Shivpal Singh Doping Ban: एशियन गेम्स के सिल्वर मेडलिस्ट और टोक्यो ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके जैवलिन थ्रोअर शिवपाल सिंह पर एक बार फिर डोपिंग का साया मंडरा गया है। नेशनल एंटी-डोपिंग एजेंसी (NADA) के एंटी-डोपिंग डिसिप्लिनरी पैनल ने उन्हें डोपिंग के दूसरे मामले में दोषी पाया है। प्रतिबंधित पदार्थ मेथांडिएनोन (Methandienone) के सेवन का दोषी पाए जाने के बाद शिवपाल को 10 साल के लिए निलंबित कर दिया गया है। 31 वर्षीय एथलीट के लिए यह फैसला उनके अंतरराष्ट्रीय खेल करियर पर बड़ा असर डाल सकता है।
डोप टेस्ट में मिला प्रतिबंधित स्टेरॉयड
शिवपाल सिंह के डोप टेस्ट में मेथांडिएनोन नामक प्रतिबंधित पदार्थ की मौजूदगी सामने आई थी। यह एक एनाबॉलिक स्टेरॉयड है, जिसका इस्तेमाल प्रदर्शन बढ़ाने के लिए किया जा सकता है और यह वर्ल्ड एंटी-डोपिंग एजेंसी की प्रतिबंधित सूची में शामिल है। दूसरे डोपिंग उल्लंघन के कारण उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई है। NADA पैनल का यह फैसला भारतीय एथलेटिक्स के लिए भी चिंता बढ़ाने वाला माना जा रहा है, क्योंकि शिवपाल देश के अनुभवी भाला फेंक खिलाड़ियों में शामिल रहे हैं।
2019 में हासिल की थी बड़ी उपलब्धि
शिवपाल सिंह के करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में 2019 की एशियन चैंपियनशिप का सिल्वर मेडल शामिल है। दोहा में आयोजित इस प्रतियोगिता में उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए 86.23 मीटर का थ्रो किया था, जो उनके करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन भी रहा। इसके अलावा उन्होंने एशियन गेम्स में सिल्वर मेडल जीता और टोक्यो ओलंपिक में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया। लंबे समय तक वह भारतीय जैवलिन थ्रो की प्रमुख उम्मीदों में शामिल रहे हैं।
पहली बार 2021 में डोपिंग मामले में फंसे
शिवपाल इससे पहले भी डोपिंग मामले में कार्रवाई का सामना कर चुके हैं। वर्ष 2021 में प्रतियोगिता से बाहर किए गए डोप टेस्ट के दौरान उनका सैंपल एक प्रतिबंधित स्टेरॉयड के लिए पॉजिटिव पाया गया था। इसके बाद NADA के एंटी-डोपिंग डिसिप्लिनरी पैनल ने अगस्त 2022 में उन्हें डोपिंग नियमों के उल्लंघन का दोषी माना था। उस समय उनके खिलाफ 2021 से प्रभावी चार साल के प्रतिबंध का फैसला सुनाया गया था।
दूषित सप्लीमेंट्स की दलील पर मिली राहत
चार साल के प्रतिबंध के खिलाफ शिवपाल ने NADA के अपील पैनल का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने दावा किया था कि डोप टेस्ट में प्रतिबंधित पदार्थ पाए जाने के पीछे दूषित सप्लीमेंट्स जिम्मेदार थे। जनवरी 2023 में अपील पैनल ने उनकी दलील स्वीकार कर ली। इसके बाद उनकी सजा चार साल से घटाकर केवल एक साल कर दी गई। इस फैसले के चलते शिवपाल को अप्रैल 2023 में दोबारा प्रतिस्पर्धी खेलों में लौटने का मौका मिला।
वापसी के बाद जीते थे कई पदक
प्रतिबंध की अवधि पूरी करने के बाद शिवपाल ने खेल में वापसी की और जल्द ही अपनी क्षमता का प्रदर्शन भी किया। जून 2023 में भुवनेश्वर में आयोजित नेशनल इंटर-स्टेट चैंपियनशिप में उन्होंने ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया। इसके बाद गोवा में आयोजित 2023 नेशनल गेम्स में शिवपाल ने शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया। उनकी वापसी को भारतीय एथलेटिक्स में सकारात्मक संकेत के तौर पर देखा गया था।
दूसरे मामले ने खड़ा किया बड़ा सवाल
अब डोपिंग के दूसरे मामले में 10 साल का प्रतिबंध उनके करियर के लिए बेहद गंभीर झटका है। 31 वर्ष की उम्र में इतनी लंबी सजा का मतलब है कि प्रतिस्पर्धी एथलेटिक्स में उनकी वापसी बेहद मुश्किल हो सकती है। हालांकि, आगे की कानूनी प्रक्रिया या अपील के विकल्प उपलब्ध हैं या नहीं, यह संबंधित नियमों और मामले की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
एमवी जिलना भी डोपिंग कार्रवाई की जद में
हाल के दिनों में डोपिंग नियमों के उल्लंघन को लेकर कार्रवाई का सामना करने वाले शिवपाल अकेले भारतीय एथलीट नहीं हैं। स्प्रिंटर एमवी जिलना को भी प्रतिबंधित पदार्थ मेफेंटरमाइन (Mephentermine) के लिए पॉजिटिव पाए जाने के बाद डोपिंग के दूसरे मामले में अस्थायी रूप से निलंबित किया गया है। इससे भारतीय एथलेटिक्स में एंटी-डोपिंग नियमों और खिलाड़ियों की जिम्मेदारी को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
करियर पर मंडराया संकट
शिवपाल सिंह के मामले में 10 साल का प्रतिबंध इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वह पहले ही एक डोपिंग मामले में सजा भुगत चुके हैं। वापसी के बाद उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतकर प्रतिस्पर्धी खेलों में वापसी के संकेत दिए थे, लेकिन दूसरे उल्लंघन ने उनकी राह मुश्किल कर दी है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि शिवपाल इस फैसले के खिलाफ कोई अपील करते हैं या नहीं और संबंधित पैनल आगे इस मामले में क्या निर्णय लेता है।
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