Sonam Wangchuk Fast: शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने सामाजिक कार्यकर्ता एवं शिक्षाविद सोनम वांगचुक के अनशन समाप्त करने के तरीके पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि यदि अनशन समाप्त करना ही था तो यह उसी स्थान पर होना चाहिए था, जहां से पुलिस उन्हें प्रदर्शन स्थल से हटाकर ले गई थी। राउत का मानना है कि जंतर-मंतर पर मौजूद हजारों छात्रों और प्रदर्शनकारियों के बीच अनशन समाप्त होता तो उसका संदेश अधिक प्रभावी होता और आंदोलन को नई दिशा मिलती।

जंतर-मंतर पर जाकर अनशन तोड़ना चाहिए था
संजय राउत ने कहा कि सोनम वांगचुक पिछले 26 दिनों से लगातार अनशन पर बैठे थे और इतनी लंबी भूख हड़ताल करना बेहद कठिन कार्य है। उन्होंने वांगचुक के सामाजिक और शैक्षणिक योगदान की सराहना करते हुए कहा कि उनका जीवन देश के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। राउत के अनुसार, सरकार के मंत्रियों के पास जाकर अनशन समाप्त करने के बजाय वांगचुक को जंतर-मंतर लौटकर प्रदर्शनकारियों के बीच अपनी बात रखनी चाहिए थी। ऐसा करने से आंदोलन में शामिल छात्रों का मनोबल और बढ़ता।

सरकार पर आंदोलन दबाने के लगाए आरोप
राउत ने केंद्र सरकार पर आंदोलन को दबाने का आरोप लगाते हुए कहा कि प्रदर्शन के दौरान छात्रों और युवाओं पर बल प्रयोग किया गया। उन्होंने दावा किया कि प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया गया, छर्रे चलाए गए और कई लोगों को गंभीर चोटें आईं। उनका आरोप है कि आंदोलन को समाप्त कराने के लिए सरकार ने हरसंभव प्रयास किया और प्रदर्शनकारियों के साथ सख्ती बरती गई। उन्होंने यह भी कहा कि सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से जिस तरह हटाया गया, वह लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप नहीं था।
मंत्रियों के हाथों अनशन तुड़वाने पर जताई नाराजगी
शिवसेना (यूबीटी) सांसद ने कहा कि जिस सरकार पर आंदोलन को कुचलने के आरोप लग रहे हों, उसी सरकार के दो मंत्रियों के हाथों अनशन समाप्त करना कई लोगों के लिए आश्चर्य का विषय है। उन्होंने कहा कि चाहे वांगचुक ने जूस पिया हो या सूप, लेकिन यह कदम आंदोलन की भावना से मेल नहीं खाता। राउत के अनुसार, आंदोलन की समाप्ति या किसी बड़े फैसले की घोषणा प्रदर्शनकारियों के बीच होनी चाहिए थी ताकि सभी लोग उसके साक्षी बनते।
विपक्ष ने आंदोलन को दिया पूरा समर्थन
संजय राउत ने कहा कि इस आंदोलन को मजबूत बनाने में विपक्षी दलों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने भी छात्रों के समर्थन में प्रदर्शन किया और पुलिस कार्रवाई का सामना किया। इसके अलावा महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे के नेतृत्व में भी विरोध प्रदर्शन जारी हैं। उन्होंने समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव और सांसद डिंपल यादव का नाम लेते हुए कहा कि कई विपक्षी नेता इस आंदोलन के साथ खड़े हैं।
धर्मेंद्र प्रधान और प्रधानमंत्री के इस्तीफे की दोहराई मांग
राउत ने कहा कि उनकी पार्टी अब भी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर कायम है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी इस पूरे मामले की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए जवाब देना चाहिए। उनका कहना था कि अब यह देखना होगा कि सोनम वांगचुक आगे भी इन मांगों को उसी मजबूती से उठाते हैं या नहीं। राउत के मुताबिक, आंदोलन की मूल मांगों में कोई बदलाव नहीं आया है और विपक्ष इन्हें लगातार उठाता रहेगा।
‘हर छात्र इस आंदोलन का नेता है’
अपने बयान के अंत में संजय राउत ने कहा कि यह किसी एक व्यक्ति का आंदोलन नहीं बल्कि देशभर के छात्रों और युवाओं की आवाज है। उन्होंने कहा कि आंदोलन किसी एक नेता के भरोसे नहीं चल रहा, बल्कि इसमें शामिल हर छात्र स्वयं एक नेता है। उन्होंने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके के उस बयान का भी उल्लेख किया, जिसमें कहा गया था कि आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते। राउत ने कहा कि उनकी पार्टी इस मांग का समर्थन करती है और देश के विभिन्न राज्यों में विरोध प्रदर्शन आगे भी जारी रहेंगे।
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