UP News : शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के बाद चर्चा में आए Gen-Z युवाओं को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। उन्होंने युवाओं को देश और समाज का हिस्सा बताते हुए कहा कि ये हमारे ही बच्चे हैं। उनके मुताबिक, इन युवाओं ने महसूस किया है कि सच को पीछे दबाया जा रहा है, जबकि समाज के बड़े और प्रभावशाली लोग कई मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखने से बचते दिखाई देते हैं।
युवाओं को बताया मासूम और बेबाक
शंकराचार्य ने कहा कि Gen-Z के ये बच्चे बहुत मासूम हैं और उनके भीतर जो बात होती है, उसे सीधे तौर पर सामने रखने का साहस रखते हैं। उन्होंने कहा कि जब समाज में कुछ गलत होता है तो बड़े लोग अपनी बात कहने से पहले कई तरह के पहलुओं और परिणामों पर विचार करते हैं। इसके विपरीत युवा अपनी भावनाओं और अनुभवों के आधार पर खुलकर बोलते हैं।
बुद्धिजीवियों से युवाओं के साथ खड़े होने की अपील
उन्होंने कहा कि देश के विद्वानों और बुद्धिजीवियों को इन युवाओं के साथ खड़ा होना चाहिए। शंकराचार्य के मुताबिक, युवाओं की आवाज को केवल विरोध या प्रदर्शन के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यह समझने की कोशिश होनी चाहिए कि आखिर किन परिस्थितियों ने उन्हें अपनी बात सार्वजनिक रूप से रखने के लिए प्रेरित किया।
राम मंदिर चढ़ावा मामले पर भी सवाल
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले को लेकर भी सवाल उठाए। एबीपी लाइव के सवाल पर उन्होंने मामले की जांच और कार्रवाई को लेकर अपनी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि जिस कोषाध्यक्ष के कार्यकाल के दौरान चोरी की घटना हुई, उसे बाद में प्रमोशन दे दिया गया। उन्होंने इस स्थिति को लेकर सवाल किया कि आखिर जिम्मेदारी किसकी तय की जाएगी।
आरोपों में आए लोगों पर कार्रवाई को लेकर प्रश्न
शंकराचार्य ने कहा कि जिन लोगों के नाम इस मामले में चर्चा में आए थे, वे अब गवाह बताए जा रहे हैं और अभियुक्त नहीं हैं। ऐसे में उन्होंने सवाल उठाया कि यदि आरोपित पक्ष ही नहीं है तो मुकदमा आखिर किसके खिलाफ चलाया जाएगा। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम पर जांच और जवाबदेही को लेकर सवाल खड़े किए।
‘बली का बकरा’ बनाए जाने पर तंज
उन्होंने कहा कि स्वाभाविक तौर पर जिन लोगों को ‘बली का बकरा’ बनाया गया होगा, उन्हीं के ऊपर पूरा मामला डाल दिया जाएगा। शंकराचार्य ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के उस कथन का भी जिक्र किया, जिसमें निष्पक्ष जांच के बाद ‘दूध का दूध और पानी का पानी’ होने की बात कही गई थी।
‘न दूध दिखा, न पानी’ वाला बयान
शंकराचार्य ने तंज कसते हुए कहा कि इस मामले में उन्हें न तो दूध दिखाई दिया और न ही पानी, बल्कि सब कुछ उन्हें ‘मरुस्थल’ जैसा नजर आ रहा है। उन्होंने इसी संदर्भ में व्यंग्य करते हुए कहा कि जब यहां से लाखों गाय गायब हो गईं तो दूध आएगा कहां से। उनके इस बयान में राम मंदिर चढ़ावा मामले की जांच और प्रशासनिक कार्रवाई पर उनकी नाराजगी साफ दिखाई दी।
ट्रस्ट के सदस्यों को लेकर भी चर्चा
उन्होंने आरोपों और कार्रवाई को लेकर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि संबंधित लोगों में शर्म और हया बाकी नहीं रह गई है। गौरतलब है कि राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में चंपत राय और अनिल मिश्रा को क्लीन चिट दिए जाने की बात सामने आई थी। इसके साथ ही राम मंदिर ट्रस्ट में नए सदस्यों की नियुक्ति भी की जा चुकी है।
Gen-Z और राम मंदिर मामले पर बयान चर्चा में
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के Gen-Z को लेकर दिए बयान और राम मंदिर चढ़ावा मामले पर उठाए गए सवालों ने एक साथ राजनीतिक तथा सामाजिक बहस को चर्चा में ला दिया है। एक ओर उन्होंने युवाओं की बेबाकी और उनके सवाल उठाने के अधिकार का समर्थन किया, वहीं दूसरी ओर राम मंदिर से जुड़े मामले में जांच, जिम्मेदारी और कार्रवाई की प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए।
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