Share Market Today : जून 2026 के आखिरी सप्ताह का पहला कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार के लिए काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा। बाजार ने शुरुआती कारोबार में मामूली बढ़त दर्ज की थी, लेकिन यह तेजी टिक नहीं सकी और जल्द ही बाजार में बिकवाली का दबाव हावी हो गया। बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी, दोनों ही ऊपरी स्तरों से फिसलते हुए दिखाई दिए। फिलहाल, निफ्टी 24,100 के मनोवैज्ञानिक स्तर के आसपास संघर्ष कर रहा है, जबकि सेंसेक्स 77,200 के स्तर से नीचे कारोबार कर रहा है। बाजार का ओवरऑल स्ट्रक्चर फिलहाल कमजोर नजर आ रहा है, और इंडिया VIX (Volatility Index) में हुई बढ़ोत्तरी इस बात का स्पष्ट संकेत है कि दिनभर निवेशकों को उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है।

सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट का ट्रेंड
सोमवार के कारोबारी सत्र में निफ्टी ने एक समय 24,005.45 के निचले स्तर को छुआ, जो करीब 50 अंकों की गिरावट को दर्शाता है। वहीं, सेंसेक्स भी पीछे नहीं रहा और 200 अंकों से अधिक की गिरावट के साथ 76,853.93 के स्तर पर पहुंच गया। इस गिरावट के पीछे मुख्य रूप से आईटी (IT), ऑटो (Auto) और बैंकिंग (Banking) सेक्टर के शेयरों में हो रही जोरदार बिकवाली है। बाजार की चाल यह बताती है कि निवेशकों में फिलहाल डर का माहौल है, जिसके चलते वे अपने मुनाफे को सुरक्षित करने के लिए बिकवाली का सहारा ले रहे हैं।

बाजार की ब्रेड्थ कमजोर, बिकवाली का बोलबाला
बाजार की आंतरिक स्थिति यानी मार्केट ब्रेड्थ बेहद कमजोर बनी हुई है। NSE और BSE के एडवांस-डिक्लाइन डेटा को देखें तो बिकवाली का ट्रेंड पूरी तरह हावी है। NSE पर शुरुआती घंटों में लगभग 2,932 शेयरों में ट्रेडिंग हुई, जिनमें से 1,715 शेयरों में बिकवाली देखी गई, जबकि केवल 1,094 शेयरों में ही खरीदारी हो पाई। BSE का हाल भी इससे जुदा नहीं है, जहां 3,730 स्टॉक्स में से 1,959 शेयर लाल निशान में ट्रेड कर रहे थे। स्पष्ट है कि बाजार में चौतरफा बिकवाली का दबाव है, जो छोटे और मझोले शेयरों को भी अपनी चपेट में ले रहा है।
वैश्विक संकेतों का असर और कमोडिटी मार्केट की स्थिति
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, विशेषकर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती झड़पों का सीधा असर क्रूड ऑयल की कीमतों पर पड़ा है। ब्रेंट क्रूड 72 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया है, जिससे वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता का माहौल है। एशियाई बाजारों, विशेषकर जापान के निक्केई (Nikkei) और दक्षिण कोरिया के कोस्पी (KOSPI) पर भी इसका दबाव स्पष्ट दिख रहा है। हालांकि, भारतीय निवेशकों के लिए एक राहत भरी खबर यह है कि रुपया डॉलर के मुकाबले मजबूत होकर 94.26 के स्तर पर पहुंच गया है। रुपये की इस मजबूती से आयात करने वाली कंपनियों के मुनाफे पर सकारात्मक असर पड़ सकता है, लेकिन सोने की कीमतों में हल्की गिरावट ने निवेशकों की चिंता को बरकरार रखा है। फिलहाल, बाजार की दिशा वैश्विक संकेतों और क्रूड की कीमतों पर निर्भर करेगी।
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