Social Media Warning
Social Media Warning: डिजिटल सुरक्षा और इंटरनेट को सुरक्षित बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने मंगलवार को एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने सभी सोशल मीडिया दिग्गजों को स्पष्ट चेतावनी दी है कि वे अपने प्लेटफॉर्म्स से अश्लील, भद्दे और गैर-कानूनी कंटेंट को तुरंत हटा दें। इस निर्देश में साफ किया गया है कि कंपनियां अब अपनी जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकतीं। यदि किसी भी प्लेटफॉर्म पर पोर्नोग्राफिक या बच्चों के यौन शोषण (CSAM) से संबंधित सामग्री पाई जाती है, तो सरकार मूकदर्शक नहीं बनी रहेगी। यह कदम सोशल मीडिया के जरिए फैल रही गंदगी को साफ करने और डिजिटल नागरिकों, विशेषकर महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने यह महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी की है। समाचार एजेंसी पीटीआई (PTI) की रिपोर्ट के अनुसार, मंत्रालय ने सभी इंटरनेट मध्यस्थों (Intermediaries) को सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम के तहत अपने अनुपालन ढांचे (Compliance Framework) की समीक्षा करने का निर्देश दिया है। सरकार ने पाया है कि कई कंपनियां नियमों का पालन करने में कोताही बरत रही हैं। मंत्रालय ने जोर देकर कहा है कि प्लेटफॉर्म्स को अपनी एल्गोरिदम और मॉडरेशन टीम को इस तरह तैयार करना होगा कि ऐसा संवेदनशील कंटेंट अपलोड होते ही सिस्टम उसे पहचान सके और सार्वजनिक होने से पहले ही ब्लॉक कर सके।
इस बार की एडवाइजरी में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सरकार ने केवल कंपनियों तक ही कार्रवाई को सीमित नहीं रखा है। नए निर्देशों के अनुसार, यदि कोई प्लेटफॉर्म अश्लील कंटेंट को पहचानने और उसे हटाने में ढिलाई बरतता है, तो न केवल उस कंपनी के अधिकारियों पर, बल्कि उस कंटेंट को साझा करने वाले यूजर्स पर भी आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जा सकता है। सरकार ने ‘सेफ हार्बर’ सुरक्षा (जिसके तहत प्लेटफॉर्म्स को यूजर्स के पोस्ट के लिए जिम्मेदार नहीं माना जाता) को लेकर संकेत दिया है कि नियमों की अनदेखी करने पर कंपनियां यह सुरक्षा खो सकती हैं।
सरकार ने चिंता व्यक्त की है कि वर्तमान में कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म भद्दे और गैर-कानूनी कंटेंट को हटाने में बहुत अधिक समय ले रहे हैं। अब कंपनियों को एक ऐसा तंत्र विकसित करना होगा जो नियमित और तेजी से काम करे। सरकार का उद्देश्य एक ऐसा वातावरण तैयार करना है जहाँ कोई भी व्यक्ति बच्चों के लिए नुकसानदायक सामग्री या समाज की नैतिकता के खिलाफ जाने वाला कंटेंट साझा करने की हिम्मत न कर सके। कंपनियों को अब हर महीने अपनी ‘शिकायत निवारण रिपोर्ट’ (Grievance Redressal Report) में यह भी बताना होगा कि उन्होंने कितने अश्लील वीडियो या पोस्ट को सक्रिय रूप से हटाया है।
केंद्र सरकार ने अपनी एडवाइजरी में मुख्य रूप से पांच प्रकार की सामग्रियों को ‘रेड जोन’ में रखा है। सरकार चाहती है कि कोई भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म निम्नलिखित कंटेंट को बढ़ावा न दे:
अश्लील या गंदा कंटेंट: जो सामाजिक मर्यादाओं के खिलाफ हो।
पोर्नोग्राफिक सामग्री: किसी भी प्रकार का वयस्क कंटेंट जो नियमों का उल्लंघन करता हो।
बच्चों का यौन शोषण (CSAM): इसे लेकर सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति है।
बच्चों के लिए हानिकारक: ऐसी सामग्री जो बच्चों के मानसिक विकास पर बुरा प्रभाव डाले।
गैर-कानूनी कंटेंट: जो भारतीय कानूनों और संप्रभुता को चुनौती देता हो।
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