SP MP Chhotelal
SP MP Chhotelal: भारतीय लोकतंत्र के मंदिर, लोकसभा में अक्सर तीखी बहस और हंगामे की खबरें सामने आती हैं, लेकिन मंगलवार का दिन कुछ अलग था। सदन की कार्यवाही के दौरान एक ऐसा क्षण आया जिसने वहां मौजूद सभी सदस्यों के चेहरों पर मुस्कान ला दी। समाजवादी पार्टी (सपा) के एक सांसद ने रेलवे से जुड़ी अपनी मांगों को सदन के पटल पर रखने के लिए किसी लंबे भाषण या शोर-शराबे के बजाय ‘लोकगीत’ का सहारा लिया। सांसद के इस सुरीले और पारंपरिक अंदाज ने सदन के गंभीर माहौल को अचानक बेहद खुशनुमा और दिलचस्प बना दिया। उनके इस अनूठे प्रदर्शन के दौरान उनके ठीक पीछे बैठीं मछलीशहर की युवा सांसद प्रिया सरोज भी अपनी मुस्कुराहट नहीं रोक सकीं और लगातार ताली बजाकर उनका उत्साहवर्धन करती नजर आईं।
यह दिलचस्प वाकया उस समय हुआ जब सदन में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए रेल मंत्रालय से संबंधित अनुदान मांगों पर चर्चा चल रही थी। रॉबर्ट्सगंज (उत्तर प्रदेश) से सपा सांसद छोटेलाल अपनी बात रखने के लिए खड़े हुए। उन्होंने अपने निर्वाचन क्षेत्र की समस्याओं को गिनाने के लिए कागजों के बजाय अपनी लेखनी का परिचय दिया। छोटेलाल ने सदन को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘अध्यक्ष महोदय, मैंने क्षेत्र की समस्याओं पर एक गीत लिखा है और मैं उसे ही सुनाना चाहता हूँ।’’ इसके बाद उन्होंने पूरी लय और सुर के साथ अपना पारंपरिक लोकगीत गाना शुरू किया।
छोटेलाल ने अपनी क्षेत्रीय भाषा और शैली में गाते हुए कहा— ‘‘सोनभद्र के भईली आज जर्जर हलतिया होअ, जर्जर हलतिया एकदम बदतर हलतिया होअ… कहिया ले ट्रेन चली सब ओरिया… मंत्री जी सुनी पुकरिया।’’ इस गीत के माध्यम से उन्होंने सोनभद्र और रॉबर्ट्सगंज क्षेत्र में रेल सुविधाओं की खस्ताहाल स्थिति और नई ट्रेनों की आवश्यकता की ओर ध्यान खींचा। उन्होंने बहुत ही सरल शब्दों में यह संदेश दिया कि क्षेत्र की जनता कब से ट्रेनों के चलने का इंतजार कर रही है और अब समय आ गया है कि रेल मंत्री उनकी पुकार सुनें।
सांसद का यह सुरीला अंदाज देख सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों ओर के सदस्य मंत्रमुग्ध हो गए। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू इस अनोखे प्रस्तुतीकरण को देखकर अपनी हंसी नहीं रोक सके और मेज थपथपाकर इस तरीके की सराहना की। हालांकि, सदन की मर्यादा और समय सीमा का ध्यान रखते हुए पीठासीन सभापति कृष्णा प्रसाद तेन्नेटी ने बीच में टोकते हुए मुस्कुराकर कहा, ‘‘सांसद जी, आपका गीत बहुत अच्छा है, अब अपनी मुख्य मांग भी बता दीजिए।’’ इसके बावजूद छोटेलाल ने अपनी मांगों का मुख्य हिस्सा भी लोकगीत की तर्ज पर ही पूरा किया।
अक्सर देखा जाता है कि सांसद अपनी बात रखने के लिए भारी-भरकम शब्दों का प्रयोग करते हैं, लेकिन छोटेलाल के इस अंदाज ने साबित कर दिया कि क्षेत्रीय संस्कृति और कला के माध्यम से भी अपनी बात प्रभावी ढंग से रखी जा सकती है। संसद परिसर और सोशल मीडिया पर इस घटना का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। लोग इसे संसदीय इतिहास के ‘लाइट मोमेंट्स’ (हल्के-फुल्के पल) के तौर पर देख रहे हैं। विशेष रूप से उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं को जिस खूबसूरती से उन्होंने ‘लोकगीत’ में पिरोया, उसकी हर तरफ चर्चा हो रही है।
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