Hindenburg Report SEBI: उद्योगपति गौतम अडानी को बड़ी राहत मिली है। अमेरिकी शॉर्ट सेलर हिंडनबर्ग रिसर्च द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों को भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने खारिज कर दिया है। SEBI की विस्तृत जांच में अडानी समूह के खिलाफ बाजार में हेरफेर और लेखा गड़बड़ी जैसे आरोपों को निराधार बताया गया है। इस फैसले के बाद गौतम अडानी ने हिंडनबर्ग और उन सभी लोगों से “पूरे भारत से माफी” की मांग की है जिन्होंने इस रिपोर्ट के आधार पर गलत प्रचार किया था।

अडानी का बयान: “देश से माफी मांगे हिंडनबर्ग”
SEBI की क्लीन चिट के बाद गौतम अडानी ने बयान जारी कर कहा, “हम पर लगाए गए बेबुनियाद आरोप अब जांच में गलत साबित हो चुके हैं। हमने हमेशा पारदर्शिता और जवाबदेही के सिद्धांतों का पालन किया है। जिन निवेशकों को इस झूठे प्रचार से नुकसान हुआ है, हम उनके प्रति संवेदना व्यक्त करते हैं। जो लोग इस तरह का षड्यंत्र फैलाते हैं, उन्हें भारत के लोगों से माफी मांगनी चाहिए।”

हिंडनबर्ग रिपोर्ट: एक विवाद जिसकी गूंज संसद तक पहुंची
जनवरी 2023 में हिंडनबर्ग रिसर्च ने अडानी समूह पर बड़े पैमाने पर बाजार में हेरफेर, शेल कंपनियों के जरिए शेयर की कीमत बढ़ाने और लेखा संबंधी गड़बड़ियों के आरोप लगाए थे। रिपोर्ट के अनुसार, अडानी ग्रुप के शेयर 85% तक गिर सकते थे। रिपोर्ट के सार्वजनिक होते ही शेयर बाजार में भारी गिरावट देखी गई और विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को लेकर सरकार पर जबरदस्त हमला बोला।
कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर अडानी ग्रुप को संरक्षण देने का आरोप लगाया। सुप्रीम कोर्ट में भी इस मामले को लेकर याचिका दायर की गई थी।
SEBI की रिपोर्ट ने बदला सियासी परिदृश्य
SEBI की रिपोर्ट आने के बाद अब राजनीतिक माहौल भी बदल गया है। भाजपा ने कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों से जवाब मांगना शुरू कर दिया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि जब हिंडनबर्ग रिपोर्ट को आधार बनाकर सरकार और अडानी पर कीचड़ उछाला गया, तो अब, जब आरोप झूठे साबित हो गए हैं, क्या वे माफी मांगेंगे?
SEBI की जांच रिपोर्ट ने अडानी समूह को कानूनी और नैतिक रूप से बड़ी राहत दी है। जहां एक ओर अडानी समूह ने इसे सच्चाई की जीत बताया है, वहीं अब निगाहें विपक्ष और हिंडनबर्ग रिसर्च पर हैं कि वे अपनी पिछली टिप्पणियों पर क्या रुख अपनाते हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक और कॉर्पोरेट जगत में चर्चा का केंद्र बना रहेगा।










