Shardiya Navratri 2026 : शारदीय नवरात्रि को मां दुर्गा की उपासना के लिए विशेष पर्व माना जाता है। नौ दिनों तक चलने वाले इस धार्मिक आयोजन में भक्त मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा-अर्चना करते हैं। कई श्रद्धालु अपने घरों में घटस्थापना के साथ अखंड ज्योत भी जलाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस ज्योत को नवरात्रि की शुरुआत से लेकर पूजा के समापन तक लगातार जलाए रखने की परंपरा है। इसे श्रद्धा, भक्ति, प्रकाश और सकारात्मकता से जोड़कर देखा जाता है।
2026 में कब से शुरू होंगे नवरात्रि
पंचांग के अनुसार, साल 2026 में शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर से होगी। वहीं नवरात्रि का समापन 19 अक्टूबर को महानवमी के साथ होगा। इस दौरान मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा की जाएगी। कई घरों और मंदिरों में घटस्थापना के साथ अखंड दीप प्रज्वलित किया जाएगा। ऐसे में अखंड ज्योत से जुड़े धार्मिक नियमों को जानना श्रद्धालुओं के लिए उपयोगी माना जाता है।
अखंड ज्योत आखिर क्या होती है
अखंड ज्योत ऐसी दीप ज्योति को कहा जाता है, जिसे धार्मिक अनुष्ठान की शुरुआत से निर्धारित समापन तक लगातार जलाए रखने की परंपरा होती है। नवरात्रि में कई परिवार घटस्थापना के समय मां दुर्गा के सामने अखंड दीपक प्रज्वलित करते हैं। धार्मिक मान्यताओं में दीपक को ज्ञान, प्रकाश और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। इसी भाव के साथ भक्त मां दुर्गा की आराधना के दौरान अखंड ज्योत जलाते हैं।
अखंड ज्योत जलाने का उद्देश्य क्या है
नवरात्रि में अखंड ज्योत जलाने की परंपरा मुख्य रूप से देवी भक्ति और आराधना से जुड़ी मानी जाती है। मान्यता है कि लगातार जलती हुई ज्योत पूजा स्थल में आध्यात्मिक और सकारात्मक वातावरण का प्रतीक होती है। भक्त दीपक के माध्यम से मां दुर्गा के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट करते हैं। अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में अखंड ज्योत जलाने की विधि और नियमों में कुछ अंतर भी देखने को मिल सकता है।
घी या तेल से कैसे जलाएं ज्योत
अखंड ज्योत के लिए कुछ परिवारों में घी के दीपक का इस्तेमाल करने की परंपरा है, जबकि कई लोग तेल से दीपक जलाते हैं। इस विषय में धार्मिक परंपराएं एक जैसी नहीं हैं। इसलिए श्रद्धालु अपने परिवार की परंपरा, पूजा पद्धति या स्थानीय मान्यता के अनुसार घी अथवा तेल का इस्तेमाल कर सकते हैं। दीपक जलाते समय उसकी लौ स्थिर रखने और पर्याप्त ईंधन की व्यवस्था पर ध्यान देना जरूरी माना जाता है।
अगर अखंड ज्योत बीच में बुझ जाए
अखंड ज्योत के अचानक बुझने को लेकर श्रद्धालुओं के मन में अक्सर चिंता रहती है। धार्मिक परंपराओं में इस स्थिति को लेकर अलग-अलग मत मिलते हैं। इसलिए ऐसी परिस्थिति में घबराने की आवश्यकता नहीं है। पूजा स्थल को व्यवस्थित करने के बाद अपनी पारिवारिक परंपरा और पूजा विधि के अनुसार दोबारा दीपक प्रज्वलित किया जा सकता है। किसी विशेष धार्मिक संकल्प या अनुष्ठान में पुरोहित की सलाह भी ली जा सकती है।
दीपक की सुरक्षा का रखें विशेष ध्यान
अखंड ज्योत कई घंटों या लगातार कई दिनों तक जल सकती है, इसलिए सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है। दीपक को स्थिर, साफ और ज्वलनशील वस्तुओं से दूर स्थान पर रखना चाहिए। पूजा स्थल के आसपास कपड़े, कागज, पर्दे या अन्य आसानी से आग पकड़ने वाली चीजें नहीं रखनी चाहिए। घी या तेल डालते समय भी सावधानी बरतें और दीपक को बिना निगरानी के जलता हुआ छोड़ने से बचें।
अखंड ज्योत का धार्मिक संदेश
धार्मिक मान्यताओं में दीपक को अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ने का प्रतीक माना जाता है। नवरात्रि में मां दुर्गा की पूजा के दौरान अखंड ज्योत इसी आध्यात्मिक भावना से जुड़ी मानी जाती है। भक्त इसे देवी के प्रति अपनी निरंतर भक्ति और श्रद्धा का प्रतीक मानते हैं। हालांकि, अखंड ज्योत से जुड़े लाभ और मान्यताएं धार्मिक आस्था पर आधारित हैं। अलग-अलग परिवार अपनी परंपरा के अनुसार पूजा की विधि अपना सकते हैं।
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