Sonam Wangchuk Hunger Strike: लगातार गिर रहा ब्लड शुगर, समर्थकों ने सरकार से की बड़ी अपील

Sonam Wangchuk Hunger Strike:  राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर पर लद्दाख की मांगों को लेकर चल रहा सोनम वांगचुक का अनशन अब एक गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। भूख हड़ताल के पांचवें दिन, प्रख्यात पर्यावरणविद् और कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य में लगातार गिरावट दर्ज की गई है। उनके स्वास्थ्य की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है, जहां उनका ब्लड शुगर लेवल गिरकर 60 तक पहुंच गया है और रक्तचाप (BP) भी काफी निम्न स्तर पर बना हुआ है।

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इस स्थिति पर प्रतिक्रिया देते हुए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सरकार को चेतावनी दी है। दीपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी चिंता जाहिर करते हुए कहा कि यदि वांगचुक के स्वास्थ्य को कोई गंभीर नुकसान पहुंचता है, तो उसके लिए पूरी तरह से केंद्र सरकार जिम्मेदार होगी। उन्होंने इसके साथ ही केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की अपनी पूर्व मांग को भी मजबूती से दोहराया है।

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स्वास्थ्य विशेषज्ञों की रिपोर्ट: शारीरिक गिरावट के डराने वाले आंकड़े

पांचवें दिन भी सोनम वांगचुक अपने संकल्प के साथ जंतर-मंतर पर डटे हुए हैं। उनके साथ अनशन कर रहे लोगों और मेडिकल टीम के अनुसार, उनके शरीर पर उपवास का प्रतिकूल प्रभाव स्पष्ट दिखाई दे रहा है। स्वास्थ्य जांच करने वाले डॉक्टर नितिन दिघे ने जानकारी दी है कि महज कुछ दिनों में ही वांगचुक का वजन लगभग 2.4 किलोग्राम घट गया है, जो उनके शारीरिक स्वास्थ्य में आ रही तीव्र गिरावट को दर्शाता है। इससे पहले बुधवार को किए गए मेडिकल परीक्षण में उनका ब्लड प्रेशर 110/70, हृदय गति 77 धड़कन प्रति मिनट और ऑक्सीजन का स्तर 96 प्रतिशत दर्ज किया गया था। विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक भोजन का सेवन न करना उनके महत्वपूर्ण अंगों पर दबाव बढ़ा रहा है, जिससे आगामी दिनों में स्थिति और जटिल हो सकती है।

आंदोलन का विस्तार और ‘कॉकरोचों के साथ चाय पर चर्चा’ का नया प्रयोग

इस बीच, आंदोलन को व्यापक रूप देने के लिए नवाचारी प्रयास भी किए जा रहे हैं। सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने ‘कॉकरोचों के साथ चाय पर चर्चा’ नामक एक नई पहल की घोषणा की है। इस अनूठी पहल का उद्देश्य जंतर-मंतर पर मौजूद प्रदर्शनकारियों और आंदोलन से सहानुभूति रखने वाले लोगों के साथ सीधे संवाद करना है। दीपके का मानना है कि इस चर्चा के माध्यम से वे आंदोलन को और अधिक प्रभावी, व्यापक और संगठित बनाने के लिए नए सुझाव प्राप्त कर सकते हैं। वे इस बात पर जोर दे रहे हैं कि कैसे इस संघर्ष को राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी पहचान दिलाई जाए ताकि सरकार उनकी मांगों को गंभीरता से सुने।

छात्रों का समर्थन और एकजुट होता अनशन का मंच

सोनम वांगचुक के इस संघर्ष को विभिन्न समूहों का समर्थन भी मिल रहा है। ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) से जुड़े छह छात्र भी प्रदर्शन स्थल पर मौजूद हैं, जो वांगचुक के समर्थन में और लद्दाख के मुद्दों को लेकर अपने अलग मंच से अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे हुए हैं। यह एकजुटता आंदोलन को एक नई ऊर्जा दे रही है। जंतर-मंतर का माहौल इस समय पूरी तरह से वांगचुक की मांगों और उनके स्वास्थ्य को लेकर गंभीर बना हुआ है, जहां लगातार बड़ी संख्या में लोग और सामाजिक कार्यकर्ता समर्थन देने के लिए पहुंच रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का साफ कहना है कि जब तक उनकी मांगे पूरी नहीं होतीं, तब तक यह अनशन किसी भी कीमत पर जारी रहेगा।

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Chandan Das

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