Sanjay Raut on BMC
Sanjay Raut on BMC: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर ‘होटल पॉलिटिक्स’ की वापसी हो गई है। शिवसेना (UBT) के सांसद संजय राउत ने सोमवार को एक बड़ा दावा करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बाद अब भारतीय जनता पार्टी भी अपने पार्षदों को किसी सुरक्षित स्थान पर ले जाने की योजना बना रही है। राउत ने चुटकी लेते हुए कहा कि शिंदे पहले ही अपने पार्षदों को पांच सितारा होटल में भेज चुके हैं, ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर किसे किससे डर लग रहा है? उन्होंने इस स्थिति को अजीब बताते हुए कहा कि एक तरफ मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस स्विट्जरलैंड में वर्ल्ड इकॉनोमिक फोरम की बैठक में व्यस्त हैं और दूसरी तरफ मुंबई में पार्षदों को इधर-उधर छिपाया जा रहा है।
महाराष्ट्र के 29 नगर निगमों के लिए 15 जनवरी को मतदान हुआ था, जिसके नतीजे 16 जनवरी को घोषित किए गए। एशिया के सबसे अमीर नगर निकाय, बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) की 227 सीटों में से भाजपा ने 89 वार्डों पर जीत हासिल की है। वहीं, मुख्यमंत्री शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना को 29 सीटें मिली हैं। मेयर पद पर कब्जा करने के लिए बहुमत का जादुई आंकड़ा 114 है। समीकरणों को देखें तो भाजपा को अपना मेयर बनाने के लिए शिंदे गुट के सभी 25 से अधिक पार्षदों के समर्थन की अनिवार्य आवश्यकता होगी। नतीजों की स्पष्टता के अभाव में किसी भी दल के लिए मेयर की कुर्सी तक पहुँचना आसान नहीं दिख रहा है।
चुनाव परिणामों के तुरंत बाद, एकनाथ शिंदे ने अपने सभी 29 पार्षदों को बांद्रा स्थित आलीशान होटल ताज लैंड्स एंड में शिफ्ट कर दिया है। हालांकि, पार्टी ने इसे ‘बाड़ेबंदी’ मानने से इनकार किया है। शिवसेना का आधिकारिक बयान है कि वहां पार्षदों के लिए एक ‘ओरिएंटेशन वर्कशॉप’ आयोजित की जा रही है, ताकि नए पार्षदों को बीएमसी के कामकाज और उसकी जटिलताओं के बारे में प्रशिक्षित किया जा सके। सूत्रों की मानें तो यह कदम ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ यानी पार्षदों की खरीद-फरोख्त रोकने के लिए उठाया गया है। सभी पार्षदों को 21 जनवरी दोपहर 3 बजे तक होटल में ही रुकने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।
मेयर पद को लेकर महायुति (भाजपा-शिवसेना गठबंधन) के भीतर खींचतान शुरू हो गई है। सूत्रों के अनुसार, शिंदे गुट ने भाजपा के सामने एक बड़ी मांग रख दी है। वे चाहते हैं कि सत्ता की साझेदारी के तहत कम से कम ढाई साल के लिए मेयर शिवसेना का होना चाहिए। इसके पीछे एक भावनात्मक तर्क दिया जा रहा है कि साल 2026 शिवसेना संस्थापक बाला साहेब ठाकरे का जन्म शताब्दी वर्ष है। शिंदे गुट चाहता है कि इस ऐतिहासिक वर्ष में बीएमसी की कमान उनके पास रहे। यदि भाजपा इस मांग को स्वीकार नहीं करती है, तो सत्ता के समीकरण उलझ सकते हैं और गठबंधन में दरार आ सकती है।
शिंदे गुट का अपने पार्षदों को होटल में रखना 2022 की उस ऐतिहासिक बगावत की यादें ताजा कर रहा है, जिसने महाराष्ट्र की राजनीति की दिशा बदल दी थी। तब एकनाथ शिंदे ने 39 विधायकों के साथ मिलकर बगावत की थी, जिससे उद्धव ठाकरे की सरकार गिर गई थी और शिवसेना दो फाड़ हो गई थी। इसके अलावा, 2017 का इतिहास भी गवाह है जब अविभाजित शिवसेना ने मनसे के 7 पार्षदों का दलबदल करवाकर सबको चौंका दिया था। इन्हीं अनुभवों को देखते हुए इस बार कोई भी जोखिम नहीं उठाना चाहता। होटल में ही पार्टी के विधायक दल के नेता का चुनाव करने की भी योजना है।
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