Sonam Wangchuk : लद्दाख के भविष्य, लोकतांत्रिक अधिकारों और क्षेत्र को संवैधानिक सुरक्षा देने की मांग को लेकर केंद्र सरकार और स्थानीय प्रतिनिधियों के बीच बातचीत एक बार फिर चर्चा में है। पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने हालिया घटनाक्रम पर बयान देते हुए कहा कि 15 अक्टूबर को लेह में हुई बैठक का कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। उनके मुताबिक, गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों और लेह एपेक्स बॉडी (LAB) तथा कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) की उपसमिति के बीच हुई बातचीत पूरी तरह विफल रही।
22 अक्टूबर को दिल्ली में बैठक की उम्मीद
सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर बताया कि उन्हें 22 अक्टूबर को गृह मंत्रालय के साथ बातचीत के लिए दिल्ली बुलाए जाने की जानकारी दी गई थी। इसी वजह से वह दिल्ली पहुंचे। हालांकि, उन्होंने आशंका जताई कि निर्धारित दिन भी बातचीत नहीं हो पाएगी। वांगचुक के अनुसार, पहले हुई चर्चा के दौरान प्रतिनिधियों को 22 अक्टूबर को दिल्ली में अगली बैठक करने का आश्वासन दिया गया था।
सरकार पर वादे से पीछे हटने का आरोप
वांगचुक ने कहा कि यदि आज भी बातचीत नहीं होती है, तो यह एक बार फिर दिए गए आश्वासन से पीछे हटने जैसा होगा। उन्होंने बताया कि वह दिल्ली पहुंचकर लद्दाख भवन में पत्रकारों से बात करेंगे और पूरे घटनाक्रम पर अपना पक्ष रखेंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार लद्दाख के प्रतिनिधियों के साथ संवाद करेगी, ताकि लंबे समय से उठाए जा रहे मुद्दों पर आगे की राह निकल सके।
लद्दाख के लोगों की मांगों का किया जिक्र
सोनम वांगचुक ने कहा कि लद्दाख के लोग अपने भविष्य और लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर चिंतित हैं। उनके मुताबिक, क्षेत्र के निवासियों को देश के अन्य नागरिकों के समान अधिकार और राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। उन्होंने वोट डालने, अपनी सरकार चुनने और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में प्रभावी भागीदारी जैसे अधिकारों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन मुद्दों पर लोगों की अपेक्षाएं लंबे समय से बनी हुई हैं।
चीन के दबाव का भी किया दावा
वांगचुक ने अपने बयान में चीन का जिक्र करते हुए कहा कि सीमा पार से भी लद्दाख को लेकर दबाव की स्थिति बनती है। उन्होंने दावा किया कि चीन की ओर से लद्दाख की स्थिति को लेकर ऐसे बयान दिए जाते हैं, जिनमें क्षेत्र पर भारत के अधिकार को चुनौती देने की कोशिश की जाती है। वांगचुक ने कहा कि भारत के प्रति लद्दाख के लोगों का गहरा लगाव है, लेकिन उनके अनुसार, जब स्थानीय मांगों पर आश्वासन पूरे नहीं होते, तो लोगों में निराशा बढ़ती है।
अब बातचीत पर टिकी निगाहें
लद्दाख से जुड़े मुद्दों पर केंद्र और स्थानीय प्रतिनिधियों के बीच संवाद को लेकर अब 22 अक्टूबर के घटनाक्रम पर नजर है। वांगचुक ने बातचीत होने की उम्मीद जताई, लेकिन साथ ही आशंका भी जाहिर की कि बैठक टल सकती है। फिलहाल, उनके बयान में लगाए गए आरोपों और बैठक की स्थिति पर केंद्र सरकार का पक्ष सामने आना महत्वपूर्ण होगा। आगे की बातचीत से ही स्पष्ट होगा कि लद्दाख की मांगों पर सहमति बनाने की दिशा में क्या प्रगति होती है।
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