AAP Rebels
AAP Rebels : आम आदमी पार्टी (AAP) के भीतर मचे घमासान के बीच राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ नेता संजय सिंह ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बागी तेवर अपनाने वाले सांसदों को कड़ा संदेश दिया है। संजय सिंह ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जो सांसद पार्टी की विचारधारा से अलग राह चुन रहे हैं, उन्हें नैतिकता के आधार पर पहले अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने कहा, “आप जिस दल के सिंबल पर चुनकर सदन में पहुंचे हैं, अगर अब उस दल से आपके मतभेद हैं, तो पद छोड़िए और जहां जाना है वहां जाइए।” संजय सिंह ने इसे लोकतंत्र की गरिमा के खिलाफ बताते हुए बागी गुट की आलोचना की और कहा कि जनता ने उन्हें ‘आप’ के नाम पर वोट दिया था, न कि किसी अन्य विचारधारा के लिए।
संजय सिंह ने प्रेस वार्ता में जानकारी दी कि पार्टी इन सातों सांसदों की सदस्यता रद्द कराने के लिए कानूनी कदम उठा चुकी है। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर देश के जाने-माने संविधान विशेषज्ञों और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल से विस्तृत चर्चा की गई है। विशेषज्ञों की राय के आधार पर आम आदमी पार्टी ने देश के उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति को एक औपचारिक याचिका (पिटीशन) भेजी है। संजय सिंह ने कहा, “हमने सभापति महोदय से अनुरोध किया है कि इन सभी सांसदों की सदस्यता तत्काल प्रभाव से समाप्त की जाए और इस पर जल्द से जल्द फैसला लिया जाए ताकि दल-बदल कानून की मर्यादा बनी रहे।”
बागी सांसदों पर निशाना साधते हुए संजय सिंह ने कहा कि यह केवल पार्टी के साथ ही नहीं, बल्कि पंजाब के उन लाखों मतदाताओं के साथ भी धोखा है, जिन्होंने एक बड़े बदलाव की उम्मीद में आम आदमी पार्टी को भारी जनादेश दिया था। सिंह ने भावुक होते हुए कहा कि जिन लोगों ने पंजाब की मिट्टी और वहां के लोगों का प्रतिनिधित्व करने की शपथ ली थी, उन्होंने निजी स्वार्थ के लिए जनता के भरोसे का सौदा कर लिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि राजनीति में मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन जिस थाली में खाया उसी में छेद करना पंजाब की संस्कृति और राजनीतिक नैतिकता के खिलाफ है।
इस पूरे विवाद की जड़ शुक्रवार को हुई वह प्रेस कॉन्फ्रेंस है, जिसने दिल्ली और पंजाब की राजनीति में हड़कंप मचा दिया। आम आदमी पार्टी के प्रमुख चेहरे रहे राघव चड्ढा और संदीप पाठक ने घोषणा की कि वे और पार्टी के पांच अन्य राज्यसभा सदस्य भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हो रहे हैं। चड्ढा ने दावा किया कि ‘आप’ के 10 में से 7 राज्यसभा सदस्य अब भाजपा का हिस्सा होंगे। चड्ढा ने संविधान की 10वीं अनुसूची का हवाला देते हुए कहा, “संविधान के अनुसार यदि किसी पार्टी के कुल सांसदों में से दो-तिहाई सदस्य एक साथ किसी अन्य दल में जाते हैं, तो उसे कानूनी रूप से विलय माना जाता है और उनकी सदस्यता पर कोई आंच नहीं आती।”
राघव चड्ढा ने पत्रकारों को बताया कि उन्होंने इस विलय के संबंध में राज्यसभा सभापति सी.पी. राधाकृष्णन को औपचारिक पत्र सौंप दिया है। इस गुट में राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल के अलावा हरभजन सिंह, संजीव अरोड़ा (राजेंद्र गुप्ता), विक्रमजीत सिंह साहनी और स्वाति मालीवाल के नाम शामिल बताए जा रहे हैं। चड्ढा ने आत्मविश्वास के साथ कहा कि वे सभी आवश्यक दस्तावेज जमा कर रहे हैं ताकि दो-तिहाई बहुमत के नियम के तहत इस विलय को संवैधानिक मान्यता मिल सके। फिलहाल, सबकी नजरें राज्यसभा सभापति के फैसले पर टिकी हैं कि क्या यह दल-बदल ‘विलय’ की श्रेणी में आता है या इन सांसदों को अयोग्य घोषित किया जाएगा।
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