Shashi Tharoor Janmashtami : कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने सवाल उठाया है कि जब पूरा भारत जन्माष्टमी का पर्व शनिवार को मना चुका है, तो केरल में इसे 14 सितंबर को क्यों मनाया जाएगा। थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर यह मुद्दा उठाया। “एक ही भगवान के दो जन्म कैसे?” थरूर ने तंज करते हुए लिखा, “क्या कोई बता सकता है कि ऐसा क्यों होता है? निश्चित रूप से भगवान श्रीकृष्ण 6 सप्ताह के अंतराल पर दो बार जन्म नहीं ले सकते!” उन्होंने यह भी पूछा कि क्या धार्मिक पर्वों की तिथियों को पूरे देश में एकरूप किया जाना चाहिए ताकि एक ही धर्म के अनुयायी एक साथ उत्सव मना सकें। मलयालम पंचांग बनाम राष्ट्रीय पंचांग केरल में जन्माष्टमी मलयालम पंचांग के आधार पर मनाई जाती है, जबकि भारत के अन्य हिस्सों में यह पर्व हिंदू राष्ट्रीय पंचांग या विक्रमी पंचांग के अनुसार मनाया जाता है। इसी कारण तिथियों में फर्क आता है। थरूर ने इस अंतर को सांस्कृतिक विविधता की बजाय धार्मिक एकता के संदर्भ में देखा और इसे सामाजिक समरसता से जोड़ा। “क्रिसमस देशभर में एक ही दिन क्यों, जन्माष्टमी नहीं?” थरूर ने सवाल उठाया कि जब पूरे देश में क्रिसमस एक ही दिन मनाया जाता है, तो हिन्दू पर्वों में यह एकरूपता क्यों नहीं हो सकती? उनका इशारा स्पष्ट रूप से त्योहारों की तिथियों में भिन्नता के कारण सामाजिक समन्वय में आने वाली बाधाओं की ओर था। श्रीकृष्ण को बताया आदर्श नेता एक सार्वजनिक कार्यक्रम में थरूर ने भगवान श्रीकृष्ण के नेतृत्व और रणनीतिक सोच की प्रशंसा करते हुए कहा कि आज के नेताओं को श्रीकृष्ण के जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए। उन्होंने गीता और महाभारत के प्रसंगों का हवाला देते हुए कहा कि श्रीकृष्ण का जीवन धर्म, नैतिकता और नीति का अनुपम संगम है। राहुल गांधी पर परोक्ष कटाक्ष? राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि थरूर का यह वक्तव्य राहुल गांधी के नेतृत्व की ओर परोक्ष संकेत हो सकता है। उन्होंने कहा, “कई बार श्रीकृष्ण ने ऐसे कदम उठाए जो पारंपरिक रूप से सही नहीं लगे, लेकिन उनका उद्देश्य धर्म की रक्षा था।” धर्म और परंपरा के संतुलन की सीख थरूर का यह बयान न केवल धार्मिक पर्वों की तिथियों की समानता की मांग करता है, बल्कि यह भी इंगित करता है कि धर्म की रक्षा के लिए परंपरा से हटकर फैसले लेना भी आवश्यक हो सकता है। उनके अनुसार, एक सच्चे नेता को नीति, नैतिकता और उद्देश्य तीनों का संतुलन बनाए रखना चाहिए। शशि थरूर के इस बयान ने धार्मिक तिथियों की असमानता पर चर्चा को हवा दे दी है। क्या देशभर में त्योहारों की तिथियों का एकीकरण संभव है? क्या इससे धार्मिक एकता और सामाजिक समरसता को बढ़ावा मिलेगा? यह बहस आने वाले दिनों में और भी गहराने की संभावना है। Read More : Election Commission Bihar SIR : चुनाव आयोग ने बिहार SIR पर दी सफाई, वोट चोरी के आरोपों को बताया संविधान का अपमान














