Gau Raksha Movement
Gau Raksha Movement: ज्योतिष पीठ के पूज्य शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज ‘गौ माता’ को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाने और उनकी रक्षा के लिए एक निर्णायक मुहिम पर निकल पड़े हैं। काशी (वाराणसी) की पवित्र धरती से ‘गौ प्रतिष्ठा धर्म युद्ध’ का शंखनाद करने के बाद, शंकराचार्य अब उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ पहुँच चुके हैं। उनकी यह यात्रा केवल एक धार्मिक भ्रमण नहीं, बल्कि सनातन धर्म के प्रति आस्था रखने वालों के लिए एक बड़ा आह्वान है। वाराणसी से शुरू हुई इस पदयात्रा और जनसंपर्क अभियान का मुख्य उद्देश्य गौ हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध और गौ संवर्धन के प्रति सरकार व समाज को जागरूक करना है।
लखनऊ पहुँचने के बाद अब सबकी नजरें 11 मार्च को होने वाली विशाल सभा पर टिकी हैं। शंकराचार्य इस दिन गौ रक्षा और गौ प्रतिष्ठा को लेकर एक महत्वपूर्ण सभा को संबोधित करेंगे। माना जा रहा है कि इस सभा के माध्यम से वह केंद्र और राज्य सरकार के समक्ष अपनी मांगों को और भी प्रखरता से रखेंगे। राजधानी के प्रमुख स्थलों से होते हुए जब उनका काफिला गुजरा, तो भक्तों ने फूल-मालाओं के साथ उनका भव्य स्वागत किया। इस दौरान ‘गौ माता की जय’ के नारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। 11 मार्च का दिन उत्तर प्रदेश की राजनीति और धर्म, दोनों ही क्षेत्रों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होने वाला है।
जहाँ एक ओर शंकराचार्य लखनऊ में अपनी हुंकार भरेंगे, वहीं दूसरी ओर उनकी तपोभूमि काशी में भी उनके समर्थन में भारी हलचल है। शंकराचार्य के मीडिया प्रभारी संजय पांडे ने जानकारी दी है कि स्वामी जी के संकल्प को शक्ति प्रदान करने के लिए वाराणसी के प्रसिद्ध अस्सी घाट पर विशेष ‘शंखनाद’ कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। 11 मार्च को दोपहर 2:00 बजे काशी के विद्वान, बटुक और गौ भक्त गंगा के तट पर एकत्रित होंगे। इस दौरान मां गंगा से प्रार्थना की जाएगी कि शंकराचार्य का यह महान संकल्प निर्विघ्न पूर्ण हो। जयघोष और शंखध्वनि के माध्यम से पूरी दुनिया को गौ माता की महिमा का संदेश भेजा जाएगा।
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की यह धर्म यात्रा 7 मार्च को वाराणसी से अत्यंत आध्यात्मिक माहौल में शुरू हुई थी। प्रस्थान से पूर्व उन्होंने काशी के प्रथम पूज्य चिंतामणि गणेश और संकट मोचन हनुमान मंदिर में मत्था टेक कर आशीर्वाद लिया था। वाराणसी से निकलने के बाद उनकी यात्रा जौनपुर, सुल्तानपुर और सीतापुर जैसे प्रमुख जिलों से होकर गुजरी। हर पड़ाव पर हजारों की संख्या में सनातन प्रेमियों और गौ भक्तों ने उन्हें अपना समर्थन दिया। रास्ते में उन्होंने विभिन्न स्थानों पर छोटे प्रवचनों के माध्यम से लोगों को समझाया कि क्यों एक हिंदू के लिए गौ रक्षा अनिवार्य है और इसे धर्म युद्ध क्यों कहा जा रहा है।
स्वामी जी की इस यात्रा को न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे देश के धर्माचार्यों और संतों का समर्थन मिल रहा है। शंकराचार्य का मानना है कि जब तक गौ माता को संवैधानिक रूप से संरक्षण नहीं मिलता, तब तक हिंदू समाज का उत्थान अधूरा है। लखनऊ की सभा में वह गौ रक्षा के लिए आगामी रणनीति का खुलासा कर सकते हैं। काशी के विद्या मठ से लेकर लखनऊ के आयोजन स्थलों तक, हर जगह गौ भक्तों की टोलियां सक्रिय हैं। अब देखना यह है कि 11 मार्च के संबोधन के बाद यह ‘गौ प्रतिष्ठा धर्म युद्ध’ भविष्य में क्या नया मोड़ लेता है और शासन-प्रशासन इस पर क्या प्रतिक्रिया देता है।
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