Sleep Deprivation : अगर आप रोजाना जरूरत से कम सोते हैं या देर रात तक जागने की आदत है, तो शुरुआत में इसका असर स्पष्ट रूप से महसूस नहीं हो सकता। कई बार व्यक्ति सामान्य दिनचर्या और कामकाज करता रहता है, लेकिन लगातार नींद की कमी धीरे-धीरे मस्तिष्क की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकती है। पर्याप्त नींद केवल शरीर को आराम देने के लिए जरूरी नहीं है, बल्कि दिमाग के बेहतर तरीके से काम करने के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जाती है।
नींद के दौरान दिमाग करता है जरूरी काम
नोएडा स्थित फोर्टिस अस्पताल की सीनियर कंसल्टेंट न्यूरोलॉजिस्ट एवं यूनिट हेड डॉक्टर नेहा पंडिता के अनुसार, नींद के दौरान मस्तिष्क दिनभर मिली जानकारी को व्यवस्थित और प्रोसेस करता है। इसी दौरान यादों को मजबूत करने और अगले दिन के लिए दिमाग को तैयार करने जैसी प्रक्रियाएं होती हैं। नींद दिमाग के उन सिस्टम को भी व्यवस्थित रखने में मदद करती है, जो सोचने, समझने और निर्णय लेने जैसी क्षमताओं से जुड़े होते हैं।
कम नींद से ध्यान केंद्रित करना हो सकता है मुश्किल
नींद पूरी नहीं होने का सबसे शुरुआती असर आपकी एकाग्रता पर दिखाई दे सकता है। लगातार कम सोने वाले व्यक्ति के लिए लंबे समय तक किसी काम पर ध्यान बनाए रखना मुश्किल हो सकता है। रोजमर्रा के सामान्य काम पूरे करने के बावजूद ध्यान बार-बार भटक सकता है और प्रतिक्रिया देने में सामान्य से अधिक समय लग सकता है। इसका परिणाम छोटी-छोटी गलतियों के रूप में सामने आ सकता है।
काम करने की क्षमता को लेकर हो सकता है भ्रम
नींद की कमी का एक असर यह भी हो सकता है कि व्यक्ति को खुद महसूस न हो कि उसकी कार्यक्षमता पहले की तुलना में कम हो गई है। वह अपने काम को सामान्य तरीके से करने में सक्षम महसूस कर सकता है, लेकिन ध्यान में कमी और प्रतिक्रिया की गति प्रभावित होने के कारण गलतियों की संख्या बढ़ सकती है। इसलिए केवल यह महसूस करना कि आप काम कर पा रहे हैं, पर्याप्त नींद का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
लगातार चिड़चिड़ापन भी हो सकता है संकेत
कई रातों तक पर्याप्त नींद नहीं लेने पर मूड में बदलाव देखने को मिल सकता है। छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा या परेशानी महसूस होना, धैर्य कम होना और चिड़चिड़ापन बढ़ना नींद की कमी से जुड़ा हो सकता है। पर्याप्त आराम नहीं मिलने पर भावनाओं को नियंत्रित करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। ऐसे में जिसे सामान्य तौर पर खराब मूड समझा जाता है, उसके पीछे नींद की कमी भी एक कारण हो सकती है।
निर्णय लेने और समस्या सुलझाने की क्षमता पर असर
पर्याप्त नींद न मिलने से सोचने और निर्णय लेने की क्षमता भी प्रभावित हो सकती है। दिमाग को आराम नहीं मिलने पर किसी समस्या के अलग-अलग पहलुओं को समझने, सही विकल्प चुनने और परिस्थितियों के अनुसार प्रतिक्रिया देने में कठिनाई हो सकती है। इसलिए लगातार कम नींद का असर केवल थकान तक सीमित नहीं रहता, बल्कि रोजमर्रा के महत्वपूर्ण फैसलों पर भी पड़ सकता है।
वयस्कों के लिए कितने घंटे की नींद जरूरी
डॉक्टर नेहा पंडिता के अनुसार, नींद को काम और जागने के बीच बचा हुआ समय नहीं समझना चाहिए। यह वह अवधि है जब दिमाग और शरीर अगले दिन की गतिविधियों के लिए खुद को तैयार करते हैं। आम तौर पर वयस्कों को रोजाना सात या उससे अधिक घंटे की नींद लेने की सलाह दी जाती है। हालांकि, नींद की व्यक्तिगत जरूरत उम्र, स्वास्थ्य और अन्य परिस्थितियों के अनुसार अलग हो सकती है।
नींद की अवधि के साथ गुणवत्ता भी जरूरी
सिर्फ सात घंटे बिस्तर पर रहना ही पर्याप्त नहीं माना जाता। नींद की गुणवत्ता और नियमितता भी महत्वपूर्ण होती है। रोजाना लगभग एक ही समय पर सोने और जागने की आदत बेहतर नींद की दिनचर्या बनाने में मदद कर सकती है। अगर लगातार नींद की समस्या बनी रहती है या दिन में अत्यधिक नींद, ध्यान की कमी और थकान महसूस होती है, तो विशेषज्ञ से सलाह लेना उचित हो सकता है।
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