Sehwag vs Chappell : भारतीय क्रिकेट के दिग्गज बल्लेबाज़ वीरेंद्र सहवाग ने अपनी जीवन यात्रा के एक अहम और विवादास्पद पड़ाव को फिर से याद किया। यह वह समय था जब टीम इंडिया के पूर्व कोच ग्रेग चैपल और सहवाग के बीच टकराव हुआ था। सहवाग ने इस वाकये को साझा करते हुए कहा, “कोच को आगे नहीं आना चाहिए,” जो क्रिकेट जगत में चर्चा का विषय बना।
ग्रेग चैपल का भारतीय क्रिकेट में कोच के तौर पर कार्यकाल अपने विवादों के लिए जाना जाता है। कई पूर्व खिलाड़ियों ने माना है कि चैपल ने टीम में तनाव और दरारें पैदा कीं, जो टीम के मनोबल पर असर डालती थीं। सहवाग भी उन खिलाड़ियों में से एक थे जिन्होंने चैपल के साथ सीधे टकराव किया।
उस दौर में राहुल द्रविड़ टीम के कप्तान थे और चैपल ने सहवाग को बल्लेबाज़ी की तकनीक सुधारने के लिए सलाह दी। चैपल ने सहवाग से कहा था, “अपने पैर हिलाना सीखो, वरना रन नहीं बना पाओगे।” लेकिन सहवाग ने शांतिपूर्वक जवाब दिया कि उन्होंने अपनी इसी तकनीक से टेस्ट क्रिकेट में 6000 से अधिक रन बनाए हैं और 50 से ज्यादा की औसत से खेला है। चैपल ने इस बात को नकार दिया, जिससे दोनों के बीच बहस शुरू हो गई।
चैपल ने इसे और बढ़ाते हुए धमकी तक दे डाली, “भागो, वरना गिरा दूंगा।” इस पर सहवाग ने न केवल अपनी बहादुरी दिखाई, बल्कि अगले टेस्ट मैच में 184 रनों की शानदार पारी खेलकर साबित किया कि उनकी शैली में दम है। मैच के बाद सहवाग ने कप्तान द्रविड़ से कहा, “जाओ और अपने कोच से कहो कि मेरे सामने न आएं।”
सहवाग की बल्लेबाज़ी शैली को कई बार तकनीकी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। उन्हें “खतरनाक” और “अनुशासित नहीं” कहा गया, लेकिन उनकी उपलब्धियां स्वयं उनकी प्रतिभा का प्रमाण हैं। 104 टेस्ट मैचों में 8586 रन, 23 शतक और दो तिहरे शतक बनाना, जो आज तक किसी भारतीय बल्लेबाज के लिए रिकॉर्ड है, ये सभी उनकी महानता को दर्शाते हैं।
वीरेंद्र सहवाग और ग्रेग चैपल के बीच का यह विवाद उस दौर के भारतीय क्रिकेट की एक महत्वपूर्ण घटना थी। यह बताता है कि जब खिलाड़ी अपनी प्रतिभा और आत्मविश्वास के साथ खेलते हैं, तो किसी भी दबाव या आलोचना का सामना कर सकते हैं। सहवाग की यह कहानी युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा है कि वे अपने स्वाभाविक खेल पर भरोसा रखें और किसी भी स्थिति में हिम्मत न हारें।इस विवादास्पद वाकये को याद करते हुए सहवाग ने यह स्पष्ट किया कि कोच का कार्य टीम का मार्गदर्शन करना है, लेकिन वह खिलाड़ी की आज़ादी और आत्मविश्वास को कम नहीं कर सकता। क्रिकेट प्रेमियों के लिए यह किस्सा भारतीय क्रिकेट इतिहास के उन अनछुए पहलुओं में से एक है, जो हमेशा चर्चा में रहेगा।
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