Sheikh Hasina case : बांग्लादेश की अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण की तीन-न्यायाधीशों की पीठ ने गुरुवार को पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना, उनके पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमाँ खान कमाल तथा पूर्व पुलिस महानिरीक्षक चौधरी अब्दुल्ला अल–मामून के खिलाफ गंभीर मानवताविरोधी अपराध के आरोप तय किए और मुकदमा शुरू करने का आदेश दिया। यह कार्रवाई हसीना के बांग्लादेश छोड़ने के बाद की गई है।
सरकारी समाचार एजेंसी बीएसएस की रिपोर्ट के अनुसार, न्यायाधिकरण ने औपचारिक रूप से तीनों आरोपियों पर आरोप तय कर दिए हैं और अब से मुकदमा चलाया जाएगा। यह शेख हसीना के खिलाफ पहली बार व्यक्तिगत रूप से मानवताविरोधी अपराध की औपचारिक सुनवाई का मामला है।
हसीना और असदुज्जमां को ‘भगोड़ा’ घोषित किया गया है, जबकि चौधरी अब्दुल्ला अल-मामून को गुरुवार को अदालत में पेश किया गया। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने अदालत में ‘अपराध स्वीकार’ किया और मुख्य लोक अभियोजक ताजुल इस्लाम ने उन्हें इस मामले में ‘मुख्य गवाह’ यानी अनुमोदक के रूप में स्थापित कर दिया।
शेख हसीना के खिलाफ अदालत में यही एक मामला नहीं है, बल्कि अवामी लीग नेता के खिलाफ दो अन्य मामले भी विचाराधीन हैं। एक मामले में उन पर पार्टी के शासन में दर्जनों लोगों के लापता होने और हत्या का आरोप है, जबकि दूसरा मामला ढाका स्थित मोतीझील इलाके में हिफाज़त-ए-इस्लाम रैली में हुई गोलीबारी में उन्हें जिम्मेदार ठहराता है।
ब्रिटेन की शीर्ष मीडिया संस्था बीबीसी ने एक आंतरिक जांच जारी की है जिसमें आरोप है कि शेख हसीना ने जुलाई 2023 में छात्र आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने के आदेश दिए थे। रिपोर्ट के अनुसार, इस आदेश में ‘घातक हथियारों’ के प्रयोग का उल्लेख है जो मानवाधिकार संगठनों की चिंता बढ़ा रहा है।
ढाका सरकार ने एक बार फिर शेख हसीना के प्रत्यर्पण की आधिकारिक मांग की है। इस मामले में देश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस के प्रेस सचिव शफीकुल आलम ने सोशल मीडिया पर भी अपना रुख स्पष्ट किया, जिससे स्पष्ट रूप से पता चलता है कि हसीना विरोधी राजनीतिक व कानूनी दबाव लगातार बढ़ रहे हैं।
बांग्लादेश की अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण में शेख हसीना के खिलाफ मानवताविरोधी गंभीर अपराधों पर मुकदमा दर्ज करना एक ऐतिहासिक घटना है। मुख्य गवाह अल-मामून की भूमिका और ब्रिटिश मीडिया की रिपोर्ट से मुकदमे की दिशा भी तेज हुई है। ढाका सरकार की प्रत्यर्पण मांग और राजनीतिक दबाव ने मामले को अंतरराष्ट्रीय विमर्श का विषय बना दिया है। अब अदालत के समक्ष हसीना का जवाब कितना प्रभावित होता है और राजनीतिक परिदृश्य में इस फैसले का क्या असर पड़ता है, यह समय बताएगा।
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