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Share Market Update: कच्चे तेल में नरमी से संभला शेयर बाजार, सेंसेक्स-निफ्टी में रिकवरी

Share Market Update: पिछले लगातार पांच कारोबारी सत्रों की भारी बिकवाली और सोमवार को मचे चौतरफा हाहाकार के बाद आखिरकार आज मंगलवार 19 मई 2026 को भारतीय शेयर बाजार के लिए सुबह बेहद राहत भरी रही। घरेलू शेयर बाजार के दोनों मुख्य सूचकांक आज मजबूती के साथ हरे निशान में खुले, जिससे बीते कई दिनों से लगातार नुकसान झेल रहे निवेशकों ने थोड़ी राहत की सांस ली है।

शुरुआती कारोबार में ही बंबई स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 222.07 अंक यानी 0.29 प्रतिशत की शानदार बढ़त के साथ 75,537.11 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं दूसरी ओर, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 50 भी पीछे नहीं रहा और उसने भी 53.45 अंक यानी 0.23 प्रतिशत की मजबूती दर्ज करते हुए 23,703.40 के आंकड़े को पार कर लिया। बाजार के जानकारों का मानना है कि यदि आज दिनभर लिवाली का यह दौर जारी रहा, तो बाजार पिछले दिनों हुए नुकसान की एक बड़ी भरपाई कर सकता है।

ट्रंप के बयान का वैश्विक असर: कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट से मिली राहत

आज के कारोबार में आई इस शानदार रिकवरी की सबसे बड़ी और मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में आई बड़ी नरमी को माना जा रहा है।पिछले काफी समय से भू-राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे तेल के दाम आसमान छू रहे थे, जिसने वैश्विक शेयर बाजारों के साथ-साथ भारतीय बाजार की भी कमर तोड़ रखी थी। लेकिन अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ताजा और सकारात्मक बयानों के बाद ग्लोबल कमोडिटी मार्केट को बहुत बड़ी राहत मिली है।

डोनाल्ड ट्रंप के बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की ‘आग’ शांत होती दिख रही है। इसके चलते ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) का भाव 2 प्रतिशत से ज्यादा टूटकर $109.41 प्रति बैरल के स्तर पर नीचे आ गया है। इसी तरह अमेरिकी क्रूड यानी डब्ल्यूटीआई (WTI) की कीमतों में भी 1.3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है और यह $107.25 प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा है। ईंधन के दामों में आई इस कमी ने वैश्विक स्तर पर महंगाई के दबाव को कम करने का काम किया है।

भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बूस्टर: तेल का सस्ता होना बाजार के लिए क्यों है बेहद फायदेमंद?

कच्चे तेल की कीमतों में आई इस गिरावट का सीधा और सबसे बड़ा फायदा भारतीय अर्थव्यवस्था और यहां के शेयर बाजार को मिलता है। इस गणित को समझना बेहद आसान है; दरअसल भारत अपनी कुल ऊर्जा जरूरतों का 80 प्रतिशत से भी ज्यादा कच्चा तेल दूसरे देशों से आयात (Import) करता है। ऐसे में जब भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल सस्ता होता है, तो भारत का आयात बिल काफी कम हो जाता है, जिससे देश का विदेशी मुद्रा भंडार बचता है और राजकोषीय घाटा भी नियंत्रण में रहता है।

इसके अलावा, तेल सस्ता होने से देश के भीतर लॉजिस्टिक्स, ट्रांसपोर्टेशन और मैन्युफैक्चरिंग लागत में कमी आती है, जो अंततः कंपनियों के मुनाफे को बढ़ाती है। यही कारण है कि कच्चे तेल का सस्ता होना भारतीय शेयर बाजार के लिए हमेशा एक बड़ा पॉजिटिव ट्रिगर माना जाता है, जिसका असर आज सेंसेक्स और निफ्टी की इस शुरुआती तेजी के रूप में साफ दिखाई दे रहा है।

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