Sonam Wangchuk Video: शिक्षाविद और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने शुक्रवार को एक वीडियो संदेश जारी कर अपनी 26 दिनों की भूख हड़ताल और उसके बाद उठ रहे सवालों पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक अनशन करने और शारीरिक कठिनाइयों का सामना करने के बावजूद अब उन्हें अपनी निष्ठा और ईमानदारी पर सवालों का जवाब देना पड़ रहा है। वांगचुक ने कहा कि उनके लिए यह स्थिति बेहद दुखद और आश्चर्यजनक है कि आंदोलन के बाद उन्हें अपने फैसलों को लेकर सफाई देनी पड़ रही है।
अस्पताल के भीतर का वीडियो भी किया साझा
अपने वीडियो संदेश में सोनम वांगचुक ने अस्पताल के अंदर का एक दृश्य भी साझा किया। वीडियो में उन्हें अस्पताल की गैलरी में चलते हुए और वहां मौजूद पुलिसकर्मियों से बातचीत करते देखा जा सकता है। इस दौरान वह पुलिसकर्मियों से कहते हैं कि यदि आवश्यक हो तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाए। वीडियो में यह भी दिखाई देता है कि वह अस्पताल से बाहर जाने की इच्छा व्यक्त करते हैं और स्वयं दरवाजा खोलकर बाहर निकलते हैं।
शारीरिक स्थिति का किया उल्लेख
वीडियो संदेश में वांगचुक ने कहा कि 26 दिनों की भूख हड़ताल के दौरान उनकी शारीरिक स्थिति काफी कमजोर हो गई थी। उन्होंने बताया कि लंबे अनशन के कारण उनका वजन लगभग 11 किलोग्राम कम हो गया और शरीर की मांसपेशियों पर भी असर पड़ा। उनका कहना था कि ऐसी स्थिति में शारीरिक रूप से संघर्ष करना आसान नहीं था और उस समय की परिस्थितियों को समझे बिना उनके निर्णयों पर टिप्पणी करना उचित नहीं है।
पुलिस से बातचीत का किया जिक्र
वीडियो में वांगचुक पुलिसकर्मियों से बातचीत करते हुए दिखाई देते हैं। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन चाहे तो उन्हें गिरफ्तार कर सकता है। बातचीत के दौरान उन्होंने यह भी कहा कि लगातार तनाव की स्थिति उनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है। वीडियो में उनकी पत्नी गीतांजलि भी दिखाई देती हैं, जो उनके साथ मौजूद रहती हैं। यह दृश्य अस्पताल में हुई घटनाओं के संदर्भ में साझा किया गया है।
आलोचनाओं पर व्यक्त की नाराजगी
सोनम वांगचुक ने अपने वीडियो संदेश में कहा कि उन्हें यह देखकर दुख हुआ कि अनशन समाप्त करने के तरीके को लेकर विभिन्न प्रकार के सवाल उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कई लोगों ने उनसे पूछा कि उन्होंने किन लोगों के हाथों अपना अनशन समाप्त किया और इसके पीछे क्या कारण थे। वांगचुक का कहना था कि इतने लंबे अनशन के बाद उन्हें इस प्रकार के सवालों का सामना करना पीड़ादायक लग रहा है।
‘क्या मुझे अपनी ईमानदारी साबित करनी होगी?’
वीडियो में उन्होंने कहा कि 26 दिन तक भूखे रहने और आंदोलन के लिए अपना स्वास्थ्य दांव पर लगाने के बाद यदि उन्हें अपनी नीयत और ईमानदारी का प्रमाण देना पड़े, तो यह उनके लिए बेहद निराशाजनक है। उन्होंने कहा कि अब उनसे यह पूछा जा रहा है कि अनशन किसके हाथों समाप्त किया गया, क्यों किया गया और इसके पीछे क्या कारण थे। उनके अनुसार, इन सवालों ने उन्हें मानसिक रूप से भी प्रभावित किया है।
अनशन समाप्त करने को लेकर दी सफाई
वांगचुक ने कहा कि यदि उनका उद्देश्य किसी प्रकार का समझौता करना होता, तो उन्हें 26 दिनों तक भूख हड़ताल करने की आवश्यकता ही नहीं पड़ती। उन्होंने कहा कि उन्होंने आंदोलन के दौरान पूरी निष्ठा के साथ अपनी बात रखी और अपने स्वास्थ्य की परवाह किए बिना शांतिपूर्ण तरीके से विरोध जारी रखा। उनका कहना था कि अनशन समाप्त करने के निर्णय को किसी अन्य संदर्भ में नहीं देखा जाना चाहिए।
स्वास्थ्य में सुधार के बाद रखा अपना पक्ष
वीडियो के अंत में सोनम वांगचुक ने बताया कि चिकित्सकीय सलाह के अनुसार उन्होंने तरल आहार लेना शुरू कर दिया है, जिससे उनकी शारीरिक स्थिति में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य में कुछ सुधार आने के बाद उन्होंने लोगों के सामने अपना पक्ष रखना आवश्यक समझा। साथ ही उन्होंने अपील की कि उनके आंदोलन और उससे जुड़े निर्णयों को तथ्यों के आधार पर देखा जाए तथा बिना पुष्टि के किसी भी निष्कर्ष पर न पहुंचा जाए।
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