Stray Dog Menace: देश में आवारा कुत्तों के बढ़ते मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों की लापरवाही पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने हाल ही में यह स्पष्ट किया कि राज्यों की तरफ से हलफनामा दाखिल नहीं किए जाने से देशभर में आवारा कुत्तों के हमले रोकने में बाधा आ रही है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने तीन नवंबर को सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को अदालत में तलब किया है। हालांकि, पश्चिम बंगाल और तेलंगाना के मुख्य सचिवों को उपस्थित नहीं होना होगा, क्योंकि इन राज्यों ने पहले ही हलफनामा दाखिल कर दिया है।
अगस्त 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने देशव्यापी स्तर पर आवारा कुत्तों के मामलों की सुनवाई करते हुए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को नोटिस जारी किया था। कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में आवारा कुत्तों को पकड़कर उनकी स्टरलाइजेशन और वैक्सिनेशन कराने का आदेश दिया था। इसके बाद उन्हें उनके इलाके में वापस छोड़ने का निर्देश भी दिया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि अगस्त के आदेश के बावजूद देशभर में आवारा कुत्तों के हमले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। बच्चों पर हुए हमलों के मामले चिंता का विषय बन गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने उदाहरण देते हुए बताया कि पिछले महीने महाराष्ट्र के पुणे में एक बच्चे पर कुत्तों ने हमला किया। इससे पहले ऐसी ही घटना एक बच्ची के साथ हुई थी। इसके अलावा भंडारा जिले में 20 कुत्तों के झुंड ने एक बच्चे पर हमला किया। कोर्ट ने कहा कि इस तरह के मामले देश की छवि को प्रभावित कर रहे हैं।
कोर्ट ने राज्य सरकारों को चेतावनी दी कि उनकी लापरवाही से न केवल नागरिकों की सुरक्षा खतरे में है, बल्कि देश की अंतरराष्ट्रीय छवि भी खराब हो रही है। अदालत ने कहा, “अभी तक राज्य सरकारों की तरफ से हलफनामा दाखिल नहीं किया गया है। दो महीने हो गए और अब तक आपने जवाब दाखिल नहीं किया है। यह विश्व स्तर पर हमारे देश की छवि को नुकसान पहुंचा रहा है।”
सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को निर्देश दिया है कि वे तीन नवंबर तक हलफनामा दाखिल करें और आवारा कुत्तों की समस्या को गंभीरता से लें। कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकारों को न केवल स्टरलाइजेशन और वैक्सिनेशन कार्यक्रम लागू करना है, बल्कि आवारा कुत्तों के हमलों के मामलों पर निगरानी भी बढ़ानी होगी।सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि बच्चों और आम नागरिकों पर हमले की घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाना जरूरी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि अगर राज्य सरकारें आदेश का पालन नहीं करती हैं, तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि आवारा कुत्तों की समस्या केवल एनिमल वेलफेयर का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह सार्वजनिक सुरक्षा का भी मामला है। राज्यों को चाहिए कि वे नगर निगमों और पशु कल्याण समितियों के साथ मिलकर अभियान चलाएं। स्टरलाइजेशन, वैक्सिनेशन और सुरक्षित तरीके से कुत्तों को उनके इलाके में लौटाने की प्रक्रिया को तेजी से लागू किया जाना चाहिए।सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि आवारा कुत्तों के मामलों पर नजरअंदाज करना गंभीर अपराध के समान है। बच्चों और नागरिकों की सुरक्षा सर्वोपरि है।
देश में आवारा कुत्तों की समस्या लगातार बढ़ती जा रही है और राज्य सरकारों की लापरवाही इसके पीछे मुख्य कारण बन रही है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ चेतावनी दी है कि तीन नवंबर तक हलफनामा न दाखिल करने वाली राज्य सरकारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यह मामला न केवल बच्चों और नागरिकों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि देश की अंतरराष्ट्रीय छवि के लिए भी अहम है।
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