Import Restrictions
Import Restrictions : देश की अर्थव्यवस्था को संतुलित करने और कीमती धातुओं के बेलगाम होते आयात पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा रणनीतिक कदम उठाया है. सरकार ने चांदी के आयात को लेकर नई और बेहद सख्त पाबंदियां लागू कर दी हैं. वाणिज्य मंत्रालय द्वारा जारी नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, चांदी की कई प्रमुख श्रेणियों को ‘फ्री लिस्ट’ (मुक्त आयात श्रेणी) से तत्काल प्रभाव से हटाकर ‘रिस्ट्रिक्टेड’ (प्रतिबंधित श्रेणी) में डाल दिया गया है. इस प्रशासनिक बदलाव का सीधा मतलब यह है कि अब इन विशेष श्रेणियों के तहत चांदी का आयात पहले की तरह आसान या स्वतंत्र नहीं रहेगा. अब आयातकों को देश में चांदी लाने के लिए सरकार से विशेष लाइसेंस और अतिरिक्त बजटीय व तकनीकी मंजूरियां लेनी होंगी.
सरकार का यह सख्त कदम देश में कीमती धातुओं के लगातार बढ़ते आयात को नियंत्रित करने और ट्रेड डेफिसिट (व्यापार घाटे) को कम करने के मुख्य उद्देश्य से उठाया गया है. पिछले कुछ समय से भारतीय बाजारों में सोना और चांदी दोनों के ही आयात बिल में अप्रत्याशित बढ़ोतरी देखी जा रही थी. कीमती धातुओं की इस भारी खरीदारी की वजह से देश के कीमती विदेशी मुद्रा भंडार पर लगातार नकारात्मक दबाव बढ़ रहा था. केंद्रीय बैंक और वित्त मंत्रालय के अधिकारियों के लिए यह स्थिति चिंता का विषय बनी हुई थी, जिसे संभालने के लिए अब आयात के नियमों को कड़ा करने का नीतिगत फैसला लिया गया है.
नीति निर्माताओं को इस बात की भी गंभीर चिंता सता रही है कि सोने पर आयात शुल्क (इम्पोर्ट ड्यूटी) बढ़ने के कारण आम उपभोक्ता और बड़े निवेशक अब निवेश व आभूषणों के लिए चांदी की तरफ ज्यादा रुख कर सकते हैं. बाजार विशेषज्ञों का भी मानना था कि सोना महंगा होने के बाद मध्यवर्गीय परिवारों और घरेलू निवेशकों के बीच चांदी की मांग में भारी उछाल आ सकता है. इसी भावी संभावना और बाजार के मिजाज को भांपते हुए सरकार ने समय रहते चांदी के आयात पर भी अपनी पकड़ मजबूत करना शुरू कर दिया है ताकि बाजार में किसी भी तरह का असंतुलन पैदा न हो.
उल्लेखनीय है कि घरेलू बाजार में विदेशी सामानों की बाढ़ रोकने और स्थानीय विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने हाल ही में एक बड़ा कदम उठाया था. इसके तहत सोना और चांदी दोनों पर लगने वाली बुनियादी इम्पोर्ट ड्यूटी को 6% से सीधे बढ़ाकर 15% कर दिया गया था. शुल्क में इस भारी बढ़ोतरी के बावजूद आर्थिक गलियारों में यह आशंका लगातार जताई जा रही थी कि आम निवेशक सोने के मुकाबले कहीं अधिक सस्ती धातु होने के कारण चांदी को एक सुरक्षित निवेश मानकर इसकी थोक खरीद बढ़ा सकते हैं, जिससे सरकार के चालू खाते पर असर पड़ता.
मौजूदा समय में केंद्र सरकार का पूरा ध्यान अपने विदेशी मुद्रा भंडार को पूरी तरह सुरक्षित रखने और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये पर बनते दबाव को कम करने पर केंद्रित है. वैश्विक स्तर पर चल रहे भू-राजनीतिक तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कमोडिटी की कीमतों में आती अस्थिरता को देखते हुए सरकार बेहद सतर्क नजर आ रही है. आर्थिक विश्लेषकों का स्पष्ट मानना है कि यदि देश में कीमती धातुओं का आयात इसी तरह अनियंत्रित रूप से बढ़ता रहा, तो इससे चालू खाते का घाटा (CAD) और व्यापार घाटा दोनों ही खतरनाक स्तर पर पहुंच सकते हैं, जो देश की जीडीपी ग्रोथ के लिए सही नहीं होगा.
सरकारी सांख्यिकी विभाग द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि देश में सोने और चांदी का कुल आयात पहले ही करीब 30 साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंच चुका है. आयात में आई इस ऐतिहासिक गिरावट के पीछे की मुख्य वजह सरकार द्वारा लागू की गई ऊंची इम्पोर्ट ड्यूटी और अंतरराष्ट्रीय बाजार में इन धातुओं की आसमान छूती कीमतें रही हैं. अब जब सरकार ने चांदी की श्रेणियों पर नई प्रशासनिक पाबंदियां भी मढ़ दी हैं, तो यह तय माना जा रहा है कि आने वाले महीनों में चांदी के आयात ग्राफ में और भी ज्यादा बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है.
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