Shaukat Ali
Shaukat Ali: उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में एआईएमआईएम (AIMIM) के प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली के हालिया बयानों ने एक बार फिर देश में जनसंख्या और सांप्रदायिक राजनीति की बहस को हवा दे दी है। बुधवार देर शाम आयोजित नुक्कड़ सभाओं में शौकत अली ने जनसंख्या नियंत्रण की नीतियों पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने न केवल बढ़ती आबादी को देश की कमजोरी बताने वाले दावों को खारिज किया, बल्कि हिंदू संगठनों के बयानों पर पलटवार करते हुए बेहद विवादित राय रखी। उनके इस भाषण के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, जिससे सियासी गलियारों में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
शौकत अली ने अपने संबोधन में तर्क दिया कि किसी भी राष्ट्र की मजबूती उसकी विशाल आबादी में निहित होती है। उन्होंने चीन का उदाहरण देते हुए कहा कि आज चीन अपनी जनसंख्या के दम पर ही दुनिया की महाशक्ति बना हुआ है। हिंदू संगठनों द्वारा ‘चार बच्चे’ पैदा करने के आह्वान पर तंज कसते हुए शौकत अली ने कहा, “हिंदू भाइयों को 4 नहीं, बल्कि 14 बच्चे पैदा करने चाहिए।” उन्होंने सरकार को चुनौती देते हुए कहा कि यदि प्रशासन को जनसंख्या से वास्तव में समस्या है, तो वह ‘हम दो हमारे दो’ का सख्त कानून पूरे देश में एक समान रूप से लागू करके दिखाए।
मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद के नाम पर हो रहे निर्माण कार्यों का समर्थन करते हुए शौकत अली ने इसे संवैधानिक अधिकार बताया। उन्होंने सवाल उठाया कि भारत का संविधान हर नागरिक को अपनी पसंद के नाम से धार्मिक स्थल बनाने की आजादी देता है। उन्होंने आक्रामक अंदाज में पूछा कि यदि कोई व्यक्ति अपने बच्चे का नाम ‘बाबर’ रखता है या उसी नाम से कोई संस्थान शुरू करता है, तो उसे रोकने का अधिकार किसे है? उनके इस बयान को सीधे तौर पर पहचान की राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
शौकत अली ने केवल जनसंख्या पर ही बात नहीं की, बल्कि केंद्र और प्रदेश सरकार की नीतियों को भी कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान दौर में दाढ़ी, टोपी और खान-पान के आधार पर एक खास समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने मॉब लिंचिंग की बढ़ती घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि अल्पसंख्यकों के मन में डर पैदा करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने दावा किया कि एआईएमआईएम इस अन्याय के खिलाफ सड़क से लेकर सदन तक अपनी आवाज बुलंद करती रहेगी।
शौकत अली का यह रुख पार्टी अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी के उस पुराने तर्क की याद दिलाता है, जिसमें उन्होंने आरएसएस (RSS) के जनसंख्या संबंधी बयानों का विरोध किया था। ओवैसी ने पूर्व में आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा था कि मुसलमानों में फर्टिलिटी रेट सबसे तेजी से गिर रहा है। शौकत अली ने भी उसी लाइन पर चलते हुए कहा कि आबादी का डर दिखाकर एक विशेष समुदाय को निशाना बनाना राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा है, जिसका विरोध किया जाना अनिवार्य है।
2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में पार्टी की करारी हार पर बात करते हुए शौकत अली ने कहा कि उन्होंने अपनी गलतियों से सीख ली है। अब पार्टी केवल रैलियों तक सीमित नहीं है, बल्कि बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करने में जुटी है। उन्होंने हालिया बजट को ‘जनविरोधी’ करार देते हुए कहा कि आम जनता और अल्पसंख्यकों के हितों की अनदेखी की जा रही है। एआईएमआईएम अब अपनी नई रणनीति के साथ आगामी चुनावों में उतरने की तैयारी कर रही है, जिसमें आक्रामक भाषणों और जमीनी स्तर के काम का मेल देखने को मिल सकता है।
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