Solar Eclipse 2026
Solar Eclipse 2026 Dates: आगामी वर्ष 2026 खगोलीय और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण रहने वाला है। इस साल अंतरिक्ष में कुल चार ग्रहणों की अद्भुत घटनाएं देखने को मिलेंगी, जिनमें दो सूर्य ग्रहण और दो चंद्र ग्रहण शामिल होंगे। विज्ञान के लिए जहाँ यह एक खगोलीय घटना है, वहीं ज्योतिष शास्त्र में ग्रहण को शुभ-अशुभ प्रभावों से जोड़कर देखा जाता है। विशेष रूप से भारत में रहने वाले लोगों के लिए यह जानना जरूरी है कि इनमें से कौन से ग्रहण भारत में दिखाई देंगे और कहाँ सूतक काल के नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा।
साल 2026 की शुरुआत एक वलयाकार सूर्य ग्रहण के साथ होगी। यह घटना 17 फरवरी को मंगलवार के दिन घटेगी। वलयाकार सूर्य ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा पृथ्वी से दूर होने के कारण सूर्य को पूरी तरह नहीं ढक पाता, जिससे सूर्य एक ‘आग की अंगूठी’ (Ring of Fire) की तरह दिखाई देता है। यह नजारा मुख्य रूप से पश्चिम एशिया, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका के कुछ हिस्सों में दिखेगा। अच्छी खबर यह है कि भारत में यह ग्रहण दृश्यमान नहीं होगा, इसलिए यहाँ इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा और सामान्य दिनचर्या जारी रहेगी।
साल 2026 का सबसे चर्चित ग्रहण 3 मार्च को लगेगा। यह एक उपछाया चंद्र ग्रहण होगा और सबसे खास बात यह है कि इसी दिन देश में ‘होली’ का त्योहार मनाया जाएगा। यह ग्रहण शाम 06:26 बजे से लेकर 06:46 बजे तक रहेगा। चूंकि यह भारत के साथ-साथ एशिया और यूरोप में भी दिखाई देगा, इसलिए यहाँ सूतक काल के नियम प्रभावी होंगे। त्योहार के दिन ग्रहण लगने के कारण पूजा-पाठ और होली के रंगों को लेकर लोगों को विशेष सावधानी बरतनी होगी।
अगस्त के महीने में साल का दूसरा सूर्य ग्रहण लगेगा। 12 अगस्त 2026 को होने वाला यह ग्रहण भी एक वलयाकार सूर्य ग्रहण ही होगा। यह खगोलीय घटना मुख्य रूप से अटलांटिक क्षेत्र, अर्जेंटीना और अमेरिका के आसमान में दिखाई देगी। भारत में इस सूर्य ग्रहण की दृश्यता शून्य रहेगी, जिसके कारण भारतीय परंपराओं के अनुसार किसी भी प्रकार के सूतक काल या धार्मिक पाबंदी की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। लोग बिना किसी बाधा के अपने शुभ कार्य कर सकेंगे।
2026 का आखिरी ग्रहण 28 अगस्त को एक आंशिक चंद्र ग्रहण के रूप में लगेगा। इस दिन चंद्रमा का कुछ हिस्सा पृथ्वी की छाया में छिप जाएगा। यह ग्रहण भारत के कुछ हिस्सों में आंशिक रूप से दिखाई देगा, साथ ही अफ्रीका और यूरोप में भी इसका असर रहेगा। जिन क्षेत्रों में यह दिखेगा, वहाँ सूतक काल के नियमों का पालन करना होगा। ग्रहण की समाप्ति के बाद स्नान और दान-पुण्य की परंपरा का निर्वहन करना फलदायी माना जाता है।
भारतीय संस्कृति में ग्रहण के दौरान ‘सूतक काल’ को बेहद संवेदनशील माना जाता है। इस अवधि में मंदिरों के पट बंद कर दिए जाते हैं और मूर्तियों को स्पर्श करना वर्जित होता है। मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण के समय भोजन करने से बचना चाहिए और पके हुए खाने को शुद्ध रखने के लिए उसमें तुलसी के पत्ते डाल देने चाहिए। विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं को इस दौरान धारदार वस्तुओं (जैसे चाकू या कैंची) का प्रयोग न करने और घर के भीतर रहने की सलाह दी जाती है ताकि नकारात्मक ऊर्जा से बचाव हो सके।
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