Bollywood Story : क्या कैंटीन में समोसे पहुंचाते थे शाहरुख खान, पंकज कपूर ने खोला बचपन का राज

Bollywood Story : भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े सुपरस्टार शाहरुख खान का सफर किसी परीकथा से कम नहीं है। आज दुनिया भर में अपनी अदाकारी का लोहा मनवाने वाले किंग खान के जीवन का हर पड़ाव युवाओं के लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं है। दिल्ली के एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाले शाहरुख ने अपनी मेहनत और दृढ़ इच्छाशक्ति के दम पर बॉलीवुड में अपना एक अलग मुकाम बनाया है। उनकी वैश्विक लोकप्रियता किसी से छिपी नहीं है, लेकिन उनके इस चमकते सितारों वाले करियर के पीछे संघर्ष और छोटे-छोटे कामों का एक लंबा इतिहास भी रहा है। हाल ही में दिग्गज अभिनेता पंकज कपूर ने शाहरुख खान के जीवन से जुड़ा एक ऐसा किस्सा साझा किया है, जिससे बहुत कम लोग वाकिफ हैं।

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नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा की कैंटीन में करते थे शाहरुख काम

‘किंडल कास्ट’ यूट्यूब चैनल के साथ एक विशेष साक्षात्कार में पंकज कपूर ने 70 के दशक के उन दिनों को याद किया जब वे स्वयं ‘नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा’ (NSD) में एक छात्र के रूप में प्रशिक्षण ले रहे थे। पंकज कपूर ने बताया कि उन दिनों युवा शाहरुख खान अक्सर एनएसडी की कैंटीन में दिखाई देते थे। उस समय शाहरुख की उम्र महज 10 वर्ष के आसपास रही होगी। दिग्गज अभिनेता के अनुसार, इंटरवल के दौरान जब थिएटर कलाकार रिफ्रेशमेंट लेते थे, तब शाहरुख उन कलाकारों को समोसे और अन्य नाश्ता परोसने में मदद किया करते थे। पंकज कपूर को आज भी याद है कि वह छोटा बच्चा कितनी फुर्ती से कलाकारों की सेवा किया करता था।

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परिवार का रेस्टोरेंट बिजनेस और शाहरुख का बचपन

पंकज कपूर का मानना है कि उस समय शाहरुख के पिता या उनके कोई करीबी रिश्तेदार एनएसडी की कैंटीन का संचालन करते थे। वास्तव में, शाहरुख खान के पिता मीर ताज मोहम्मद खान दिल्ली के सफदरजंग इलाके में ‘खातिर’ नाम का एक बेहद मशहूर रेस्टोरेंट चलाया करते थे। यह रेस्टोरेंट उनके परिवार की आजीविका का मुख्य साधन था। शाहरुख के पिता के निधन के बाद उनकी माता ने भी अंतिम समय तक उस रेस्टोरेंट को संभाला था। यही कारण है कि बचपन में शाहरुख अक्सर अपने परिवार के खान-पान के व्यवसाय से जुड़े कार्यों में हाथ बटाते थे। एनएसडी की कैंटीन का वह जुड़ाव उनके शुरुआती संघर्ष और सादगीपूर्ण जीवन को दर्शाता है।

जब सह-कलाकार बने ‘राम जाने’ के सेट पर

समय का पहिया कितनी तेजी से घूमता है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिस छोटे बच्चे को पंकज कपूर ने एनएसडी की कैंटीन में समोसे सर्व करते देखा था, वही बच्चा आगे चलकर बॉलीवुड का सबसे बड़ा स्टार बना। वर्ष 1995 में आई एक्शन-थ्रिलर फिल्म ‘राम जाने’ में पंकज कपूर और शाहरुख खान ने साथ काम किया था। उस दौरान शायद किसी ने नहीं सोचा था कि कैंटीन में नाश्ता परोसने वाला वह बच्चा एक दिन भारतीय सिनेमा का पर्याय बन जाएगा। यह कहानी न केवल शाहरुख खान के विनम्र स्वभाव को रेखांकित करती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि निरंतर मेहनत से कोई भी व्यक्ति शून्य से शिखर तक का सफर तय कर सकता है।

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Chandan Das

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