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Bangladesh : Sheikh Hasina को मिली 6 माह की जेल, न्यायिक सिस्टम पर उठे सवाल

Bangladesh : Seikh Hasina : मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली सरकार ने बांग्लादेशी न्याय व्यवस्था बदलाव लाने का औजार है! ढाका न्यायाधिकरण ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को बिना किसी आरोप के 6 महीने की जेल की सजा सुनाई है। पुलिस प्रशासन और जांचकर्ताओं को धमकाने के आरोप में मामला दर्ज किया गया था।

फोन पर हुई बातचीत को लेकर सजा

जानकारी के अनुसार यह मामला एक फोन पर हुई बातचीत के बाद दर्ज किया गया था। फोन कॉल में एक महिला की आवाज सुनाई दी, जिसमें कहा गया था, “मेरे खिलाफ 250 हत्या के मामले हैं। इसका मतलब है कि मुझे 250 लोगों को मारने की अनुमति मिली है।” साथ ही धमकी दी गई कि अवामी लीग के नेताओं और कार्यकर्ताओं के घरों पर अत्याचार और लूटपाट करने वाले सभी पुलिसकर्मियों के खिलाफ “कार्रवाई” की जाएगी। इस फोन पर हुई बातचीत के लीक होने के बाद मामला दर्ज किया गया था। फैसले में स्पष्ट किया गया कि महिला की आवाज शेख हसीना की थी। यह भी स्पष्ट किया गया कि ऑडियो एआई के जरिए नहीं बनाया गया था।

भातर के शरण में शेख हसीना

पिछले साल जुलाई-अगस्त में बांग्लादेश में भेदभाव विरोधी छात्र आंदोलन के चलते तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना को देश छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा था। ‘दोस्त’ भारत आ गए। फिलहाल, वे नई दिल्ली में सुरक्षित राजनीतिक शरण में हैं। हसीना के समय से ही उस देश में ‘बदले’ की राजनीति चल रही है! इस्कॉन के चिन्मय प्रभु अपना बदला ‘पूरा’ करने के लिए लंबे समय से जेल में हैं। अनगिनत कोशिशों के बावजूद उन्हें बख्शा नहीं गया। इसी राह पर चलने के लिए हसीना के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। बुधवार को न्यायाधिकरण ने उस मामले में पूर्व प्रधानमंत्री को 6 महीने जेल की सजा सुनाई।

तो इस बार शेख हसीना का राजनीतिक भविष्य क्या है?

भारत और बांग्लादेश के बीच 2013 में हुए प्रत्यर्पण समझौते के अनुसार, किसी भी भगोड़े आरोपी को दोनों देशों के हितों में मुकदमे के लिए प्रत्यर्पित किया जाना चाहिए। यह समझौता उन बांग्लादेशी आतंकवादियों पर लागू होता है जो भारतीय धरती पर घुसते हैं और भारतीय आतंकवादी बांग्लादेश में छिपते हैं। हालांकि, समझौते में अपवादों का भी उल्लेख किया गया है।

ध्यान देने वाली बात यह है कि इस तरह के किसी भी समझौते में शेख हसीना जैसी शख्सियत के मामले में प्रत्यर्पण का कोई प्रावधान नहीं है, जो राजनीतिक शरण में है। ऐसे में केंद्र अपनी नीति के अनुसार इस संबंध में कदम उठा सकता है। जानकार जनता के एक बड़े हिस्से के अनुसार, नई दिल्ली ‘भारतबंधु’ हसीना को इतनी जल्दी नहीं सौंपेगी।

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