एवं वन विभाग के अनुसार, सांभर न केवल आकार में विशाल है, बल्कि संकट के समय इसके द्वारा अपनाए जाने वाले रक्षात्मक पैंतरे इतने सटीक होते हैं कि बड़े-बड़े शिकारी भी दंग रह जाते हैं।
सांभर का वैज्ञानिक नाम ‘रूसा यूनिकलर’ (Rusa unicolor) है। इसके शारीरिक गठन की बात करें तो इसका शरीर गहरे भूरे रंग का होता है, जिस पर झबरीले और मोटे बाल पाए जाते हैं। नर सांभर की सबसे प्रमुख पहचान उसके सिर पर सजे बड़े, मजबूत और फैलावदार सींग हैं, जो उसे अन्य हिरण प्रजातियों से बिल्कुल अलग और राजसी लुक देते हैं। एक वयस्क सांभर की कंधे तक ऊंचाई 102 से 160 सेंटीमीटर के बीच होती है, जबकि इसका वजन 100 से 350 किलोग्राम तक होता है। विशेष परिस्थितियों में कुछ नर सांभर का वजन 500 किलोग्राम तक भी दर्ज किया गया है।
सांभर को अक्सर ‘मायावी’ या ‘निशाचर’ जीव कहा जाता है, क्योंकि यह दिन की तुलना में शाम और रात के समय अधिक सक्रिय रहता है। इनके शरीर की कुल लंबाई लगभग 2.7 मीटर तक हो सकती है। भोजन के मामले में ये पूरी तरह शाकाहारी होते हैं और मुख्य रूप से कोमल घास, झाड़ियाँ, पत्तियां और जंगली वनस्पतियाँ खाते हैं। सांभर की एक और खास बात यह है कि इन्हें पानी के पास रहना बहुत पसंद है और ये बेहद कुशल तैराक भी होते हैं। नदी या तालाबों को पार करना इनके लिए बाएं हाथ का खेल है।
भले ही सांभर शाकाहारी हो, लेकिन यह बाघ, तेंदुए और जंगली कुत्तों (ढोल) का सबसे पसंदीदा शिकार भी है। हालांकि, इसे पकड़ना इतना आसान नहीं है। खतरे का आभास होते ही सांभर एकदम ‘फ्रीज’ (स्थिर) हो जाता है और फिर अचानक एक तेज चेतावनी वाली आवाज निकालता है। अपनी रक्षा के लिए यह जोर-जोर से पैर पटकता है और अपने गले के बालों को खड़ा कर एक डरावना रूप धारण कर लेता है। कई बार तो यह उथले पानी में शिकारी पर पलटवार तक कर देता है। इसकी लड़ने की शक्ति और सूझबूझ इसे जंगल का एक सम्मानित योद्धा बनाती है।
भारत के अलावा सांभर हिरण नेपाल, भूटान, श्रीलंका, ताइवान और दक्षिण-पूर्वी एशिया के कई देशों में पाया जाता है। भारत में इसका क्षेत्र हिमालय की तलहटी से लेकर कन्याकुमारी तक फैला हुआ है। ओडिशा सरकार ने इसकी महत्ता को देखते हुए इसे ‘राज्य पशु’ का दर्जा दिया है। हालांकि, बढ़ते शिकार और सिकुड़ते जंगलों के कारण IUCN (इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर) ने साल 2008 से इसे ‘संकटग्रस्त’ (Vulnerable) श्रेणी में रखा है। इनका अस्तित्व घने वर्षावनों और शुष्क वनों के पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित रखने के लिए अत्यंत आवश्यक है।
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