Gautam Gambhir
Gautam Gambhir: भारतीय क्रिकेट टीम के हेड कोच के रूप में गौतम गंभीर का सफर अब तक किसी बुरे सपने से कम नहीं रहा है। 9 जुलाई 2024 को जब बीसीसीआई ने राहुल द्रविड़ की जगह गंभीर के नाम का ऐलान किया था, तब प्रशंसकों को उम्मीद थी कि ‘आक्रामक क्रिकेट’ का नया युग शुरू होगा। हालांकि, 27 जुलाई 2024 से शुरू हुए उनके कार्यकाल को आज लगभग 18 महीने (540 दिन) बीत चुके हैं, और इस दौरान टीम इंडिया की झोली में सफलताओं से कहीं अधिक ऐसी नाकामियां आई हैं, जिन्होंने क्रिकेट जगत को स्तब्ध कर दिया है। गंभीर की कोचिंग में भारतीय टीम एक के बाद एक ऐसे अनचाहे रिकॉर्ड बना रही है, जो दशकों से अछूते थे।
गंभीर की कोचिंग में विफलता की ताज़ा मिसाल न्यूजीलैंड के खिलाफ हालिया वनडे सीरीज है। कीवी टीम, जिसे भारत में आकर वनडे सीरीज हारने की आदत थी, उसने इस बार इतिहास पलट दिया। भारतीय सरजमीं पर पहली बार न्यूजीलैंड ने टीम इंडिया को वनडे सीरीज में मात दी। इंदौर के होलकर स्टेडियम में, जहाँ भारत का पलड़ा हमेशा भारी रहता था, वहां भी टीम को पहली बार हार का स्वाद चखना पड़ा। सीरीज के निर्णायक मुकाबले (डिसाइडर) में मिली यह हार भारतीय प्रशंसकों के लिए दिल तोड़ने वाली साबित हुई, क्योंकि घरेलू मैदान पर भारत का दबदबा अब खत्म होता दिख रहा है।
गौतम गंभीर के कार्यकाल की शुरुआत ही झटकों के साथ हुई थी। श्रीलंका के खिलाफ उनकी पहली वनडे सीरीज में टीम इंडिया ने वह दिन देखा जो 27 सालों से नहीं देखा था। भारत को करीब तीन दशक बाद श्रीलंका के खिलाफ वनडे सीरीज गंवानी पड़ी। इसके अलावा, एक शर्मनाक आंकड़ा यह भी जुड़ा कि 45 साल में पहली बार टीम इंडिया एक कैलेंडर ईयर में एक भी वनडे मैच नहीं जीत सकी। 3 मैचों की सीरीज में पहली बार टीम ने अपने सभी 30 विकेट गंवाए, जिसने भारतीय बल्लेबाजी की गहराई और तकनीक पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
सिर्फ सफेद गेंद की क्रिकेट ही नहीं, बल्कि टेस्ट क्रिकेट में भी गंभीर की कोचिंग में ‘अजेय’ भारतीय टीम के पैर उखड़ते दिखे। न्यूजीलैंड के खिलाफ 36 साल बाद घर में टेस्ट हारने से लेकर पहली बार घरेलू टेस्ट सीरीज गंवाने तक, टीम इंडिया ने कई कड़वे अनुभव किए। बेंगलुरु के चिन्नास्वामी स्टेडियम में 19 साल बाद हार मिली और टीम पहली बार घरेलू मैदान पर 50 रन के भीतर ढेर हो गई। सबसे बड़ा झटका तब लगा जब भारतीय टीम के इतिहास में पहली बार घरेलू टेस्ट सीरीज में ‘क्लीन स्वीप’ (व्हाइटवॉश) हुआ। 200 रन से कम का लक्ष्य पीछा न कर पाना और 5 शतकों के बावजूद टेस्ट हारना जैसे अजीबोगरीब रिकॉर्ड भी इसी दौर में बने।
गौतम गंभीर की रणनीतियों पर सबसे बड़ा प्रश्नचिह्न तब लगा जब भारतीय टीम पहली बार विश्व टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) के फाइनल की दौड़ से बाहर हो गई। द्विपक्षीय सीरीज (Bilateral Series) में टीम का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा है। हालांकि, राहत की एकमात्र बात यह है कि मल्टीनेशन टूर्नामेंट्स में गंभीर का रिकॉर्ड बेहतर रहा है और उन्होंने एक आईसीसी खिताब अपनी कोचिंग में दिलाया है। अब क्रिकेट प्रेमियों की नजरें आगामी टी20 वर्ल्ड कप पर हैं, जहाँ यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या गंभीर अपनी ‘गंभीर’ गलतियों से सीखकर टीम इंडिया को फिर से विश्व विजेता बना पाते हैं या अनचाहे रिकॉर्ड्स का यह कारवां यूं ही जारी रहेगा।
Read More: CG Politics: बालोद में कुर्मी समाज के मंच पर भिड़े भूपेश बघेल और भाजपा नेता, जमकर हुई तू-तू मैं-मैं
Success Story : पलाश (टेसू या ढाक) का फूल न केवल प्राकृतिक सुंदरता का प्रतीक…
Ambikapur News : अंबिकापुर में आम लोगों की सेहत से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ…
Nosebleed in Summer : गर्मी के मौसम में जब पारा तेजी से चढ़ता है, तो…
Vaishakh Purnima 2026 : हिंदू पंचांग के अनुसार, वैशाख मास की पूर्णिमा तिथि का सनातन…
India US Relations : भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को पुनर्जीवित करने की दिशा में…
Diljit Dosanjh Vancouver : कनाडा के वैंकूवर शहर में आयोजित एक भव्य म्यूजिक कॉन्सर्ट के…
This website uses cookies.