Sitting on Floor
Sitting on Floor: आज के आधुनिक दौर में हमारी जीवनशैली से जुड़ी आदतों में तेजी से बदलाव आ रहे हैं। खाने की आदतों की बात करें तो, जहाँ पुराने समय में लोग जमीन पर आलती-पालती (सुखासन) मारकर बैठकर भोजन करते थे, वहीं आजकल डाइनिंग टेबल या बिस्तर पर बैठकर खाना खाना आम हो गया है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि डाइनिंग टेबल या बेड पर खाने की यह आधुनिक आदत आपके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकती है? दरअसल, इन जगहों पर बैठकर खाने से आपका पोस्चर (मुद्रा) सही नहीं रहता, जिससे पाचन और शरीर की बनावट से जुड़ी कई तरह की समस्याएँ उत्पन्न होने लगती हैं।
इसलिए, स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, जमीन पर बैठकर खाना खाना आज भी सबसे अच्छा तरीका माना जाता है। इसी विषय पर, प्रसिद्ध डाइटिशियन और न्यूट्रिशनिस्ट श्रेया गोयल ने अपने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो साझा किया है, जिसमें उन्होंने फर्श पर बैठकर भोजन करने के कई महत्वपूर्ण लाभ बताए हैं। आइए जानते हैं जमीन पर बैठकर खाना खाने के उन अद्भुत फायदों के बारे में, जो आपको एक स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।
डाइटिशियन श्रेया गोयल बताती हैं कि जमीन पर बैठकर खाना खाने से आपकी पाचन प्रक्रिया (Digestion) अत्यंत आसान हो जाती है। जब आप आलती-पालती मारकर जमीन पर बैठते हैं, तो यह मुद्रा आपके पाचन तंत्र को नेचुरली (स्वाभाविक रूप से) एक्टिव कर देती है। इस स्थिति में, शरीर भोजन को पचाने के लिए बेहतर ढंग से तैयार हो जाता है, जिससे खाना पचाना आसान हो जाता है। इसके परिणामस्वरूप, पेट से जुड़ी कई तरह की समस्याएँ जैसे अपच, एसिडिटी और सूजन आदि भी दूर होती हैं।
जमीन पर बैठकर खाने का एक और बड़ा फायदा यह है कि यह आपकी गट हेल्थ (आंतों का स्वास्थ्य) को बेहतर बनाता है। जब आप सुखासन में बैठकर खाना खाते समय आगे की ओर झुककर बाइट लेते हैं और फिर वापस सीधे होते हैं, तो आपके पेट की मांसपेशियों पर हल्का दबाव पड़ता है। यह लयबद्ध दबाव पेट को एक तरह की हल्की मसाज देता है। इस मसाज से भोजन आसानी से पचता है और आंतों में बिना किसी रुकावट के आगे बढ़ता है। नियमित रूप से इस मुद्रा में खाने से आपका पाचन तंत्र मजबूत होता है और गैस, कब्ज जैसी पुरानी समस्याएँ दूर रहती हैं।
फर्श पर बैठकर खाने की आदत माइंडफुल ईटिंग (सजगता से भोजन) की प्रक्रिया को बढ़ावा देती है। जब आप शांत वातावरण में नीचे बैठकर केवल खाने पर ध्यान केंद्रित करते हैं, तो आप अपने शरीर द्वारा भेजे जा रहे हंगर सिग्नल्स (भूख और तृप्ति के संकेत) को बेहतर तरीके से समझ पाते हैं। यह आदत न केवल आपको जरूरत से ज्यादा खाने (Overeating) से बचाती है, बल्कि भोजन के स्वाद और सुगंध को भी बढ़ाती है। इस अभ्यास से मानसिक शांति मिलती है, तनाव कम होता है और पाचन क्रिया भी बेहतर ढंग से काम करती है। यह एक प्राचीन तरीका है जो शरीर और मन के बीच संतुलन स्थापित करता है।
जमीन पर बैठकर भोजन करने से आपके शरीर का पोस्चर (मुद्रा) भी सही रहता है। यह रीढ़ की हड्डी को सीधा रखता है और आपको बार-बार उठने-बैठने के लिए प्रेरित करता है, जिससे शरीर में लचीलापन बना रहता है। इस तरह से खाना खाना योगिक मुद्रा से मिलता-जुलता है, जो लंबे समय में आपके समग्र स्वास्थ्य और दीर्घायु के लिए फायदेमंद हो सकता है।
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