Sonam Wangchuk Arrest: लद्दाख में जारी जनआंदोलन और केंद्र सरकार से जलवायु व जनजातीय अधिकारों की मांगों के बीच शुक्रवार (26 सितंबर, 2025) को जाने-माने पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तारी के तुरंत बाद लेह में इंटरनेट सेवाएं अस्थायी रूप से बंद कर दी गईं। इस घटनाक्रम ने पूरे देश में तीखी प्रतिक्रिया पैदा कर दी है।
गिरफ्तारी के कुछ ही घंटों बाद सोनम वांगचुक की पत्नी, गीतांजलि अंगमो ने इस कार्रवाई की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने इसे न केवल लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया, बल्कि सरकार पर “शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारी को अपराधी की तरह पेश करने” का गंभीर आरोप भी लगाया।
गीतांजलि अंगमो ने मीडिया को दिए बयान में कहा “मेरे पति के साथ बिना किसी सुनवाई के एक अपराधी की तरह व्यवहार किया जा रहा है।” उन्होंने यह भी कहा कि वांगचुक पिछले कई वर्षों से शांतिपूर्वक, संवैधानिक तरीके से लद्दाख की जनता के अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने सरकार पर यह आरोप लगाया कि वह सोनम वांगचुक की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बनी सकारात्मक छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रही है।
गीतांजलि ने अपने बयान में सरकार की आलोचना करते हुए कहा: “सरकार को इतना नीचे नहीं गिरना चाहिए कि वह एक ऐसे व्यक्ति की छवि धूमिल करे, जिसने पर्यावरण, शिक्षा और कृषि के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर भारत को गौरव दिलाया है।” उन्होंने यह भी कहा कि वह स्वयं वेद, वेदांत और भगवद गीता की शिक्षिका हैं और यह स्थिति भारत की बौद्धिक स्वतंत्रता पर हमला है।”यह वह भारत नहीं है जिसकी कल्पना श्री अरबिंदो ने की थी, और यह वह हिंदू धर्म नहीं है जिसकी बात वेद और वेदांत करते हैं।”
गीतांजलि अंगमो ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को भी निशाने पर लेते हुए कहा:”कृपया वे खुद को हिंदू न कहें, क्योंकि हिंदू धर्म का आधार सत्य है। झूठ के आधार पर राजनीति करने वाले हिंदूवादी नहीं हो सकते।”उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार आलोचकों की आवाज को दबाने के लिए जांच एजेंसियों (FCRA, CBI) का दुरुपयोग कर रही है।
गीतांजलि ने केंद्र सरकार को चुनौती दी कि “अगर उनके पास सच्चाई है तो वे मेरे पति के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर लाइव प्राइम टाइम टीवी डिबेट में बहस करें।”यह चुनौती सरकार की पारदर्शिता और लोकतंत्र में विश्वास पर सवाल खड़े करती है।
सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी न केवल लद्दाख में लोगों के असंतोष को बढ़ा रही है, बल्कि यह मामला लोकतांत्रिक अधिकारों, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण विरोध के दायरे पर भी गंभीर सवाल खड़ा कर रहा है। उनकी पत्नी गीतांजलि अंगमो के बयान ने इस बहस को और तेज कर दिया है कि क्या आज का भारत वाकई अपने विचारशील नागरिकों और इनोवेटर्स की सुरक्षा कर पा रहा है?
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