MCB News : कोरोना महामारी के दौरान जान जोखिम में डालकर जनता की सेवा करने वाले एनएचएम कर्मचारी अब खुद अपनी रोज़ी-रोटी के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं। बीते 10 दिनों से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठे कर्मचारियों ने सरकार से गुहार लगाई, लेकिन जब आवाज़ अनसुनी रह गई तो आज मनेंद्रगढ़ में उन्होंने फिर से एक अनोखा विरोध प्रदर्शन किया।

शहर की सड़कों पर पीपीई किट पहनकर उतरे ये स्वास्थ्यकर्मी दुकानदारों, बस चालकों, किराना व्यापारियों और आम राहगीरों से 1 रुपए की भीख मांगते नज़र आए। यह दृश्य देखते ही लोग ठिठक गए और चर्चा का विषय बन गया। कई लोगों ने कर्मचारियों की व्यथा सुनी और समर्थन भी जताया।

सरकार की चुप्पी पर उठे सवाल
कर्मचारियों का कहना है कि कोरोना संकट के समय जब लोग अपने घरों में कैद थे, तब उन्होंने पीपीई किट पहनकर दिन-रात मरीजों की सेवा की। लेकिन अब जब उनकी बुनियादी और जायज़ मांगों की बारी आई, तो सरकार पूरी तरह चुप है। न कोई ठोस पहल की गई और न ही कोई आधिकारिक बयान सामने आया।
एक कर्मचारी ने व्यंग्य करते हुए कहा – “कोरोना काल में हमने जान दांव पर लगाकर लोगों को बचाया, लेकिन आज हमें ही अपने जीवनयापन के लिए सड़कों पर भीख मांगनी पड़ रही है। सरकार कब तक हमारी आवाज़ को दबाती रहेगी?”
स्वास्थ्य सेवाएं चरमराईं
एनएचएम कर्मचारियों की हड़ताल के चलते प्रदेश के स्वास्थ्य ढांचे पर गहरा असर पड़ा है। अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में व्यवस्थाएं चरमराई हुई हैं। मरीजों को इलाज में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बावजूद इसके, सरकार और स्वास्थ्य विभाग अब तक ठोस समाधान की ओर कदम बढ़ाते नहीं दिख रहे।
कर्मचारियों ने साफ चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगों को जल्द पूरा नहीं किया गया, तो आंदोलन और उग्र होगा। मनेंद्रगढ़ का यह प्रदर्शन अब पूरे प्रदेश में चर्चा का केंद्र बन गया है और सवाल यही है कि सरकार इस ज्वलंत मुद्दे पर आखिर कब जागेगी।











