छत्तीसगढ़

Cyber Fraud : अंबिकापुर में फर्जी बैंक खाते से करोड़ों ट्रांजेक्शन, दोस्ती के नाम पर बड़ा धोखा

Cyber Fraud :  छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिला मुख्यालय अंबिकापुर में बैंकिंग धोखाधड़ी और साइबर ठगी का एक बेहद चौंकाने वाला मामला प्रकाश में आया है. यहां के गांधीनगर थाना क्षेत्र में दर्ज कराई गई एक आधिकारिक प्राथमिकी (FIR) के मुताबिक, एक सीधे-साधे युवक को अपने झांसे में लेकर और दोस्ती का नाजायज फायदा उठाकर शातिर ठगों ने उसके नाम पर बैंक में खाता खुलवा लिया. इसके बाद आरोपियों ने उस खाते का इस्तेमाल कर लगभग 1 करोड़ 80 लाख रुपये का संदिग्ध और भारी-भरकम वित्तीय लेनदेन (ट्रांजेक्शन) कर डाला. इस सनसनीखेज धोखाधड़ी की शिकायत मिलते ही स्थानीय पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है. पुलिस ने पीड़ित की शिकायत पर त्वरित कार्रवाई करते हुए दो नामजद युवकों के खिलाफ जालसाजी और धोखाधड़ी की गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज कर विस्तृत कानूनी जांच शुरू कर दी है.

चुनावी रैली में मुलाकात और घर निर्माण के बहाने खाता खुलवाने की रची साजिश

पुलिस से प्राप्त प्रामाणिक जानकारी के अनुसार, अंबिकापुर के गांधीनगर निवासी पीड़ित युवक वैभव सूर्यवंशी ने थाने में अपनी लिखित शिकायत दर्ज कराई है. पीड़ित ने बताया कि नवापारा क्षेत्र के रहने वाले दो युवकों—सुमित सिंह ठाकुर और अनुज सिंह ने पहले उससे गहरी दोस्ती बनाई और फिर उस विश्वास का फायदा उठाकर उसके नाम पर आईडीबीआई (IDBI) बैंक में खाते खुलवाकर उनका गलत इस्तेमाल किया. एफआईआर के विवरण के मुताबिक, वैभव की पहचान इन दोनों आरोपियों से कुछ समय पहले एक राजनीतिक रैली के दौरान हुई थी.

इसके बाद नवंबर 2024 में दोनों आरोपियों ने वैभव को अपने जाल में फंसाने के लिए एक झूठी कहानी रची. उन्होंने वैभव से कहा कि उन्हें अपने कुछ बाहर रहने वाले परिचितों से घर के निर्माण कार्य के लिए मोटी रकम मंगानी है, जिसके लिए उन्हें एक नए बैंक खाते की जरूरत है. आरोपियों ने वैभव को लालच दिया कि यदि वह अपने नाम से खाता खुलवाता है, तो इसके एवज में उसे अच्छी-खासी पॉकेट मनी और जेब खर्च भी दिया जाएगा.

फर्जी बैंक कर्मचारी और थंब इंप्रेशन मशीन के जरिए जालसाजों ने खोला सेविंग व करेंट अकाउंट

वैभव उनकी चिकनी-चुपड़ी बातों में आ गया और उनकी मदद करने के लिए तैयार हो गया. शिकायतकर्ता के मुताबिक, इसके बाद दोनों आरोपी उसे नवापारा स्थित एक अज्ञात ठिकाने पर ले गए. वहां एक अज्ञात व्यक्ति मौजूद था, जिसे आरोपियों ने बैंक का अधिकृत कर्मचारी बताकर वैभव से मिलवाया. उस कथित कर्मचारी ने कागजी कार्रवाई के नाम पर एक थंब इंप्रेशन (अंगूठा लगाने वाली) मशीन में वैभव का अंगूठा लगवाया और कुछ महत्वपूर्ण बैंकिंग दस्तावेजों व फॉर्मों पर उसके हस्ताक्षर ले लिए.

इस चालाकी के जरिए आरोपियों ने आईडीबीआई बैंक में वैभव के नाम पर एक सेविंग (बचत) और एक करेंट (चालू) खाता सफलतापूर्वक खोल दिया. खाता खुलने के कुछ दिनों बाद ही दोनों शातिर आरोपियों ने बैंक से आई चेकबुक, पासबुक और एटीएम कार्ड (ATM) बहला-फुसलाकर अपने कब्जे में ले लिए और सुरक्षा के तौर पर वैभव से एक कोरे चेक पर भी दस्तखत करवा कर रख लिए.

बैंक अधिकारियों के घर पहुंचने पर खुला 1.80 करोड़ रुपये के काले खेल का राज

इस पूरे अंतरराष्ट्रीय स्तर के लग रहे वित्तीय घोटाले का पर्दाफाश तब हुआ, जब 21 मई 2025 को आईडीबीआई बैंक के असली कर्मचारी अचानक वैभव के घर का पता ढूंढते हुए पहुंचे. बैंक अधिकारियों ने वैभव और उसके परिवार को बताया कि उसके खातों में अचानक करोड़ों रुपये का संदिग्ध लेनदेन हो रहा है, जो कि उसकी आय के स्रोतों से मेल नहीं खाता. यह सुनते ही वैभव और उसके परिजनों के पैरों तले जमीन खिसक गई.

घबराए परिजन तुरंत मुख्य बैंक शाखा पहुंचे और जब वहां खातों का पूरा स्टेटमेंट निकाला गया, तो पता चला कि वैभव के नाम पर सक्रिय इन दोनों खातों के जरिए करीब 1 करोड़ 80 लाख रुपये का भारी-भरकम ट्रांजेक्शन किया जा चुका है. सच्चाई सामने आते ही वैभव ने किसी भी कानूनी पचड़े से बचने के लिए तत्काल बैंक प्रबंधन को लिखित आवेदन देकर दोनों खातों को फ्रीज और बंद करने की गुहार लगाई.

भारतीय न्याय संहिता के तहत मामला दर्ज, साइबर फ्रॉड के एंगल से जांच में जुटी पुलिस

बैंक से धोखाधड़ी के पुख्ता सबूत मिलने के बाद पीड़ित वैभव सूर्यवंशी तुरंत गांधीनगर थाने पहुंचा और आरोपियों के खिलाफ नामजद शिकायत दर्ज कराई. पुलिस ने मामले की गंभीरता और भारी-भरकम रकम को देखते हुए आरोपी सुमित सिंह ठाकुर और अनुज सिंह के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) और 319 के तहत आपराधिक मुकदमा दर्ज कर लिया है. थाना प्रभारी ने बताया कि शुरुआती जांच और तौर-तरीकों को देखकर यह साफ लग रहा है कि यह मामला सीधे तौर पर संगठित साइबर फ्रॉड, गेमिंग या फर्जी वित्तीय लेनदेन (मनी लॉन्ड्रिंग) के सिंडिकेट से जुड़ा हुआ है. पुलिस अब बैंक से ट्रांजेक्शन का पूरा तकनीकी ब्योरा (IP Address और लॉग्स) निकालकर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस पैसे का असली स्रोत क्या था और इसे कहां ट्रांसफर किया गया.

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