Skink Lizard Facts
Skink Lizard Facts : भारतीय ग्रामीण अंचलों और बगीचों में अक्सर एक बेहद चमकदार और फुर्तीला जीव दिखाई देता है, जिसे आम बोलचाल में ‘सांप की मौसी’ या ‘बभनी’ कहा जाता है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से यह ‘स्किंक’ (Skink) परिवार की एक छिपकली है। इसकी बनावट इतनी चिकनी और गति इतनी तीव्र होती है कि लोग इसे अक्सर सांप का छोटा रूप समझने की भूल कर बैठते हैं। हालांकि, सच्चाई यह है कि यह जीव पूरी तरह से विषहीन होता है और मानव जाति को किसी भी प्रकार का नुकसान नहीं पहुंचाता है। अक्सर अपनी शारीरिक बनावट के कारण यह गलतफहमी का शिकार होकर मारा जाता है, जबकि यह हमारे पर्यावरण का एक अभिन्न हिस्सा है।
स्किंक के बारे में समाज में कई तरह की भ्रांतियां और लोक कथाएं प्रचलित हैं। कुछ क्षेत्रों में यह माना जाता है कि यदि यह जीव घर में दिखे या इसे छुआ जाए, तो धन की प्राप्ति होती है। हालांकि, विज्ञान इन दावों को पूरी तरह से नकारता है और इसे केवल एक लोक किंवदंती मानता है। वास्तविकता यह है कि स्किंक एक उत्कृष्ट ‘पेस्ट कंट्रोलर’ है। यह छोटे कीड़ों, मकोड़ों और दीमकों को खाकर हमारी फसलों और घरों को सुरक्षित रखने में मदद करती है। इस जीव का पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) में होना किसानों और आम लोगों के लिए बहुत फायदेमंद है।
भारत सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ZSI) ने साल 2020 में ‘स्किंक्स ऑफ इंडिया’ नाम से एक विस्तृत मोनोग्राफ प्रकाशित किया था। इस रिपोर्ट को तैयार करने में वैज्ञानिकों ने चार साल तक कड़ा परिश्रम किया और लगभग 4,000 नमूनों का गहन अध्ययन किया। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में स्किंक की कुल 62 प्रजातियां पाई जाती हैं। दिलचस्प बात यह है कि इनमें से 57 प्रतिशत प्रजातियां ‘एंडेमिक’ हैं, यानी ये केवल भारत की भौगोलिक सीमाओं के भीतर ही पाई जाती हैं और दुनिया के किसी अन्य हिस्से में मौजूद नहीं हैं।
छिपकलियों की दुनिया में स्किंक सबसे बड़ा परिवार माना जाता है। वैश्विक स्तर पर इसकी कुल 1,602 प्रजातियां दर्ज हैं। हालांकि, वैश्विक विविधता के मुकाबले भारत की हिस्सेदारी 4 प्रतिशत से भी कम है, लेकिन भारत में पाई जाने वाली प्रजातियों की विशिष्टता इसे खास बनाती है। ये जीव अपनी चमकदार स्केल्स और छोटे, बेलनाकार शरीर के लिए जाने जाते हैं। ये बहुत सतर्क और तेज चलने वाले जीव हैं, जो मुख्य रूप से बिना रीढ़ वाले जीवों (Invertebrates) और मकड़ियों का शिकार कर प्रकृति का संतुलन बनाए रखते हैं।
भारत में स्किंक के वितरण की बात करें तो पश्चिमी घाट (Western Ghats) इस मामले में सबसे समृद्ध है, जहां इसकी 24 प्रजातियां मिलती हैं और इनमें से 18 केवल इसी क्षेत्र तक सीमित हैं। दक्कन प्रायद्वीप (Deccan Peninsula) में 19 प्रजातियां दर्ज हैं, जिनमें से 13 एंडेमिक हैं। पूर्वोत्तर भारत में 14 प्रजातियों के रिकॉर्ड मिलते हैं। भारत में स्किंक के कुल 16 जेनेरा (Genera) हैं, जिनमें से चार वंश—सेप्सोफिस, बरकुड़िया, कैस्ट्लिया और रिस्टेला—पूरी तरह से भारतीय मूल के हैं। यह विविधता दर्शाती है कि भारत इन छोटे जीवों के संरक्षण के लिए कितना महत्वपूर्ण केंद्र है।
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