Shashi Tharoor : कांग्रेस सांसद और पूर्व विदेश राज्यमंत्री शशि थरूर ने शुक्रवार को संसद परिसर में मीडिया से बात करते हुए राहुल गांधी के उस बयान से असहमति जताई जिसमें उन्होंने भारतीय अर्थव्यवस्था को ‘डेड’ कहा था। मीडिया द्वारा पूछे गए सवाल पर थरूर ने कहा, “नहीं, ऐसा बिल्कुल नहीं है। यह सभी को पता है।” उनके इस बयान को पार्टी के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी के रुख से दूरी के रूप में देखा जा रहा है।
गुरुवार को कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के उस बयान का समर्थन किया था, जिसमें उन्होंने भारत की अर्थव्यवस्था को ‘डेड इकोनॉमी’ बताया था। ट्रम्प ने यह टिप्पणी भारत पर 25% टैरिफ लगाने के फैसले के बाद की थी। इसके जवाब में राहुल ने कहा था, “मुझे खुशी है कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने सच्चाई सामने रखी है।”
राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा था कि भाजपा ने अडाणी जैसे उद्योगपतियों की मदद के लिए देश की अर्थव्यवस्था को बर्बाद कर दिया है। उन्होंने कहा, “ट्रम्प जो कह रहे हैं वह सच है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को छोड़कर सभी जानते हैं कि भारतीय इकोनॉमी अब डेड हो चुकी है।”
शशि थरूर और राहुल गांधी के इन विरोधाभासी बयानों ने कांग्रेस के भीतर आर्थिक मुद्दों पर एकरूपता की कमी को उजागर कर दिया है। जहां एक ओर राहुल सरकार की आलोचना करते हुए भारत की अर्थव्यवस्था को मृत बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर थरूर यह मानने को तैयार नहीं हैं कि देश की अर्थव्यवस्था उस हालात में है।
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत पर 25% टैरिफ लगाने के फैसले को उचित ठहराते हुए कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था पहले ही मृत हो चुकी है। ट्रम्प का यह बयान भारत में राजनीतिक गर्मी का कारण बन गया।
अब तक केंद्र सरकार की ओर से इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। लेकिन, थरूर जैसे वरिष्ठ विपक्षी नेता द्वारा अर्थव्यवस्था को “डेड” न मानने का बयान सरकार के रुख की अप्रत्यक्ष पुष्टि माना जा सकता है।
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के विवादास्पद बयानों से विदेशी निवेशकों और बाजारों में गलत संदेश जा सकता है। भारत की अर्थव्यवस्था चुनौतियों से जूझ रही है, लेकिन उसे मृत घोषित करना अतिशयोक्ति है।
राहुल गांधी और शशि थरूर के अलग-अलग बयानों से स्पष्ट है कि कांग्रेस के भीतर भी भारत की आर्थिक स्थिति को लेकर एकमत नहीं है। यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब भारत वैश्विक मंचों पर अपनी अर्थव्यवस्था को उभरती शक्ति के रूप में पेश कर रहा है।
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