SC Notice : मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कामकाज से जुड़ी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा केंद्र सरकार और चुनाव आयोग से जवाब मांगे जाने के बाद बीजेपी ने प्रतिक्रिया दी है। बीजेपी सांसद और प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि अदालत का नोटिस जारी करना इस बात का उदाहरण है कि देश की संवैधानिक संस्थाएं अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में स्वतंत्र रूप से काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था के तहत संस्थागत प्रक्रियाएं जारी हैं।
संबित पात्रा ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया का किया उल्लेख
दिल्ली स्थित बीजेपी मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान संबित पात्रा ने कहा कि लोगों को अपनी बात रखने और न्यायिक प्रक्रिया का सहारा लेने का अधिकार है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की ओर से मामले में नोटिस जारी किए जाने को इसी व्यवस्था का हिस्सा बताया। पात्रा के मुताबिक, विभिन्न संवैधानिक संस्थाएं कानून और निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुसार अपने दायित्व निभा रही हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और चुनाव आयोग से मांगा जवाब
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने सोमवार को इस मामले की सुनवाई की। पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल हैं। अदालत ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को नोटिस जारी करते हुए एक सप्ताह में जवाब देने को कहा। याचिका में मुख्य चुनाव आयुक्त के कुछ फैसलों को लेकर प्रक्रिया संबंधी सवाल उठाए गए हैं।
तत्काल अंतरिम आदेश देने से कोर्ट का इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान फिलहाल किसी तरह का अंतरिम आदेश जारी करने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि केवल मीडिया रिपोर्टों के आधार पर किसी अधिकारी या फैसले के खिलाफ अंतरिम कार्रवाई नहीं की जा सकती। कोर्ट के अनुसार, किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए आधिकारिक रिकॉर्ड और संबंधित पक्षों का जवाब देखना जरूरी है।
चुनाव आयोग की सामूहिक निर्णय प्रक्रिया पर सवाल
सुनवाई के दौरान अदालत ने चुनाव आयोग की निर्णय लेने की प्रक्रिया पर भी टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि आयोग जैसे संवैधानिक निकाय से सामूहिक निर्णय प्रक्रिया की अपेक्षा की जाती है। यदि किसी विषय पर सर्वसम्मति नहीं बनती है तो निर्धारित नियमों के अनुसार बहुमत से फैसला लिया जा सकता है। हालांकि, किसी निर्णय को प्रक्रिया के अनुरूप लिया गया या नहीं, इसका आकलन रिकॉर्ड के आधार पर किया जाएगा।
ज्ञानेश कुमार पर याचिका में क्या आरोप
याचिका में आरोप लगाया गया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कुछ महत्वपूर्ण निर्णय अन्य चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लिए। इनमें मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और मतदाता पंजीकरण से संबंधित कुछ फैसले शामिल बताए गए हैं। हालांकि, चुनाव आयोग की ओर से इन आरोपों को स्वीकार नहीं किया गया है और आयोग ने अपनी निर्णय प्रक्रिया को नियमों के अनुरूप बताया है।
चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों की रिपोर्ट का जिक्र
मामले की सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग की आंतरिक निर्णय प्रक्रिया से जुड़ी मीडिया रिपोर्टों का भी संदर्भ सामने आया। द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों के दौरान आयोग के कुछ फैसलों और आदेशों पर 14 बार औपचारिक आपत्ति दर्ज की थी। रिपोर्ट में मतदाता सूची और चुनावी डेटाबेस से जुड़े विषयों का उल्लेख किया गया था।
SIR और मतदाता डेटा को लेकर विवाद
रिपोर्ट में चुनावी प्रक्रिया से जुड़े फॉर्म और सॉफ्टवेयर में बदलाव का भी दावा किया गया था। इसमें नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले Form 6 में अतिरिक्त जानकारी और SIR से जुड़े विवरण शामिल किए जाने की बात कही गई थी। मतदाता डेटाबेस तक पहुंच और उसके प्रबंधन को लेकर भी सवाल उठाए जाने का उल्लेख रिपोर्ट में था।
चुनाव आयोग ने आरोपों पर अलग रुख रखा
वहीं, चुनाव आयोग ने इन दावों के विपरीत अपनी निर्णय प्रक्रिया को निर्धारित नियमों के अनुरूप बताया है। आयोग का कहना है कि महत्वपूर्ण फैसले संस्थागत प्रक्रिया के तहत लिए जाते हैं। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के सामने अब दोनों पक्षों के आधिकारिक जवाब और संबंधित रिकॉर्ड आने के बाद मामले की स्थिति और स्पष्ट होगी।
अब आधिकारिक जवाब पर टिकी नजर
सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल मामले में कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है। केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के जवाब मिलने के बाद अदालत यह देखेगी कि याचिका में लगाए गए आरोपों में कितना तथ्यात्मक आधार है और संबंधित फैसले निर्धारित प्रक्रिया के तहत लिए गए थे या नहीं। इस बीच बीजेपी ने सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई को संवैधानिक संस्थाओं के स्वतंत्र कामकाज और लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा बताया है।
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