Sharjeel Imam Bail : दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने जेल में बंद शरजील इमाम को चचेरे भाई की शादी में शामिल होने के लिए अंतरिम जमानत दी है। अदालत ने उसे 4 अक्टूबर से 10 अक्टूबर तक की अवधि के लिए राहत प्रदान की है। इस दौरान शरजील इमाम अपने परिवार के साथ शादी समारोह में शामिल हो सकेगा। हालांकि, यह राहत सीमित अवधि के लिए है और उसके खिलाफ चल रहे मुख्य मामले की न्यायिक प्रक्रिया पर इसका कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा।
फरवरी 2020 दिल्ली दंगों की साजिश का आरोप
शरजील इमाम पर फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए सांप्रदायिक दंगों से जुड़ी कथित बड़ी साजिश में भूमिका निभाने का आरोप है। अभियोजन पक्ष का आरोप है कि 2019 में नागरिकता संशोधन कानून यानी CAA के विरोध में हुए धरना-प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि में दंगों की कथित साजिश तैयार की गई थी। इस मामले में शरजील पर गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम यानी UAPA की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज है।
अगस्त 2020 में हुई थी गिरफ्तारी
दिल्ली हिंसा से जुड़े इस मामले में शरजील इमाम को अगस्त 2020 में गिरफ्तार किया गया था। तब से वह न्यायिक हिरासत में है। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष की ओर से लगातार अलग-अलग दलीलें पेश की जाती रही हैं। अब अदालत ने शादी समारोह में शामिल होने के लिए उसे सीमित अवधि की अंतरिम जमानत दी है।
नियमित जमानत पर 30 सितंबर को सुनवाई
अंतरिम जमानत का यह आदेश ऐसे समय आया है, जब शरजील इमाम की नियमित जमानत याचिका पर 30 सितंबर को सुनवाई प्रस्तावित है। यानी अदालत का मौजूदा आदेश केवल पारिवारिक समारोह में शामिल होने के लिए अस्थायी राहत देता है। नियमित जमानत के सवाल पर अदालत अलग से सुनवाई करेगी और मामले में उपलब्ध रिकॉर्ड तथा संबंधित कानूनी पहलुओं पर विचार करेगी।
दिल्ली पुलिस ने जमानत कार्यवाही पर उठाए थे सवाल
इससे पहले दिल्ली पुलिस ने उमर खालिद और शरजील इमाम की नई जमानत याचिकाओं का विरोध किया था। पुलिस की ओर से तर्क दिया गया कि दोनों आरोपियों ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित प्रक्रिया और समयसीमा से पहले ही अपनी जमानत याचिकाओं पर दोबारा सुनवाई की मांग शुरू कर दी है। राज्य ने हाई कोर्ट में दाखिल अपने जवाब में इस कार्यवाही को गलत और गैर-कानूनी बताया था।
सुप्रीम कोर्ट के जनवरी 2026 के फैसले का हवाला
राज्य ने अपने जवाब में ‘गुलफिशा फातिमा बनाम दिल्ली राज्य (NCT)’ मामले में सुप्रीम कोर्ट के 5 जनवरी 2026 के फैसले का भी उल्लेख किया। अभियोजन पक्ष के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत पर दोबारा विचार का रास्ता कुछ शर्तों के साथ उपलब्ध कराया था। राज्य का कहना है कि संरक्षित गवाहों की गवाही पूरी होने या 5 जनवरी 2026 से एक वर्ष पूरा होने, इनमें जो पहले हो, उसके बाद ही ऐसी प्रक्रिया पर विचार किया जाना था।
अभियोजन पक्ष ने सबूतों का भी किया जिक्र
राज्य ने दोनों आरोपियों की कथित भूमिका के संबंध में जांच के दौरान सामने आए विभिन्न सबूतों का हवाला दिया है। इनमें कथित बरामदगी, डिजिटल कम्युनिकेशन ट्रेल और गवाहों के बयान शामिल हैं। अभियोजन पक्ष का दावा है कि उत्तर-पूर्वी दिल्ली हिंसा से जुड़ी कथित बड़ी साजिश में दोनों की भूमिका महत्वपूर्ण थी। हालांकि, इन आरोपों और सबूतों पर अंतिम निर्णय अदालत की न्यायिक प्रक्रिया के तहत होना है।
शादी के लिए मिली सीमित अवधि की राहत
शरजील इमाम को मिली मौजूदा राहत नियमित जमानत नहीं, बल्कि केवल अंतरिम जमानत है। अदालत ने इसे विशेष रूप से चचेरे भाई की शादी में शामिल होने के उद्देश्य से सीमित अवधि के लिए मंजूर किया है। 4 अक्टूबर से 10 अक्टूबर तक की यह राहत समाप्त होने के बाद मामले में उसकी न्यायिक स्थिति पहले की तरह रहेगी। अब सभी की नजर 30 सितंबर को होने वाली नियमित जमानत याचिका की सुनवाई पर है।
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