Sanjay Raut attack BJP: स्वतंत्रता दिवस के मौके पर शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने नासिक में एक बड़ा राजनीतिक ऐलान करते हुए कहा कि महाराष्ट्र में आगामी नगर पालिका चुनावों में ठाकरे बंधु एकजुट होकर लड़ाई लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि मुंबई, ठाणे, कल्याण-डोंबिवली और नासिक जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में एकता और मराठी अस्मिता के आधार पर चुनाव लड़ा जाएगा।

“ठाकरे बंधुओं ने तलवार उठा ली है”
संजय राउत ने कहा, “ठाकरे बंधु महाराष्ट्र और मराठी एकता की रक्षा के लिए साथ आ गए हैं। अब महाराष्ट्र में बीजेपी की तालिबानी मानसिकता वाली सरकार को जवाब देने का वक्त आ गया है। ठाकरे बंधुओं ने तलवार उठा ली है।” यह बयान उस समय आया है जब महाराष्ट्र में राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं और नगर निकाय चुनावों की तैयारी जोर पकड़ रही है।

पीएम मोदी पर तंज: “अब गांधी-नेहरू के रास्ते पर”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस भाषण पर प्रतिक्रिया देते हुए संजय राउत ने कहा कि देश की तरक्की की जो तस्वीर आज पेश की जा रही है, वह किसी एक नेता की देन नहीं बल्कि पंडित नेहरू, इंदिरा गांधी, शास्त्री, राजीव गांधी, अटल बिहारी वाजपेयी और मनमोहन सिंह जैसे नेताओं के दीर्घकालिक विजन का परिणाम है। उन्होंने कहा, “एक समय था जब इस देश में सुई भी नहीं बनती थी। आज हम अंतरिक्ष तक पहुंच गए हैं। ये सब कुछ आज के नेतृत्व का नहीं, बल्कि हमारे पूर्व प्रधानमंत्रियों के विजन की बदौलत है।”
“स्वदेशी भी कांग्रेस का विचार”
संजय राउत ने मोदी के ‘स्वदेशी’ नारे पर कटाक्ष करते हुए कहा, “स्वदेशी का विचार भी पंडित नेहरू और महात्मा गांधी का था। आज मोदी जी उसी रास्ते पर चल रहे हैं। धीरे-धीरे मोदी गांधीवाद और नेहरूवाद की तरफ बढ़ रहे हैं। हो सकता है कल आप गांधी टोपी भी पहन लें।”
राजनीतिक संकेत और चुनावी गठजोड़
राउत का यह बयान स्पष्ट रूप से आगामी लोकल बॉडी इलेक्शन में महाविकास आघाड़ी (MVA) और खासकर उद्धव ठाकरे खेमे की रणनीति को दर्शाता है। ठाकरे बंधुओं के “एकजुट” होकर चुनाव लड़ने का मतलब है कि शिवसेना (UBT) और महाराष्ट्र की स्थानीय राजनीति में एक बार फिर पुराना जोश देखने को मिलेगा। संजय राउत के बयान से यह स्पष्ट होता है कि आगामी नगर निकाय चुनावों को लेकर शिवसेना (UBT) आक्रामक मुद्रा में है। वहीं, प्रधानमंत्री मोदी पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कांग्रेस के विचारों की प्रासंगिकता को भी दोहराया। राजनीतिक विश्लेषकों की नजर में यह बयान राजनीतिक ध्रुवीकरण और वैचारिक टकराव को और तेज कर सकता है।










