Silver price crash
Silver price crash: सोमवार, 29 दिसंबर 2025 का दिन सराफा बाजार के इतिहास में एक ‘रोलर-कोस्टर राइड’ की तरह दर्ज किया गया। सुबह के सत्र में जब बाजार खुला, तो चांदी की चमक ने निवेशकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। देखते ही देखते चांदी की कीमतों ने आसमान छू लिया और एक नया सर्वकालिक रिकॉर्ड स्थापित किया। लेकिन यह खुशी ज्यादा देर टिक नहीं सकी। जैसे ही कीमतों ने अपने उच्चतम स्तर को छुआ, बाजार में एक ऐसी बिकवाली शुरू हुई जिसने पिछले कई सालों के रिकॉर्ड तोड़ दिए। महज एक घंटे के भीतर चांदी की कीमतों में जो गिरावट आई, उसने निवेशकों के करोड़ों रुपये स्वाहा कर दिए।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोमवार सुबह चांदी के मार्च वायदा भाव ने वह मुकाम हासिल किया, जिसकी कल्पना कुछ समय पहले तक नामुमकिन लगती थी। चांदी की कीमत 2,54,174 रुपये प्रति किलो के अविश्वसनीय स्तर पर पहुंच गई। वैश्विक मांग और घरेलू बाजार में आपूर्ति की कमी के कारण निवेशकों को लग रहा था कि साल 2025 का अंत चांदी के लिए एक स्वर्णिम युग की शुरुआत होगा। बुलियन मार्केट में हर तरफ चांदी की तेजी के ही चर्चे थे और सट्टेबाज और भी ऊंचे दांव लगाने की तैयारी में थे।
ऊंचाई पर पहुंचने के बाद बाजार का नियम है कि वहां से सुधार (Correction) आता है, लेकिन सोमवार को जो हुआ वह सुधार नहीं बल्कि एक विध्वंस जैसा था। जैसे ही भाव ढाई लाख के पार निकले, बड़े खिलाड़ियों और संस्थागत निवेशकों ने जबरदस्त मुनाफावसूली (Profit Booking) शुरू कर दी। बाजार में अचानक बिकवाली का दबाव इतना बढ़ गया कि कीमतों को संभलने का मौका ही नहीं मिला। महज 60 मिनट के भीतर चांदी का भाव 21,500 रुपये प्रति किलो तक गिर गया। यह किसी भी कमोडिटी के लिए एक दिन में होने वाली सबसे बड़ी और तेज गिरावटों में से एक है।
गिरावट के बाद चांदी का भाव लुढ़ककर 2,32,663 रुपये पर आ गया। अचानक आई इस गिरावट से उन छोटे निवेशकों और ट्रेडर्स को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ जिन्होंने ऊंचे भाव पर खरीदारी की थी। बाजार के जानकारों का कहना है कि तकनीकी रूप से इसे ‘प्राइस रिजेक्शन’ कहा जाता है, जहाँ कीमतें एक स्तर के बाद टिक नहीं पातीं। ट्रेडर्स के स्टॉप-लॉस हिट होने के कारण गिरावट और गहरी होती चली गई। दोपहर होते-होते बाजार में जश्न का माहौल मातम में बदल गया और हर तरफ बस इस क्रैश की चर्चा होने लगी।
चांदी में आए इस जबरदस्त मार्केट ड्रामे ने यह साबित कर दिया है कि निवेश में जोखिम हमेशा बना रहता है। हालांकि कीमतें अभी भी ऐतिहासिक रूप से ऊंचे स्तर पर हैं, लेकिन 21,500 रुपये की इस एकतरफा गिरावट ने खरीदारों के आत्मविश्वास को हिला दिया है। विशेषज्ञों की सलाह है कि इस अस्थिरता के दौर में निवेशकों को सावधानी बरतनी चाहिए और बिना सोचे-समझे किसी भी उछाल पर दांव लगाने से बचना चाहिए। 2025 के समापन पर चांदी का यह व्यवहार आने वाले नए साल के लिए बड़े आर्थिक संकेतों की ओर इशारा कर रहा है।
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