पटना के कन्या विद्यालय में छात्रा ने लगाई आत्महत्या की कोशिश, हालत गंभीर

पटना के गर्दनीबाग इलाके के आमला टोला में स्थित एक कन्या विद्यालय में बुधवार सुबह 5वीं कक्षा की छात्रा जोया परवीन ने खुद को आग लगा ली। छात्रा की हालत गंभीर बनी हुई है और उसे तत्काल पीएमसीएच (पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल) में भर्ती कराया गया है। यह दर्दनाक घटना स्कूल के बाथरूम में हुई, जहां छात्रा ने आत्मदाह की कोशिश की।

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घटना के बाद तनावपूर्ण माहौल

छात्रा की आत्महत्या की कोशिश की खबर मिलते ही स्कूल परिसर में भारी आक्रोश फैल गया। जोया के परिजन और सहपाठियां गुस्साए हुए स्कूल में तोड़फोड़ करने लगे। पुलिस को मौके पर तैनात करना पड़ा ताकि स्थिति को नियंत्रित किया जा सके। केंद्रीय एसपी दीक्षा भी घटना स्थल पर पहुंचीं और मामले की गहन जांच शुरू कर दी गई है।

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पुलिस जांच और फॉरेंसिक टीम की सक्रियता

पुलिस ने बाथरूम से लगभग आधा लीटर केरोसीन तेल का डिब्बा बरामद किया है। पुलिस ने घटना स्थल को सील कर दिया है और फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) की टीम जांच में जुटी है। साथ ही, स्कूल के सीसीटीवी फुटेज भी प्रशासन ने मांगे हैं ताकि आत्मदाह के पीछे की सच्चाई सामने आ सके।

पड़ोसियों और परिजनों की शिकायतें

पड़ोसियों ने बताया कि जोया एक मासूम और शांत स्वभाव की बच्ची थी। उन्होंने आरोप लगाया कि स्कूल के शिक्षक जोया को स्कूल आने से रोकते थे, लेकिन इस बात की जानकारी परिजनों को नहीं दी गई। पड़ोसियों ने यह भी कहा कि स्कूल के आसपास कुछ नशे में लड़कों की उपस्थिति थी, जिनके खिलाफ प्रशासन ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।

एक पड़ोसी का यह भी कहना है कि जोया ने खुद को जलाने की कोशिश नहीं की, बल्कि किसी ने उसे जलाया है। उन्होंने स्कूल प्रशासन से सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक करने की मांग की है, ताकि पूरे मामले की सही तह तक पहुंचा जा सके।

स्कूल सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल

यह घटना बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। शिक्षा विभाग और प्रशासन को मिलकर स्कूलों में सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त करनी होगी ताकि ऐसी घटनाओं से बचा जा सके। साथ ही, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं न हों।

पटना के कन्या विद्यालय में हुई आत्महत्या की यह कोशिश बच्चों की सुरक्षा और स्कूल प्रशासन की जिम्मेदारी पर सवाल उठाती है। यह एक गंभीर चेतावनी है कि स्कूलों में बच्चों के मानसिक और शारीरिक सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाए। प्रशासन को इस मामले की गहन और पारदर्शी जांच कर दोषियों को सजा दिलानी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

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