Vummidi Ethiraj Death : भारत के ऐतिहासिक सेंगोल के निर्माण में अहम भूमिका निभाने वाले प्रसिद्ध जौहरी वुम्मिदी एथिराज का बुधवार को तमिलनाडु के चेन्नई में 99 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन से आभूषण उद्योग और सेंगोल से जुड़ी ऐतिहासिक विरासत को बड़ा नुकसान हुआ है। उनके निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने शोक व्यक्त किया।
पीएम मोदी ने सेंगोल निर्माण में योगदान को किया याद
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर वुम्मिदी एथिराज के निधन पर दुख जताया। उन्होंने कहा कि एथिराज को उस ऐतिहासिक सेंगोल के निर्माण में योगदान के लिए हमेशा याद किया जाएगा, जिसे स्वतंत्रता के समय तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को सौंपा गया था। पीएम मोदी ने उनके योगदान को भारत की सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा महत्वपूर्ण अध्याय बताया।
नए संसद भवन में सेंगोल की स्थापना का किया जिक्र
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में कहा कि वर्ष 2023 में नए संसद भवन में सेंगोल को सम्मानजनक स्थान देने का अवसर मिला। इसी दौरान उन्हें वुम्मिदी एथिराज से मिलने और देश तथा संस्कृति के प्रति उनके योगदान के लिए आभार व्यक्त करने का मौका मिला। उन्होंने कहा कि एथिराज का जीवन और उनकी कारीगरी भारत की गौरवशाली परंपराओं तथा राष्ट्रीय यात्रा के बीच महत्वपूर्ण संबंध को दर्शाती है।
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने भी जताया शोक
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने भी एथिराज के निधन पर गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि भारत की सभ्यतागत विरासत के पवित्र प्रतीक सेंगोल के निर्माण में उनके योगदान को हमेशा सम्मान और कृतज्ञता के साथ याद किया जाएगा। उपराष्ट्रपति ने भारतीय आभूषण निर्माण की समृद्ध परंपरा को संरक्षित करने में एथिराज की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया और उनके परिवार के प्रति संवेदनाएं व्यक्त कीं।
वुम्मिदी परिवार ने तैयार किया था ऐतिहासिक सेंगोल
वुम्मिदी एथिराज चेन्नई के प्रसिद्ध वुम्मिदी बंगारू ज्वेलर्स परिवार से जुड़े थे। यह परिवार 125 साल से अधिक पुरानी आभूषण निर्माण परंपरा के लिए जाना जाता है। वर्ष 1947 में भारत की स्वतंत्रता के समय सेंगोल का निर्माण इसी परिवार ने किया था। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, एथिराज और उनके भाई वुम्मिदी सुधाकर ने अपने पिता वुम्मिदी बंगारू चेट्टी की देखरेख में इसे तैयार किया था।
क्या है सेंगोल और इसका ऐतिहासिक महत्व?
सेंगोल शब्द तमिल भाषा के ‘सेम्मई’ शब्द से जुड़ा है, जिसका अर्थ धर्म, सत्य और न्याय से लगाया जाता है। ऐतिहासिक रूप से चोल साम्राज्य में इसे सत्ता हस्तांतरण के प्रतीक के तौर पर इस्तेमाल किए जाने का उल्लेख मिलता है। सेंगोल को शासन में न्याय, जिम्मेदारी और नैतिकता के प्रतीक के रूप में भी देखा जाता है।
पांच फीट लंबा है सोने की परत वाला सेंगोल
ऐतिहासिक सेंगोल लगभग पांच फीट लंबा है। इसे चांदी पर सोने की परत चढ़ाकर तैयार किया गया था। इसके शीर्ष पर नंदी बैल की आकृति बनी है, जिसे न्याय और धर्म का प्रतीक माना जाता है। सेंगोल का निर्माण केवल आभूषणकारी कौशल का उदाहरण नहीं, बल्कि भारत की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक परंपरा से जुड़ी एक महत्वपूर्ण कलाकृति भी है।
1947 में नेहरू को सौंपा गया था सेंगोल
स्वतंत्रता के समय सत्ता हस्तांतरण के प्रतीक के रूप में सेंगोल को पंडित जवाहरलाल नेहरू को सौंपा गया था। उपलब्ध ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, 14 और 15 अगस्त 1947 की मध्यरात्रि के आसपास यह समारोह हुआ था। बाद के वर्षों में सेंगोल को इलाहाबाद संग्रहालय में रखा गया।
2023 में नए संसद भवन में मिली जगह
28 मई 2023 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नए संसद भवन में सेंगोल को लोकसभा अध्यक्ष की कुर्सी के पास स्थापित किया। इसके बाद यह ऐतिहासिक प्रतीक राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में आया। वुम्मिदी एथिराज के निधन के साथ ही उस परिवार के एक महत्वपूर्ण सदस्य का जीवन अध्याय समाप्त हो गया, जिसने भारत की स्वतंत्रता से जुड़ी इस विरासत के निर्माण में योगदान दिया।
आभूषण कला और भारतीय विरासत में योगदान हमेशा रहेगा याद
वुम्मिदी एथिराज का योगदान पारंपरिक आभूषण निर्माण और भारत की सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा रहा। प्रधानमंत्री और उपराष्ट्रपति की ओर से व्यक्त संवेदनाएं उनके काम के राष्ट्रीय महत्व को रेखांकित करती हैं। उनके निधन पर परिवार, शुभचिंतकों और आभूषण उद्योग से जुड़े लोगों में शोक का माहौल है।
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