Veto on Strait of Hormuz
Veto on Strait of Hormuz : न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की एक महत्वपूर्ण बैठक के दौरान हॉर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के प्रस्ताव पर रूस और चीन ने वीटो लगा दिया। यह प्रस्ताव अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और तेल आपूर्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लाया गया था। दिलचस्प बात यह है कि इस प्रस्ताव को पहले ही कई बार संशोधित और “कमजोर” किया गया था ताकि रूस और चीन जैसे देशों की आपत्तियों को दूर किया जा सके और उन्हें समर्थन के लिए राजी किया जा सके। हालांकि, इन तमाम कोशिशों के बावजूद दोनों देशों ने अपना रुख कड़ा रखा और प्रस्ताव को खारिज कर दिया। 15 सदस्यीय सुरक्षा परिषद में वोटिंग के दौरान 11 देशों ने प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया, जबकि 2 देशों (रूस और चीन) ने वीटो किया। पाकिस्तान और कोलंबिया ने इस मतदान प्रक्रिया से खुद को दूर रखा।
यह कूटनीतिक घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को बेहद सख्त लहजे में चेतावनी दी है। ट्रंप ने ईरान को रात 8 बजे (ईस्टर्न समय) तक का समय देते हुए कहा है कि यदि इस समय सीमा तक हॉर्मुज जलडमरूमध्य को नहीं खोला गया, तो ईरान को भीषण सैन्य हमलों का सामना करना पड़ेगा। ट्रंप के इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है। सुरक्षा परिषद में वीटो होने के बाद अब यह डर सता रहा है कि क्या अमेरिका एकतरफा सैन्य कार्रवाई की ओर कदम बढ़ाएगा, जिससे खाड़ी क्षेत्र में युद्ध की स्थिति पैदा हो सकती है।
हॉर्मुज जलमार्ग को लेकर इस प्रस्ताव को बहरीन द्वारा पेश किया गया था। शुरुआत में यह प्रस्ताव काफी आक्रामक था और इसमें ‘सभी जरूरी उपाय’ अपनाने की शब्दावली का इस्तेमाल किया गया था। कूटनीतिक भाषा में इसका सीधा अर्थ सैन्य बल के प्रयोग की अनुमति देना होता है। इसका प्राथमिक उद्देश्य किसी भी कीमत पर जहाजों की आवाजाही बहाल करना था। लेकिन रूस, चीन और फ्रांस जैसे वीटो शक्ति संपन्न देशों ने इस पर कड़ा ऐतराज जताया। उनके विरोध के बाद प्रस्ताव को नरम किया गया और इसमें से किसी भी तरह की सैन्य या आक्रामक कार्रवाई की अनुमति से संबंधित प्रावधानों को पूरी तरह हटा दिया गया था।
अंतिम रूप से जिस प्रस्ताव पर वोटिंग हुई, उसमें केवल यह अपील की गई थी कि जलमार्ग का उपयोग करने वाले देश आपसी सहयोग से रक्षात्मक कदम उठाएं। हॉर्मुज जलडमरूमध्य की महत्ता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल का व्यापार इसी संकरे समुद्री रास्ते से होता है। यदि यह मार्ग बंद रहता है, तो वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा सकता है और तेल की कीमतों में भारी उछाल आने की संभावना है। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस मार्ग की सुरक्षा सीधे तौर पर वैश्विक अर्थव्यवस्था की स्थिरता से जुड़ी हुई है।
ताजा रिपोर्टों के अनुसार, 28 फरवरी से अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए हमलों के जवाब में ईरान ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। ईरान ने कथित तौर पर 10 से अधिक देशों में होटल, हवाई अड्डे, रिहायशी इलाकों और अन्य नागरिक बुनियादी ढांचों को निशाना बनाया है। इस संघर्ष की चपेट में खाड़ी के वे देश भी आ गए हैं जो दुनिया के सबसे बड़े तेल और गैस निर्यातक हैं। ईरान की इन गतिविधियों ने न केवल समुद्री सुरक्षा को खतरे में डाला है, बल्कि पूरे मध्य पूर्व में एक बड़े मानवीय और आर्थिक संकट की आहट दे दी है। अब पूरी दुनिया की नजरें ट्रंप के अल्टीमेटम और ईरान की अगली प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।
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