Science Awards 2026
Science Awards 2026: भारतीय विज्ञान और नवाचार के क्षेत्र में एक नया अध्याय लिखते हुए, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने देश के 24 शीर्ष वैज्ञानिकों को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया है। वर्ष 2025 के राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कारों की घोषणा के साथ ही भारत ने वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय को अपनी बढ़ती शक्ति का परिचय दिया है। इन पुरस्कारों का प्राथमिक उद्देश्य विज्ञान, प्रौद्योगिकी और अनुसंधान के क्षेत्र में हो रहे क्रांतिकारी कार्यों को न केवल पहचान देना है, बल्कि भविष्य की पीढ़ी को समाजोपयोगी खोजों के लिए प्रेरित करना भी है। इस वर्ष के सम्मान समारोह में रसायन विज्ञान (Chemistry) के क्षेत्र में एक युवा वैज्ञानिक की गूंज पूरी दुनिया में सुनाई दे रही है।
राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार 2025 की सूची में भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (IISER), कोलकाता के रसायन विज्ञान विभाग में कार्यरत एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. दिव्येंदु दास का नाम सबसे चमकते सितारों में से एक है। डॉ. दास को प्रतिष्ठित ‘शांति स्वरूप भटनागर विज्ञान युवा पुरस्कार’ के लिए चुना गया है। यह पुरस्कार भारत में वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में दिया जाने वाला सबसे बड़ा और सम्मानजनक पुरस्कार माना जाता है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2025 में रसायन विज्ञान की श्रेणी में डॉ. दास इस पुरस्कार को प्राप्त करने वाले देश के एकमात्र वैज्ञानिक हैं, जो उनकी मेहनत और उनके शोध की गहराई को प्रमाणित करता है।
डॉ. दिव्येंदु दास को यह सर्वोच्च सम्मान उनके ‘सिस्टम केमिस्ट्री’ (System Chemistry) में किए गए दूरगामी और अग्रणी शोध के लिए प्रदान किया गया है। सिस्टम केमिस्ट्री विज्ञान की वह उभरती हुई और जटिल शाखा है, जो यह समझने का प्रयास करती है कि कैसे सरल रासायनिक अणु और संरचनाएं मिलकर ‘जीवन’ जैसी जटिल प्रणालियों का निर्माण कर सकती हैं। डॉ. दास का कार्य मूल रूप से उन मूलभूत रासायनिक प्रक्रियाओं की व्याख्या करता है, जिनसे अरबों साल पहले पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति संभव हुई होगी। उनका यह शोध उन रहस्यों से पर्दा हटाने में मदद कर रहा है जिन्हें समझने के लिए वैज्ञानिक दशकों से प्रयास कर रहे थे।
डॉ. दास के शोध का सबसे रोमांचक हिस्सा ‘लाइफ 2.0’ की अवधारणा है। उनका कार्य केवल सैद्धांतिक अध्ययन तक सीमित नहीं है, बल्कि वे प्रयोगशाला में ऐसे तंत्र (Systems) विकसित करने पर काम कर रहे हैं जो सजीव पदार्थों की तरह व्यवहार कर सकें। ‘लाइफ 2.0’ का अर्थ है कृत्रिम रूप से ऐसी प्रणालियाँ बनाना जो स्व-नकल (Self-replication) और ऊर्जा के रूपांतरण जैसे जैविक कार्य कर सकें। यदि यह शोध सफल होता है, तो भविष्य में वैज्ञानिक प्रयोगशाला में जीवन जैसी प्रणालियां तैयार करने में सक्षम होंगे, जो न केवल चिकित्सा विज्ञान बल्कि नैनो-तकनीक और सिंथेटिक बायोलॉजी के क्षेत्र में भी एक महाक्रांति लेकर आएगा।
डॉ. दिव्येंदु दास की यह खोज रसायन विज्ञान की सीमाओं को लांघकर जीव विज्ञान और भविष्य की अत्याधुनिक तकनीकों को आपस में जोड़ती है। उनके शोध पत्र अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए हैं, जिससे भारत का नाम वैश्विक विज्ञान जगत में ऊँचा हुआ है। राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कारों का यह मंच डॉ. दास जैसे युवाओं की सफलता को रेखांकित करता है, जो अपनी मेधा से ‘विकसित भारत’ के सपने को साकार करने में जुटे हैं। उनके काम से प्रेरित होकर आने वाले समय में कई युवा वैज्ञानिक इस क्षेत्र में भारत का नेतृत्व करेंगे।
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